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Shahjahanpur News: हत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा
Thu, 15 Aug 2024 03:12 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 15 Aug 2024 03:12 AM IST
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शाहजहांपुर। नवम अपर सत्र न्यायाधीश चंद्र मोहन चतुर्वेदी ने हत्या के एक मुकदमे में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। दो आरोपियों की मौत मुकदमे के दौरान हो गई थी।
मिर्जापुर क्षेत्र के गांव बुढौरा निवासी नफासत अली ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 22 सितंबर 2002 को वह और उसके चाचा गुच्छन अली बाइक से ढाईघाट से मिर्जापुर जा रहे थे। दोपहर साढ़े 12 बजे भट्ठे के सामने पेड़ की आड़ से गांव के ब्रजनंदन, दिलशाद, हैदर, संतराम, वीरपाल सामने आ गए। वीरपाल ने ललकारते हुए चाचा के ऊपर कुल्हाड़ी से वार किया। वह बाइक से नीचे गिर गए, जिससे उसका दाहिना पैर टूट गया।
हमलावरों ने तमंचे से उन लोगों पर फायरिंग की। उसके चाचा गुच्छन की मौके पर ही मौत हो गई। घटना पुरानी रंजिश में अंजाम दी गई थी। पुलिस ने वीरपाल, ब्रजनंदन, दिलशाद, हैदर और संतराम के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर ब्रजनंदन, हैदर अली, वीरपाल को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। आरोपी मुनकू वाल्मीकि को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। दिलशाद और संतराम की मौत मुकदमे के दौरान हो गई थी।
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मिर्जापुर क्षेत्र के गांव बुढौरा निवासी नफासत अली ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 22 सितंबर 2002 को वह और उसके चाचा गुच्छन अली बाइक से ढाईघाट से मिर्जापुर जा रहे थे। दोपहर साढ़े 12 बजे भट्ठे के सामने पेड़ की आड़ से गांव के ब्रजनंदन, दिलशाद, हैदर, संतराम, वीरपाल सामने आ गए। वीरपाल ने ललकारते हुए चाचा के ऊपर कुल्हाड़ी से वार किया। वह बाइक से नीचे गिर गए, जिससे उसका दाहिना पैर टूट गया।
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हमलावरों ने तमंचे से उन लोगों पर फायरिंग की। उसके चाचा गुच्छन की मौके पर ही मौत हो गई। घटना पुरानी रंजिश में अंजाम दी गई थी। पुलिस ने वीरपाल, ब्रजनंदन, दिलशाद, हैदर और संतराम के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर ब्रजनंदन, हैदर अली, वीरपाल को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। आरोपी मुनकू वाल्मीकि को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। दिलशाद और संतराम की मौत मुकदमे के दौरान हो गई थी।
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