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बंदरों का आतंक : निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं करा सका नगर निगम, अब वन विभाग से लेगा मदद
Wed, 06 May 2026 10:58 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 06 May 2026 10:58 PM IST
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कैंट क्षेत्र में फुटपाथ पर बैठे बंदर। संवाद
शाहजहांपुर। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों के उत्पात से कई लोगों की जान जा चुकी है, अब तक प्रशासन बंदरों को पकड़ने के पुख्ता प्रबंध नहीं कर सका है। रोजाना सैकड़ों लोग सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में एआरवी लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। शहर में नगर निगम पांच महीने बीतने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका है। अब नगर निगम बंदर पकड़ने के लिए वन विभाग से मदद लेगा।
जनपद में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। केवल नगर निगम क्षेत्र में करीब दस हजार बंदर चिह्नित किए गए थे। पीड़ित लगातार बंदरों को पकड़ने के लिए अधिकारियों से शिकायत करते हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पाया है। नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने के लिए 27 नवंबर को टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन इसके लिए कोई निविदा नहीं आई। एक दिसंबर को फिर से दूसरी टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। इसकी निविदा 15 दिसंबर को खोली, लेकिन तब भी कोई निविदा नहीं आई। निकाय स्तर पर तो बंदरों को पकड़ने लिए अभी कोई प्रक्रिया अपनाई ही नहीं गई है।
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प्रचार-प्रसार की कमी से बंदरों को पकड़ने का नहीं हो पाया टेंडर
नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने के लिए दो बार निविदाएं निकालीं, लेकिन प्रचार-प्रसार की कमी के चलते बंदरों को पकड़ने वाले लोगों को जानकारी नहीं हो पाई। अब नगर निगम बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग के साथ बैठक करेगा। इसमें बंदरों को पकड़ने वालों का सहयोग लिया जाएगा। इसके बाद फिर से जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संभावना है कि इसके बाद बंदरों को पकड़ने का टेंडर जल्द हो जाएगा।
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निगोही में बंदरों ने मचाया उत्पात
निगोही। मोहल्ला रामबाग में बुधवार को सुबह करीब छह बजे मिठाई विक्रेता विनोद के घर की छत पर कपड़े सुखाने के लिए बंधी रस्सी से बंदर का एक बच्चा खेलते हुए उसमें फंस कर मर गया। इस पर मोहल्ले में 50-60 बंदर वहां इकट्ठा होकर उत्पात मचाने लगे। इस दौरान विनोद का 12 वर्षीय पुत्र अंशू छत पर बने शौचालय के अंदर ही फंस गया। परिजनों ने पटाखे दागकर और शोर मचा कर जैसे-तैसे अंशू को बाहर निकाला, लेकिन दोपहर तक बंदर छत पर उत्पात मचाते रहे। इन दिनों कस्बे के रामबाग समेत महादेवी वर्मा, नई बस्ती, अब्दुल कलाम नगर आदि मोहल्लों में बंदरों का इस कदर कहर है कि लोगों ने छतों पर जाना बंद कर दिया है। नगरवासी कई बार बंदरों से निजात दिलाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन नगर पंचायत के स्तर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। संवाद
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रोजाना सैकड़ों लोगों को काट रहे बंदर
पुराने जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। यहां पर रोजाना तकरीबन सौ लोगों को एआरवी लगाई जाती है। इसी तरह हर सीएचसी में रोजाना लगभग 25 से 30 लोग एआरवी लगवाने पहुंचते हैं। इनमें से अधिकतर बंदर काटने के कारण एआरवी लगवाने पहुंचते हैं। एसीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने बताया कि बंदर के काटने पर घाव को 15 मिनट तक बहते पानी से साबुन लगाकर धोएं। स्प्रिट, एल्कोहल या घरेलू एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करें। घाव पर मिर्च, सरसों का तेल इत्यादि कोई अन्य पदार्थ न लगाएं।
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बंदरों की वजह से हुए हादसे
- 04 मई 2026: कलान के गांव बिचौला निवासी सेवानिवृत्त सैनिक अरविंद कुमार बंदरों के झुंड के दौड़ाने पर छत से गिरकर घायल हो गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
- 08 दिसंबर 2025 : कलान के मोहल्ला शिवनगर में बिजली उपकेंद्र के पास रहने वाले राजीव की पुत्री परी घर की छत पर खेलते समय बंदरों का झुंड आता देख उनसे बचने के फेर में नीचे गिरकर घायल हो गई।
- 26 नवंबर 2025 : मीरानपुर कटरा के सिउरा गांव में छत पर खेल रहे शिवम के पुत्र अर्पित को बंदरों ने काट लिया। कसरक गांव में किशन लाल के पुत्र अभय गोस्वामी और बाबूपुर बुजुर्ग उर्फ नगरा गांव में रामनिवास के पुत्र कृष्णा को भी बंदरों ने काटकर लहूलुहान कर दिया। बंगशान मोहल्ले में छत पर कपड़े सुखाने गईं उस्मान खां की पत्नी बानो खानम बंदरों के झुंड से बचने के लिए भागीं तो छत से नीचे गिरने से पैर टूट गया।
- 04 नवंबर 2025 : रोजा के देवरास गांव में बंदरों की उछलकूद से छज्जा गिरने से जिलेदार सिंह के चार वर्षीय बेटे कार्तिक की मलबे में दबकर मौत हो गई थी।
- 22 सितंबर 2025 : बंदरों के हमले से छत से छज्जे समेत नीचे गिरे कांट थाना क्षेत्र के औधापुर गांव निवासी 50 वर्षीय आसाराम की मौत हो गई।
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वर्जन-
बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की मदद ली जाएगी। उनके साथ बैठक कर बंदरों को पकड़ने वालों को चिह्नित किया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद बंदरों को पकड़ने का काम शुरू हो जाएगा।
- सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त
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जनपद में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। केवल नगर निगम क्षेत्र में करीब दस हजार बंदर चिह्नित किए गए थे। पीड़ित लगातार बंदरों को पकड़ने के लिए अधिकारियों से शिकायत करते हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पाया है। नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने के लिए 27 नवंबर को टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन इसके लिए कोई निविदा नहीं आई। एक दिसंबर को फिर से दूसरी टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। इसकी निविदा 15 दिसंबर को खोली, लेकिन तब भी कोई निविदा नहीं आई। निकाय स्तर पर तो बंदरों को पकड़ने लिए अभी कोई प्रक्रिया अपनाई ही नहीं गई है।
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प्रचार-प्रसार की कमी से बंदरों को पकड़ने का नहीं हो पाया टेंडर
नगर निगम ने बंदरों को पकड़ने के लिए दो बार निविदाएं निकालीं, लेकिन प्रचार-प्रसार की कमी के चलते बंदरों को पकड़ने वाले लोगों को जानकारी नहीं हो पाई। अब नगर निगम बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग के साथ बैठक करेगा। इसमें बंदरों को पकड़ने वालों का सहयोग लिया जाएगा। इसके बाद फिर से जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संभावना है कि इसके बाद बंदरों को पकड़ने का टेंडर जल्द हो जाएगा।
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निगोही में बंदरों ने मचाया उत्पात
निगोही। मोहल्ला रामबाग में बुधवार को सुबह करीब छह बजे मिठाई विक्रेता विनोद के घर की छत पर कपड़े सुखाने के लिए बंधी रस्सी से बंदर का एक बच्चा खेलते हुए उसमें फंस कर मर गया। इस पर मोहल्ले में 50-60 बंदर वहां इकट्ठा होकर उत्पात मचाने लगे। इस दौरान विनोद का 12 वर्षीय पुत्र अंशू छत पर बने शौचालय के अंदर ही फंस गया। परिजनों ने पटाखे दागकर और शोर मचा कर जैसे-तैसे अंशू को बाहर निकाला, लेकिन दोपहर तक बंदर छत पर उत्पात मचाते रहे। इन दिनों कस्बे के रामबाग समेत महादेवी वर्मा, नई बस्ती, अब्दुल कलाम नगर आदि मोहल्लों में बंदरों का इस कदर कहर है कि लोगों ने छतों पर जाना बंद कर दिया है। नगरवासी कई बार बंदरों से निजात दिलाने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन नगर पंचायत के स्तर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। संवाद
रोजाना सैकड़ों लोगों को काट रहे बंदर
पुराने जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। यहां पर रोजाना तकरीबन सौ लोगों को एआरवी लगाई जाती है। इसी तरह हर सीएचसी में रोजाना लगभग 25 से 30 लोग एआरवी लगवाने पहुंचते हैं। इनमें से अधिकतर बंदर काटने के कारण एआरवी लगवाने पहुंचते हैं। एसीएमओ डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने बताया कि बंदर के काटने पर घाव को 15 मिनट तक बहते पानी से साबुन लगाकर धोएं। स्प्रिट, एल्कोहल या घरेलू एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करें। घाव पर मिर्च, सरसों का तेल इत्यादि कोई अन्य पदार्थ न लगाएं।
बंदरों की वजह से हुए हादसे
- 04 मई 2026: कलान के गांव बिचौला निवासी सेवानिवृत्त सैनिक अरविंद कुमार बंदरों के झुंड के दौड़ाने पर छत से गिरकर घायल हो गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
- 08 दिसंबर 2025 : कलान के मोहल्ला शिवनगर में बिजली उपकेंद्र के पास रहने वाले राजीव की पुत्री परी घर की छत पर खेलते समय बंदरों का झुंड आता देख उनसे बचने के फेर में नीचे गिरकर घायल हो गई।
- 26 नवंबर 2025 : मीरानपुर कटरा के सिउरा गांव में छत पर खेल रहे शिवम के पुत्र अर्पित को बंदरों ने काट लिया। कसरक गांव में किशन लाल के पुत्र अभय गोस्वामी और बाबूपुर बुजुर्ग उर्फ नगरा गांव में रामनिवास के पुत्र कृष्णा को भी बंदरों ने काटकर लहूलुहान कर दिया। बंगशान मोहल्ले में छत पर कपड़े सुखाने गईं उस्मान खां की पत्नी बानो खानम बंदरों के झुंड से बचने के लिए भागीं तो छत से नीचे गिरने से पैर टूट गया।
- 04 नवंबर 2025 : रोजा के देवरास गांव में बंदरों की उछलकूद से छज्जा गिरने से जिलेदार सिंह के चार वर्षीय बेटे कार्तिक की मलबे में दबकर मौत हो गई थी।
- 22 सितंबर 2025 : बंदरों के हमले से छत से छज्जे समेत नीचे गिरे कांट थाना क्षेत्र के औधापुर गांव निवासी 50 वर्षीय आसाराम की मौत हो गई।
वर्जन-
बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की मदद ली जाएगी। उनके साथ बैठक कर बंदरों को पकड़ने वालों को चिह्नित किया जाएगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद बंदरों को पकड़ने का काम शुरू हो जाएगा।
- सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त