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Shahjahanpur News: 2.10 अरब बकाया गन्ना मूल्य दिए बिना ही बंद हो गई मकसूदापुर चीनी मिल
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किसान अजीत सिंह ।
- आरसी जारी होने पर मिल प्रबंधन ने चुकाया गत पेराई सत्र का बकाया
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल किसानों को चालू पेराई सत्र में खरीदे गए 2.10 अरब रुपये से अधिक का गन्ना भुगतान किए बगैर गत चार मार्च को बंद हो गई। खास यह है कि मकसूदापर मिल प्रबंधन ने बीते पेराई सत्र 2021-22 में खरीदे गए गन्ना का संपूर्ण भुगतान डीएम के निर्देश पर राजस्व विभाग से 17.60 करोड़ रुपये की आरसी जारी होने के बाद किया था।
डालमिया ग्रुप की निगोही मिल और बिरला ग्रुप की रोजा मिल 14 दिन के अंदर भुगतान के पैमाने पर खरी उतर रही हैं, लेकिन सहकारी क्षेत्र की तिलहर व पुवायां मिलें भुगतान में पिछड़ रही हैं। इन सभी मिलों ने आगामी अप्रैल माह के तीसरे सप्ताह तक पेराई बंद करने के करने के प्रथम नोटिस भी जारी कर दिए हैं।
111 दिन चली मिल, पांच दिन का किया हिसाब
शासन-प्रशासन के दबाव पर मकसूदापुर मिल प्रबंधन चालू पेराई सत्र के अंतिम दौर तक किसानों को पिछले पेराई सत्र का दो अरब रुपये से ज्यादा बकाया चुकता करने में व्यस्त रहा। इसलिए वर्तमान पेराई सत्र में उस पर किसानों का फिर से भारी कर्ज हो गया। इस मिल में गत वर्ष 11 नवंबर से पेराई शुरू हुई। गत चार मार्च तक मिल ने कुल 111 दिन गन्ना पेराई की, लेकिन वर्तमान पेराई सत्र के केवल शुरुआती पांच दिनों में खरीदे गए गन्ना का भुगतान किया है।
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मिल के गन्ना महाप्रबंधक प्रवीण सिंह का दावा है कि किसानों को चालू पेराई सत्र में खरीदे गए गन्ना के 6.95 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं, जो कुल देयता के सापेक्ष 3.11 प्रतिशत है, लेकिन गन्ना विकास विभाग के अनुसार मिल ने किसानों को उनके अंशदान का जो भुगतान किया है, वह बकाया गन्ना मूल्य में शामिल नहीं होगा।
20 अप्रैल तक चीनी मिलें बंद होने की संभावना
गन्ना विकास और चीनी उद्योग विभाग के नियमानुसार, पेराई समाप्त होने से पहले मिलों को बंद करने के लिए प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को क्रमानुसार तीन बंदी नोटिस जारी करने होते हैं। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि क्षेत्र के किसान खेतों में खड़ा अवशेष गन्ना मिलों को शीघ्रता से आपूर्ति करने को सजग हो जाएं। मकसूदापुर मिल ने बीते पेराई सत्र की तुलना में इस बार आठ लाख क्विंटल ज्यादा गन्ना करीब दो सप्ताह पहले पेरकर चार मार्च को पेराई बंद कर दी। इसी क्रम में निगोही मिल ने 20 अप्रैल और शेष तीनों मिलों ने पांच अप्रैल को मिल बंदी की संभावित तिथि तय की है।
चीनी मिलों पर गन्ना की कुल देयता, भुगतान और अवशेष (करोड़ रुपये)
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चीनी मिल कुल देयता भुगतान अवशेष बकाया
मकसूदापुर मिल 215.65 4.95 210.70
निगोही मिल 342.31 365.27 शून्य
रोजा मिल 175.14 176.77 शून्य
तिलहर मिल 77.97 56.38 21.58
पुवायां मिल 68.30 49.45 18.45
अधिकारियों की मनमानी का किसान निकालेंगे अब स्थायी हल
प्राकृतिक आपदाओं और आवारा पशुओं से त्रस्त किसान पूरे वर्ष गन्ना का बकाया भुगतान पाने को तरसते रहे, लेकिन मिल अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मैं आज मेरठ की महापंचायत में शामिल होने जा रहा हूं। वहां यह मुद्दा प्रमुखता से उठाकर कोई निर्णायक फैसला किया जाएगा क्योंकि अधिकारियों की मनमानी का किसान अब स्थायी इलाज करने का मन बना चुके हैैं।
-अजीत सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (राष्ट्रवादी गुट)
पिछले साल की तरह चालू पेराई सत्र का बकाया भुगतान करने में मकसूदापुर मिल इस बार भी पूरा साल इंतजार कराएगी क्योंकि मिल के अधिकारी सरकार पर अपना बकाया बताकर साफ तौर पर कह रहे हैं कि सरकार से भुगतान मिलने पर ही किसानों की देनदारी चुकता करेंगे। पूंजीपतियों के पैसे से बनी सरकार का निजी मिल मालिकों पर कोई दबाव नहीं है। इस बारे में 20 मार्च को दिल्ली की महापंचायत में अहम फैसला होगा।
-मंजीत सिंह, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट)
