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ग्रामीण इलाकों में लोगों को रक्तदान का महत्व बता रहे मनोज युवा

Mon, 19 Sep 2022 01:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 19 Sep 2022 01:09 AM IST
सार

दोदराजपुर निवासी मनोज युवा ग्रामीण इलाकों में लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं।मनोज ने बताया कि करीब दस साल पहले उन्होंने दूरदर्शन में एक विज्ञापन देखा था जिसमें रक्तदान की महत्ता को दर्शाया गया था।कभी-कभी देर रात तक उनके पास रक्त की जरूरत संबंधी कॉल आती हैं।

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Manoj Yuva telling the importance of blood donation to people in rural areas

विस्तार

तिलहर। दोदराजपुर निवासी मनोज युवा ग्रामीण इलाकों में लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। दस वर्षों में खुद 28 बार रक्तदान कर चुके मनोज की श्री रामकृष्ण सेवा समिति का दायरा शाहजहांपुर तक ही नहीं सिमटा है बल्कि रामपुर, मुरादाबाद, बरेली और अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में वह हजारों यूनिट ब्लड डोनेट करा चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में पंफलेट बांटकर, स्कूलों में निबंध प्रतियोगिता आदि के माध्यम से वह लोगों को महादान के लिए जागरूक कर रहे हैं।
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पोस्टमैन रामकृष्ण के बड़े बेटे मनोज (30) को किशोरावस्था से ही समाजसेवा की ललक थी। मनोज ने बताया कि करीब दस साल पहले उन्होंने दूरदर्शन में एक विज्ञापन देखा था जिसमें रक्तदान की महत्ता को दर्शाया गया था। तब से उन्होंने भी रक्तदान के लिए लोगों को जागरूक करने की ठान ली। मनोज दस साल में अपनी संस्था के माध्यम से एक लाख यूनिट ब्लड सरकारी अस्पतालों में डोनेट कराने का दावा करते हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। मनोज ने बताया कि आज भी तमाम लोग खून देने से बचते हैं। इनमें पढ़े-लिखे लोग भी शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग सगे-संबंधियों को खून देने से कतराते हैं। ऐसे में उन्होंने रक्तदान के संबंध में लोगों के मन में व्याप्त भ्रांतियां दूर करने का बीड़ा उठाया। शुरुआत खुद से की। 2012 से अब तक वह 28 बार रक्तदान किया। वह और उनकी संस्था के लोग गांव-गांव जाकर लोगों को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित करते हैं। बच्चों में संस्कार के बीज रोपने के लिए विद्यालयों में निबंध प्रतियोगिता करते हैं। बच्चों को जागरूक करते हैं ताकि बड़े होने पर वे भी रक्तदान करें।
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इसलिए मिलता संतोष
मनोज बताते हैं कि जब रक्त की आवश्यकता पड़ने पर व्यक्ति भटकता है तो उन्हें बड़ा दुख होता है। कभी-कभी देर रात तक उनके पास रक्त की जरूरत संबंधी कॉल आती हैं। वह इस नेक काम के लिए दिन-रात नहीं देखते और तुरंत मदद देने का प्रयास करते हैं। मनोज ने बताया कि रामपुर में एक मरीज को पांच यूनिट ब्लड की जरूरत थी। उसे रक्त मुहैया कराया तो वह आज तक अहसान मानता है। शाहजहांपुर के मदनापुर के बरुआ गांव में एक व्यक्ति के प्राण खून की कमी से संकट में आ गए तो उसे खून उपलब्ध कराया। तब से वह भी रक्तदान में सहयोग करता है। मनोज कहते हैं कि दुआ से उन्हें ताकत मिलती है। वह चाहते हैं कि अधिक से अधिक लोग रक्तदान करें ताकि रक्त की कमी से किसी की जान न जाए। संवाद
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