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1600 से ज्यादा लोगों ने खाद्यान्न की वसूली के भय से लौटाए राशनकार्ड
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शाहजहांपुर। अपात्रों से सस्ते खाद्यान्न की बाजार मूल्य पर वसूली करने की चर्चाओं के कारण जिले में राशनकार्ड आपूर्ति विभाग को सरेंडर करने (लौटाने) का सिलसिला जारी है। अभी तक लगभग 1600 लोग स्वयं को अपात्र मानते हुए स्वेच्छा से राशनकार्ड जमा कर चुके हैं। अधिकारी भी मानते हैं कि शासन ने अपात्रों से खाद्यान्न की वसूली का कोई आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन लोगों में वसूली कार्रवाई को लेकर इतना खौफ घर कर गया है कि वह स्वयं राशनकार्ड जमा कर रहे हैं।
जिले में अंत्योदय और पात्र गृहस्थी श्रेणी के पांच लाख, 75 हजार, 126 राशन कार्ड जारी किए हैं। लॉकडाउन लागू होने के बाद गत वर्ष एक अप्रैल से इन सभी कार्डधारकों को उचित दर दुकानों से खाद्यान्न का मुफ्त वितरण शुरू हुआ तो गरीब तबके के ऐसे लोगों की लाइनें लगनी शुरू हो गईं, जिनके राशनकार्ड नहीं बन सके थे। उन्हें शहरी क्षेत्र में निर्धारित मानक के अनुसार राशनकार्ड जारी करने में कठिनाई हुई तो अधिकारियों ने राशनकार्ड का सत्यापन कर ऐसे कार्ड निरस्त करने शुरू कर दिए जो पात्रता की कसौटी पूरी नहीं कर रहे थे।
अधिकारियों ने अपात्रों को इस चेतावनी के साथ अपने कार्ड जमा करने को कहा कि भविष्य में जांच के दौरान अपात्र पाए जाने पर उनसे उचित दर दुकानों से मुफ्त लिए गए खाद्यान्न (गेहूं व चावल) की बाजार मूल्य पर वसूली की जाएगी। बाद में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने पर अधिकारियों ने पुराने राशनकार्डों का सत्यापन भी रोक दिया।
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चुनाव के बाद फिर से राशनकार्ड जमा कराने का अभियान शुरू किया तो ऐसे लोगों में खाद्यान्न की वसूली का खौफ गहराने लगा जो वास्तव में पात्रता के मानक पूरे नहीं कर रहे थे। शुरुआत में राशनकार्ड बहुत कम जमा हुए, लेकिन बीते एक माह के दौरान जनपद में करीब 700 लोगों ने कार्ड सरेंडर कर दिए। अधिकारी भी मानते हैं कि इन दिनों जितने लोग नए कार्ड बनवाने आ रहे हैं, उनसे कहीं अधिक संख्या ऐसे लोगों की है, जो अपने कार्ड जमा करा रहे हैं।
जो लोग खुद को अपात्र मानकर अपने राशनकार्ड जमा कर रहे हैं, उन्हें हाथों-हाथ लिया जा रहा है क्योंकि पुराने कार्ड कटने पर ही नए पात्र आवेदकों को राशन कार्ड देना संभव होगा। नए राशन कार्डों के आवेदनों की तुलना में इस समय पुराने कार्ड जमा करने वाले ज्यादा आ रहे हैं। अपात्रों से खाद्यान्न की वसूली करने का शासन से न तो विधानसभा चुनाव से पहले कोई आदेश मिला था और न ही हाल ही मेें ऐसा कोई शासनादेश जारी हुआ है। -ओमहरि उपाध्याय, जिला आपूर्ति अधिकारी
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जिले में अंत्योदय और पात्र गृहस्थी श्रेणी के पांच लाख, 75 हजार, 126 राशन कार्ड जारी किए हैं। लॉकडाउन लागू होने के बाद गत वर्ष एक अप्रैल से इन सभी कार्डधारकों को उचित दर दुकानों से खाद्यान्न का मुफ्त वितरण शुरू हुआ तो गरीब तबके के ऐसे लोगों की लाइनें लगनी शुरू हो गईं, जिनके राशनकार्ड नहीं बन सके थे। उन्हें शहरी क्षेत्र में निर्धारित मानक के अनुसार राशनकार्ड जारी करने में कठिनाई हुई तो अधिकारियों ने राशनकार्ड का सत्यापन कर ऐसे कार्ड निरस्त करने शुरू कर दिए जो पात्रता की कसौटी पूरी नहीं कर रहे थे।
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अधिकारियों ने अपात्रों को इस चेतावनी के साथ अपने कार्ड जमा करने को कहा कि भविष्य में जांच के दौरान अपात्र पाए जाने पर उनसे उचित दर दुकानों से मुफ्त लिए गए खाद्यान्न (गेहूं व चावल) की बाजार मूल्य पर वसूली की जाएगी। बाद में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने पर अधिकारियों ने पुराने राशनकार्डों का सत्यापन भी रोक दिया।
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चुनाव के बाद फिर से राशनकार्ड जमा कराने का अभियान शुरू किया तो ऐसे लोगों में खाद्यान्न की वसूली का खौफ गहराने लगा जो वास्तव में पात्रता के मानक पूरे नहीं कर रहे थे। शुरुआत में राशनकार्ड बहुत कम जमा हुए, लेकिन बीते एक माह के दौरान जनपद में करीब 700 लोगों ने कार्ड सरेंडर कर दिए। अधिकारी भी मानते हैं कि इन दिनों जितने लोग नए कार्ड बनवाने आ रहे हैं, उनसे कहीं अधिक संख्या ऐसे लोगों की है, जो अपने कार्ड जमा करा रहे हैं।
जो लोग खुद को अपात्र मानकर अपने राशनकार्ड जमा कर रहे हैं, उन्हें हाथों-हाथ लिया जा रहा है क्योंकि पुराने कार्ड कटने पर ही नए पात्र आवेदकों को राशन कार्ड देना संभव होगा। नए राशन कार्डों के आवेदनों की तुलना में इस समय पुराने कार्ड जमा करने वाले ज्यादा आ रहे हैं। अपात्रों से खाद्यान्न की वसूली करने का शासन से न तो विधानसभा चुनाव से पहले कोई आदेश मिला था और न ही हाल ही मेें ऐसा कोई शासनादेश जारी हुआ है। -ओमहरि उपाध्याय, जिला आपूर्ति अधिकारी