{"_id":"625dc29c2369b815750fcf7e","slug":"marriage-grant-scheme-government-miserly-in-giving-budget-530-daughters-are-disappointed-shahjahanpur-news-bly481938073","type":"story","status":"publish","title_hn":"शादी अनुदान योजना: बजट देने में सरकार ने बरती कंजूसी, 530 बेटियों के नसीब में मायूसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शादी अनुदान योजना: बजट देने में सरकार ने बरती कंजूसी, 530 बेटियों के नसीब में मायूसी
विज्ञापन
शाहजहांपुर। प्रदेश सरकार की अनुसूचित जाति शादी अनुदान योजना गरीब परिवारों की बेटियों के लिए मजाक बनकर रह गई। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सरकारी मंडपों में सात फेरे लेने वाली बेटियों के खातों में 35 हजार रुपये नकद धनराशि भेजने के बाद भी पर्याप्त लाभार्थी नहीं मिलने पर समाज कल्याण विभाग को बजट की शेष धनराशि शासन को लौटानी पड़ गई। वहीं शादी अनुदान योजना में पर्याप्त बजट नहीं मिलने से 530 नव विवाहित जोड़ों को बीते वित्त वर्ष में शासन से मिलने वाली 20 हजार रुपये की आर्थिक मदद से वंचित रहना पड़ा। इन आवेदकों का दुर्भाग्य यह है कि वर्तमान वित्त वर्ष में वह दोबारा आवेदन भी नहीं कर सकेंगे।
केस-एक
शहर की कांशीराम कॉलोनी निवासी विनोद कुमार और उनकी पत्नी मेहनत-मजदूरी के काम करके गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे हैं। गत वर्ष नवंबर को उन्होंने बेटी के हाथ पीले करने से पहले सरकारी इमदाद मिलने की उम्मीद में शादी अनुदान का आवेदन ऑनलाइन कराया और समाज कल्याण विभाग में ऑफलाइन सारे कागजात जमा कराए। बेटी की शादी के बाद भी वह तीन माह तक अधिकारियों के चक्कर काटते रहे। आर्थिक सहायता मिलने का भरोसा भी दिया गया, लेकिन वित्त वर्ष बीतने पर उन्हें सिर्फ मायूसी हाथ लगी।
केस-दो
कलान तहसील के मिर्जापुर कस्बे के शैलेंद्र ने अपनी जमापूंजी बेटी के विवाह में खर्च कर दी और इसके लिए उन्हेें अपने शुभचिंतकों से कुछ रकम उधार भी लेनी पड़ी। इस बीच, उन्हें अनुदान योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने उधारी चुकता करने के लिए शादी अनुदान योजना के तहत बेटी के विवाह के दो माह के अंदर गत वर्ष पांच जून को ऑनलाइन आवेदन किया। ब्लॉक स्तर पर उन्हें पटल लिपिक यही बताते रहे कि उनके कागजात पूरे कर जिला मुख्यालय पर भेज दिए गए हैं, लेकिन योजना की अवधि बीतने पर भी उनके हाथ खाली रहे।
विज्ञापन
जिसकी सिफारिश आई, उसे मिल गया अनुदान
गुजरे सालों की तरह बीते वित्त वर्ष में भी शादी अनुदान योजना को लेकर एक अनार-सौ बीमार वाले हालात शुरू से रहे। योजना के नियमानुसार बेटियों के विवाह से 90 दिन पहले से लेकर 90 दिन बाद तक 2457 लोगों ने अनुदान को आवेदन किया। इनमेें अनुसूचित जाति के 1906 और सामान्य श्रेणी के 556 आवेदक शामिल थे। इसके विपरीत अनुसूचित जाति के 1501 लाभार्थियों को 20 हजार रुपये की दर से उनके खातों में 3.2 करोड़ रुपये और सामान्य श्रेणी के 426 लाभार्थी खातों में 85.20 लाख रुपये भेजे जा सके। अनुसूचित जाति के 405 और सामान्य श्रेणी के 125 ऐसे आवेदक हैं, जो पात्रता की शर्तें पूरी करने के बावजूद किसी नेता से सिफारिश नहीं करा पाने के कारण अनुदान का लाभ नहीं ले सके। हालांकि, ब्लॉक स्तर पर उन्हें यही कहकर टरका दिया गया कि उनके फॉर्म में सूचनाएं गलत भरी गई हैं या फिर बजट शेष नहीं बचा।
