पुवायां। कस्बे के हकीम जानकी प्रसाद आजादी की लड़ाई में आठ माह तक जेल में रहे। वह स्वतंत्रता सेनानियों की टोली के खास सदस्य थे।
हकीम नारायन लाल ओमर के घर छह फरवरी 1894 को उनका जन्म हुआ था। यूनानी वैद्यक में दक्षता अर्जित करने के बाद उन्होंने रोगियों की सेवा शुरू की। इसी दौरान उनमें देश सेवा का जज्बा पैदा हुआ। नगर के लाला बिहारी लाल अग्रवाल, रामसेवक शुक्ल, पंडित गेंदनलाल, लाला ओमकार नाथ अग्रवाल की टोली अंग्रेजों के खिलाफ प्रभात फेरी निकालकर लोगों को जागरूक करने के साथ ही हकीम जानकी प्रसाद के निवास पर गोपनीय बैठकें कर अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति तय करती थी। मठिया के स्कूल में उस समय पंडित रामभजन लाल अध्यापक थे। आंदोलनकारियों को स्कूल में ठहराया जाता था।
हकीम जानकी प्रसाद को अंग्रेजी सरकार ने गिरफ्तार कर शाहजहांपुर जेल भेज दिया और आठ माह तक नजरबंद रखा। 30 जनवरी 1956 को उनका निधन हो गया। हकीम जानकी प्रसाद के परिजनों ने कभी भी स्वतंत्रता संग्राम आश्रितों को मिलने वाले लाभ नहीं लिए। उनके पौत्र डॉ. सारस्वत गुप्ता का कहना है कि हकीम जानकी प्रसाद ने जो कुछ किया, देश और देशवासियों के लिए किया, उसका कोई मोल नहीं है।