गन्ना भुगतान में पिछड़ रही मिलों को निगोही और रोजा मिल से सीख लेनी चाहिए। ये मिलें शासन के निर्देश पर 14 दिन से पहले गन्ना भुगतान कर रही हैं। दोनों सहकारी मिलों में भी भुगतान की स्थिति लगातार सुधर रही है। मकसूदापुर मिल के अधिकारियों ने पेराई बंद होने के बाद रोजाना बकाया भुगतान किसानों के खातों में भेजने की व्यवस्था जारी रखने का आश्वासन दिया है।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल किसानों को चालू पेराई सत्र में खरीदे गए 2.10 अरब रुपये से अधिक का गन्ना भुगतान किए बगैर गत चार मार्च को बंद हो गई। खास यह है कि मकसूदापर मिल प्रबंधन ने बीते पेराई सत्र 2021-22 में खरीदे गए गन्ना का संपूर्ण भुगतान डीएम के निर्देश पर राजस्व विभाग से 17.60 करोड़ रुपये की आरसी जारी होने के बाद किया था।
डालमिया ग्रुप की निगोही मिल और बिरला ग्रुप की रोजा मिल 14 दिन के अंदर भुगतान के पैमाने पर खरी उतर रही हैं, लेकिन सहकारी क्षेत्र की तिलहर व पुवायां मिलें भुगतान में पिछड़ रही हैं। इन सभी मिलों ने आगामी अप्रैल माह के तीसरे सप्ताह तक पेराई बंद करने के करने के प्रथम नोटिस भी जारी कर दिए हैं।
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111 दिन चली मिल, पांच दिन का किया हिसाब
शासन-प्रशासन के दबाव पर मकसूदापुर मिल प्रबंधन चालू पेराई सत्र के अंतिम दौर तक किसानों को पिछले पेराई सत्र का दो अरब रुपये से ज्यादा बकाया चुकता करने में व्यस्त रहा। इसलिए वर्तमान पेराई सत्र में उस पर किसानों का फिर से भारी कर्ज हो गया। इस मिल में गत वर्ष 11 नवंबर से पेराई शुरू हुई। गत चार मार्च तक मिल ने कुल 111 दिन गन्ना पेराई की, लेकिन वर्तमान पेराई सत्र के केवल शुरुआती पांच दिनों में खरीदे गए गन्ना का भुगतान किया है।
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मिल के गन्ना महाप्रबंधक प्रवीण सिंह का दावा है कि किसानों को चालू पेराई सत्र में खरीदे गए गन्ना के 6.95 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं, जो कुल देयता के सापेक्ष 3.11 प्रतिशत है, लेकिन गन्ना विकास विभाग के अनुसार मिल ने किसानों को उनके अंशदान का जो भुगतान किया है, वह बकाया गन्ना मूल्य में शामिल नहीं होगा।
20 अप्रैल तक चीनी मिलें बंद होने की संभावना
गन्ना विकास और चीनी उद्योग विभाग के नियमानुसार, पेराई समाप्त होने से पहले मिलों को बंद करने के लिए प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को क्रमानुसार तीन बंदी नोटिस जारी करने होते हैं। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि क्षेत्र के किसान खेतों में खड़ा अवशेष गन्ना मिलों को शीघ्रता से आपूर्ति करने को सजग हो जाएं। मकसूदापुर मिल ने बीते पेराई सत्र की तुलना में इस बार आठ लाख क्विंटल ज्यादा गन्ना करीब दो सप्ताह पहले पेरकर चार मार्च को पेराई बंद कर दी। इसी क्रम में निगोही मिल ने 20 अप्रैल और शेष तीनों मिलों ने पांच अप्रैल को मिल बंदी की संभावित तिथि तय की है।
चीनी मिलों पर गन्ना की कुल देयता, भुगतान और अवशेष (करोड़ रुपये)
चीनी मिल कुल देयता भुगतान अवशेष बकाया
मकसूदापुर मिल 215.65 4.95 210.70
निगोही मिल 342.31 365.27 शून्य
रोजा मिल 175.14 176.77 शून्य
तिलहर मिल 77.97 56.38 21.58
पुवायां मिल 68.30 49.45 18.45
अधिकारियों की मनमानी का किसान निकालेंगे अब स्थायी हल
प्राकृतिक आपदाओं और आवारा पशुओं से त्रस्त किसान पूरे वर्ष गन्ना का बकाया भुगतान पाने को तरसते रहे, लेकिन मिल अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मैं आज मेरठ की महापंचायत में शामिल होने जा रहा हूं। वहां यह मुद्दा प्रमुखता से उठाकर कोई निर्णायक फैसला किया जाएगा क्योंकि अधिकारियों की मनमानी का किसान अब स्थायी इलाज करने का मन बना चुके हैैं।
-अजीत सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (राष्ट्रवादी गुट)
पिछले साल की तरह चालू पेराई सत्र का बकाया भुगतान करने में मकसूदापुर मिल इस बार भी पूरा साल इंतजार कराएगी क्योंकि मिल के अधिकारी सरकार पर अपना बकाया बताकर साफ तौर पर कह रहे हैं कि सरकार से भुगतान मिलने पर ही किसानों की देनदारी चुकता करेंगे। पूंजीपतियों के पैसे से बनी सरकार का निजी मिल मालिकों पर कोई दबाव नहीं है। इस बारे में 20 मार्च को दिल्ली की महापंचायत में अहम फैसला होगा।
-मंजीत सिंह, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट)
गन्ना भुगतान में पिछड़ रही मिलों को निगोही और रोजा मिल से सीख लेनी चाहिए। ये मिलें शासन के निर्देश पर 14 दिन से पहले गन्ना भुगतान कर रही हैं। दोनों सहकारी मिलों में भी भुगतान की स्थिति लगातार सुधर रही है। मकसूदापुर मिल के अधिकारियों ने पेराई बंद होने के बाद रोजाना बकाया भुगतान किसानों के खातों में भेजने की व्यवस्था जारी रखने का आश्वासन दिया है।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी

किसान अजीत सिंह ।