38 जोड़े नहीं मिलने पर लौटाए 19.38 लाख रुपये
मुख्यमंत्री सामूहिक योजना के निर्धारित मानकों की कसौटी पूरी करने वाले नव विवाहित जोड़ों पर सरकार प्रति जोड़ा 51 हजार रुपये व्यय करती है। इसमें नववधू को दस हजार रुपये का दहेज का सामान दिया जाता है और छह हजार रुपये सरकारी आयोजन पर खर्च होते हैं। शेष 35 हजार रुपये नववधू के बैंक खाते में भेजे जाने का प्रावधान है। अधिकारियों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में इस योजना मद में शासन से जनपद को चार करोड़ 20 लाख 75 हजार रुपये बजट प्राप्त हुआ। इस धनराशि से सभी 787 जोड़ों पर 4.01 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि व्यय की गई। जिन दंपतियों को योजना का लाभ मिला, उनमें 77 अल्पसंख्यक, 365 पिछड़ा वर्ग, 286 अनुसूचित जाति एवं जनजाति और 59 सामान्य श्रेणी के हैं। शादी अनुदान योजना के उलट अन्य लाभार्थी नहीं मिलने पर बजट की शेष धनराशि 19.38 लाख रुपये शासन को लौटाने पड़े।
शादी अनुदान योजना के तहत धन आहरण के लिए डोंगल ब्लॉक स्तर पर दिए गए हैं। जिनके आवेदन ब्लॉक स्तर से सत्यापित होकर पहले प्राप्त हो गए, उन्हें अनुदान की धनराशि मिल गई। जिन्होंने देर से (शादी से संबंधित वित्त वर्ष में) आवेदन नहीं किया, उन्हें धनराशि नहीं भेजी गई। पात्रता पूरी करने वाले अन्य तमाम आवेदक भी अनुदान पाने से वंचित रहे क्योंकि मांग की तुलना में बजट की धनराशि कम स्वीकृत हुई। यह योजना सिर्फ एक वित्त वर्ष के लिए लागू होती है। इसलिए जिन्हें अनुदान नहीं मिला, वे दोबारा आवेदन के पात्र नहीं माने जाएंगे।
-राजेश कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी
विज्ञापन
केस-एक
शहर की कांशीराम कॉलोनी निवासी विनोद कुमार और उनकी पत्नी मेहनत-मजदूरी के काम करके गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे हैं। गत वर्ष नवंबर को उन्होंने बेटी के हाथ पीले करने से पहले सरकारी इमदाद मिलने की उम्मीद में शादी अनुदान का आवेदन ऑनलाइन कराया और समाज कल्याण विभाग में ऑफलाइन सारे कागजात जमा कराए। बेटी की शादी के बाद भी वह तीन माह तक अधिकारियों के चक्कर काटते रहे। आर्थिक सहायता मिलने का भरोसा भी दिया गया, लेकिन वित्त वर्ष बीतने पर उन्हें सिर्फ मायूसी हाथ लगी।
विज्ञापन
केस-दो
