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मानसून एक्सप्रेस पटरी पर दौड़ते ही धान की रोपाई तेज
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Sun, 17 Jul 2016 11:36 PM IST
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मानसून एक्सप्रेस पटरी पर दौड़ते ही किसानों के चेहरे खुशी से खिलने लगे हैं और इसी के साथ खाली पड़े खेतों में धान की रोपाई का काम तेज हो गया है। हालांकि, पिछले मानसून सीजन की तुलना में इस वर्ष अभी तक बारिश कम हुई है और धान का रकबा भी 58 हजार हेक्टेयर घटकर 1.53 लाख हेक्टेयर रह गया है, लेकिन रोजाना बरस रहे मेघ को किसान परिवारों ने हाथों-हाथ लिया। करीब 75 फीसदी धान की रोपाई का काम पूरा हो चुका है।
दरअसल, सात लाख किसानों वाले कृषि प्रधान जिले में अधिसंख्य कम जोत वाले ऐसे छोटे किसान हैं, जिन्हें खरीफ सीजन में नहरों या फिर दूसरों की बोरिंग से सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके बदले उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ती है इसलिए खरीफ फसलों के लिए मानसून का बेसब्री से इंतजार रहता है। यही वजह है कि गत सप्ताह तक बारिश का दौर धीमा रहने से धान की बमुश्किल 50 फीसदी रोपाई हो सकी थी।
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सामान्य से 75 प्रतिशत कम हुई बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो एक जून से अब तक सामान्य कम बारिश हुई है। गन्ना शोध परिषद के मौसम विज्ञानी डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार इस वर्ष जनवरी से अब तक 345 मिमी बारिश हुई जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 507 मिमी बरसात रिकार्ड की गई थी। बारिश के माहवार आंकड़ों पर नजर डालें तो भी इस वर्ष जून और जुलाई में अब तक पिछले साल की तुलना में 52 मिमी कम बारिश रिकार्ड की गई। मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव के अनुसार जिले में रविवार को 37.2 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। उन्होंने बताया कि एक जून से 15 सितंबर तक मानसून सीजन में कम से कम एक हजार मिमी बरसात होनी चाहिए, लेकिन अभी तक सिर्फ 322 मिमी बरसात हुई।
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खराब पड़े हैं तमाम सरकारी नलकूप
सिंचाई के लिए सरकारी नलकूप वर्षा का बेहतर विकल्प बनते हैं, लेकिन जिले में करीब दो दर्जन ट्यूबवेल अरसे से खराब हैं। खास यह है कि कुल 561 नलकूपों में केवल 482 क्रियाशील हैं। उनमें से 14 ट्यूबवेल बिजली और तकनीकी खराबियों के कारण कई साल से बंद हैं। नलकूपों की खराबी का मुद्दा सिंचाई बंधु की बैठकों में उठता है, लेकिन सुधार की गति बेहद धीमी है। 121 नहरों में कई ऐसी माइनर हैं, जो कुलाबों की समस्या के कारण अंतिम छोर पर सूखी पड़ी हैं।
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फोटो 12 में।
बारिश शुरू होने के साथ मानसून पर निर्भर किसानों ने पौध लगाने का काम तेज कर दिया है। धान का लगभग 75 फीसदी रकबा धान पौध से आच्छादित हो चुका है। गत कई साल से सूखा की स्थितियां बनने के कारण जिले के किसानों ने इस बार धान की खेती में कमी कर दी है। बारिश अच्छी होने की दशा में अगले साल धान का रकबा बढ़ने के आसार हैं।
-एसपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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दरअसल, सात लाख किसानों वाले कृषि प्रधान जिले में अधिसंख्य कम जोत वाले ऐसे छोटे किसान हैं, जिन्हें खरीफ सीजन में नहरों या फिर दूसरों की बोरिंग से सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके बदले उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ती है इसलिए खरीफ फसलों के लिए मानसून का बेसब्री से इंतजार रहता है। यही वजह है कि गत सप्ताह तक बारिश का दौर धीमा रहने से धान की बमुश्किल 50 फीसदी रोपाई हो सकी थी।
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सामान्य से 75 प्रतिशत कम हुई बारिश
मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो एक जून से अब तक सामान्य कम बारिश हुई है। गन्ना शोध परिषद के मौसम विज्ञानी डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार इस वर्ष जनवरी से अब तक 345 मिमी बारिश हुई जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 507 मिमी बरसात रिकार्ड की गई थी। बारिश के माहवार आंकड़ों पर नजर डालें तो भी इस वर्ष जून और जुलाई में अब तक पिछले साल की तुलना में 52 मिमी कम बारिश रिकार्ड की गई। मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव के अनुसार जिले में रविवार को 37.2 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। उन्होंने बताया कि एक जून से 15 सितंबर तक मानसून सीजन में कम से कम एक हजार मिमी बरसात होनी चाहिए, लेकिन अभी तक सिर्फ 322 मिमी बरसात हुई।
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खराब पड़े हैं तमाम सरकारी नलकूप
सिंचाई के लिए सरकारी नलकूप वर्षा का बेहतर विकल्प बनते हैं, लेकिन जिले में करीब दो दर्जन ट्यूबवेल अरसे से खराब हैं। खास यह है कि कुल 561 नलकूपों में केवल 482 क्रियाशील हैं। उनमें से 14 ट्यूबवेल बिजली और तकनीकी खराबियों के कारण कई साल से बंद हैं। नलकूपों की खराबी का मुद्दा सिंचाई बंधु की बैठकों में उठता है, लेकिन सुधार की गति बेहद धीमी है। 121 नहरों में कई ऐसी माइनर हैं, जो कुलाबों की समस्या के कारण अंतिम छोर पर सूखी पड़ी हैं।
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फोटो 12 में।
बारिश शुरू होने के साथ मानसून पर निर्भर किसानों ने पौध लगाने का काम तेज कर दिया है। धान का लगभग 75 फीसदी रकबा धान पौध से आच्छादित हो चुका है। गत कई साल से सूखा की स्थितियां बनने के कारण जिले के किसानों ने इस बार धान की खेती में कमी कर दी है। बारिश अच्छी होने की दशा में अगले साल धान का रकबा बढ़ने के आसार हैं।
-एसपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी