{"_id":"150ca6a2e0d243e898406ab0fa91b7d8","slug":"missed-the-humanity-behind-the-collapse-of-moral-values-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘नैतिक मूल्यों के पतन से ही पीछे छूटी मानवता’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘नैतिक मूल्यों के पतन से ही पीछे छूटी मानवता’
शाहजहांपुर।
Updated Mon, 01 Feb 2016 11:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जीएफ कॉलेज में ‘प्रमोशन ऑफ इथिक्स एंड ह्यूमन वैल्यूज’ विषयक नेशनल सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर मुख्य अतिथि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के सुन्नी थियोलॉजी के विभागाध्यक्ष प्रो. सऊद आलम कासमी ने कहा कि तालीमी इदारों का मकसद इंसानियत को तलाश करना है। टूटे दिलों को जोड़ना, भूखों को भोजन कराना और जरूरतमंदों की खिदमत करना ही नैतिकता है।
विज्ञापन
प्रो. कासमी ने इस्लाम से जुड़े कई दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि इस्लाम में नैतिकता पर सर्वाधिक बल दिया गया है। नैतिकता मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। नैतिकता के बिना कोई मनुष्य अनुशासित नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि हम जो व्यवहार खुद के प्रति चाहते हैं, वही दूसरों से करें, यही नैतिकता का और धर्म का मूल बिंदु है। दूसरों को सुखी देखना ही असली मानव मूल्य है। आज नैतिक मूल्यों के पतन ने मानवता को पीछे छोड़ा है, मनुष्यता लाने के लिए हमें वैल्यूज तलाशनेे होंगे। नैतिकता के रूप में मनुष्य में अक्ल-ओ-शऊर आता है और बिना मानव मूल्यों के मनुष्य जानवर से भी बदतर हो जाता है। प्रो. कासमी ने कहा कि कर्म, नैतिकता और मूल्य ही इंसान ही जिंदा रखते हैं।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि बरेली कॉलेज बरेली के विद्वान दर्शनशासत्री डॉ. एसी त्रिपाठी ने कहा तर्कसंगत बात रखते हुए कहा कि विकास की अंधी दौड़ में हम कहीं न कहीं आनंद खो बैठे हैं। मानव मूल्यों के क्षरण से हम जीवन जीने का सलीका ही भूल चुके हैं। आज मन बेचैन है, इससे पता चलता है कि कहीं न कहीं कुछ ऐसा-वैसा जरूर हो रहा है। जबकि हमारे ऋषि-मुनि, पीर-फकीर अपने आदर्शों, ग्रंथों, दर्शन और विचारों से आनंद से जीवन जीने का संदेश देते रहे हैं, लेकिन नैतिकता और मानव मूल्यों में आ रही गिरावट से जीवन में सरलता और सरसता के बजाया कटुता आ रही है। इस बीच उन्होंने गीता के निष्काम कर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि गीता का कर्मफल ही वास्तव में नैतिकता की नींव है।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए सेमिनार में देहरादून की प्रो. रेनू शुक्ला आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पूर्व तैयबा, सहीफा, आरजू, आरशी और सदफ ने नात पढ़ी। डॉ. इशरत अल्ताफ ने कुरआन ए पाक का पाठ किया। डॉ. खलीक अहमद ने विषय प्रवर्तन किया। प्रबंध समिति के सैयद मोइनुद्दीन मियां की अध्यक्षता में हुए सेमिनार में प्राचार्य डॉ. अकील अहमद ने स्वागत भाषण और संयोजक डॉ. मोहम्मद तैयब ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शोध अर्द्धवार्षिकी रिसर्च जरनल ऑफ सोशल साइंसेेज एंड ह्यूमिनिटीज का विमोचन भी किया गया।
डॉ. अब्दुल मोमिन और डॉ. मो. साजिद खान के संचालन में हुए कार्यक्रम में प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष मलिक अब्दुल वाहिद खां, हाजी मो. असलम खां, अब्दुल रशीद खां, काजी सैयद मसूद हसन, खालिद अलवी, शाकिर अली खां, डॉ. अनवर मसूद, डॉ. अब्दुल वहाब, डॉ. जमील अहमद, डॉ. फैयाज अहमद, डॉ. सैयद मुर्शिद हुसैन, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. आयशा जेबी, डॉ. दरख्शां, डॉ. नीलम टंडन, डॉ. ऊषा गर्ग, डॉ. अर्चना सक्सेना, सैयद अनीस अहमद, डॉ. मोहम्मद तारिक, डॉ. जीए कादरी समेत बड़ी संख्या में गणमान्य और स्टाफ के सदस्य मौजूद रहे।