कलान तहसील के मिर्जापुर कस्बे के शैलेंद्र ने अपनी जमापूंजी बेटी के विवाह में खर्च कर दी और इसके लिए उन्हेें अपने शुभचिंतकों से कुछ रकम उधार भी लेनी पड़ी। इस बीच, उन्हें अनुदान योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने उधारी चुकता करने के लिए शादी अनुदान योजना के तहत बेटी के विवाह के दो माह के अंदर गत वर्ष पांच जून को ऑनलाइन आवेदन किया। ब्लॉक स्तर पर उन्हें पटल लिपिक यही बताते रहे कि उनके कागजात पूरे कर जिला मुख्यालय पर भेज दिए गए हैं, लेकिन योजना की अवधि बीतने पर भी उनके हाथ खाली रहे।
विज्ञापन
जिसकी सिफारिश आई, उसे मिल गया अनुदान
गुजरे सालों की तरह बीते वित्त वर्ष में भी शादी अनुदान योजना को लेकर एक अनार-सौ बीमार वाले हालात शुरू से रहे। योजना के नियमानुसार बेटियों के विवाह से 90 दिन पहले से लेकर 90 दिन बाद तक 2457 लोगों ने अनुदान को आवेदन किया। इनमेें अनुसूचित जाति के 1906 और सामान्य श्रेणी के 556 आवेदक शामिल थे। इसके विपरीत अनुसूचित जाति के 1501 लाभार्थियों को 20 हजार रुपये की दर से उनके खातों में 3.2 करोड़ रुपये और सामान्य श्रेणी के 426 लाभार्थी खातों में 85.20 लाख रुपये भेजे जा सके। अनुसूचित जाति के 405 और सामान्य श्रेणी के 125 ऐसे आवेदक हैं, जो पात्रता की शर्तें पूरी करने के बावजूद किसी नेता से सिफारिश नहीं करा पाने के कारण अनुदान का लाभ नहीं ले सके। हालांकि, ब्लॉक स्तर पर उन्हें यही कहकर टरका दिया गया कि उनके फॉर्म में सूचनाएं गलत भरी गई हैं या फिर बजट शेष नहीं बचा।
38 जोड़े नहीं मिलने पर लौटाए 19.38 लाख रुपये
मुख्यमंत्री सामूहिक योजना के निर्धारित मानकों की कसौटी पूरी करने वाले नव विवाहित जोड़ों पर सरकार प्रति जोड़ा 51 हजार रुपये व्यय करती है। इसमें नववधू को दस हजार रुपये का दहेज का सामान दिया जाता है और छह हजार रुपये सरकारी आयोजन पर खर्च होते हैं। शेष 35 हजार रुपये नववधू के बैंक खाते में भेजे जाने का प्रावधान है। अधिकारियों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में इस योजना मद में शासन से जनपद को चार करोड़ 20 लाख 75 हजार रुपये बजट प्राप्त हुआ। इस धनराशि से सभी 787 जोड़ों पर 4.01 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि व्यय की गई। जिन दंपतियों को योजना का लाभ मिला, उनमें 77 अल्पसंख्यक, 365 पिछड़ा वर्ग, 286 अनुसूचित जाति एवं जनजाति और 59 सामान्य श्रेणी के हैं। शादी अनुदान योजना के उलट अन्य लाभार्थी नहीं मिलने पर बजट की शेष धनराशि 19.38 लाख रुपये शासन को लौटाने पड़े।
शादी अनुदान योजना के तहत धन आहरण के लिए डोंगल ब्लॉक स्तर पर दिए गए हैं। जिनके आवेदन ब्लॉक स्तर से सत्यापित होकर पहले प्राप्त हो गए, उन्हें अनुदान की धनराशि मिल गई। जिन्होंने देर से (शादी से संबंधित वित्त वर्ष में) आवेदन नहीं किया, उन्हें धनराशि नहीं भेजी गई। पात्रता पूरी करने वाले अन्य तमाम आवेदक भी अनुदान पाने से वंचित रहे क्योंकि मांग की तुलना में बजट की धनराशि कम स्वीकृत हुई। यह योजना सिर्फ एक वित्त वर्ष के लिए लागू होती है। इसलिए जिन्हें अनुदान नहीं मिला, वे दोबारा आवेदन के पात्र नहीं माने जाएंगे।
-राजेश कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी