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Shahjahanpur News: अतिक्रमण और प्रदूषण से दम तोड़तीं जीवनदायिनी नदियां

Sun, 24 Sep 2023 01:39 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 24 Sep 2023 01:39 AM IST
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Life giving rivers dying due to encroachment and pollution
डॉ.एमएल अग्रवाल
विश्व नदी दिवस पर विशेष
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नहाने लायक भी नहीं बचा गर्रा और खन्नौत का पानी, अतिक्रमण के कारण सिकुड़ी गोमती की धारा

संवाद न्यूज एजेंसी

शाहजहांपुर। अतिक्रमण और प्रदूषण ने जिले की नदियों का जीवन संकट में डाल दिया है। शहर के दो किनारों से बहने वालीं गर्रा और खन्नौत नदी का पानी स्नान करने योग्य भी नहीं है। वहीं इन नदियों के मुहाने तक लोगों ने अतिक्रमण कर मकान-दुकान बना लिए हैं। पुवायां क्षेत्र में बहने वाली गोमती नदी पर इतना कब्जा हो चुका है कि इसकी धार ही अवरुद्ध हो गई है।

जिले में गर्रा, खन्नौत, गंगा, रामगंगा, बहगुल और गोमती नदियां करीब 251 किलोमीटर का सफर तय करती हैं। गर्रा और खन्नौत शहर से गुजरने वाली नदियां हैं। शहरी क्षेत्र में ये दोनों नदियां बेहद प्रदूषित हैं। हालांकि लंबे समय तक खन्नौत के बंका घाट में कूड़ा डंप किया जाता रहा। नदी में गिरने वाले नाले और औद्योगिक कचरे में मौजूद हैवी मेटल, कांच, हानिकारक केमिकल, प्लॉस्टिक ने पानी जहरीला कर दिया है। यहां पर नहाना भी खतरे से खाली नहीं है। नदियों का पानी पीने की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
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नमामि गंगे के जिला परियोजना अधिकारी विनय सक्सेना ने बताया कि जिले में कुल 17 नाले हैं जिसमें मोहल्ला यूनुसखेल नाले का बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड और केमिकल ऑक्सीजन डिमांड मानक से अधिक होने के कारण बायो फायटो रेमिडिएशन कराया जा रहा है। शेष सभी मानक के अनुरूप हैं।
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सहायक नदियों पर संकट और अतिक्रमण से सिमट रही गोमती
खुटार। आदि गंगा के नाम से मशहूर गोमती नदी संकट में है। गोमती की सहायक नदियां धीरे-धीरे मर रहीं हैं। गोमती को सदानीरा बनाए रखने में भैंसी, झुकना, कठिना नदियां शासन, प्रशासन और आमजन की अनदेखी, अवैध कब्जों से सूख रही हैं। इसका सीधा असर गोमती पर पड़ रहा है।
एक समय था जब गोमती नदी के किनारे सैकड़ों एकड़ जमीन पर पेड़ खड़े थे। धीरे-धीरे समय बदलता गया और गोमती के किनारों की हरियाली गायब होती गई। भू-माफिया ने नदी की जमीन पर कब्जा जमा लिया। इसके अलावा नदी में कूड़ा करकट डालने से प्रदूषण भी तेजी से बढ़ा है। पड़ोस के खेतों में कीटनाशक का प्रयोग होने और इसका पानी नदी में आने से जलीय जंतु मरने के कारण नदी में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। भैंसी नदी भी कुछ वर्ष पूर्व सूख चुकी है। अवैध कब्जों के कारण झुकना, कठिना भी मृतप्राय: हैं। संवाद

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251 किमी क्षेत्र में बहती हैं छह बड़ी नदियां
गंगा नदी जलालाबाद के 26 किलोमीटर भू-भाग से गुजरती है। रामगंगा जलालाबाद और कलान तहसील में करीब 40 किलोमीटर बहती है। बहगुल नदी तिलहर क्षेत्र से 41 किमी का सफर तय करती है। गर्रा नदी तिलहर और सदर के करीब 74 किमी लंबे क्षेत्र में बहती है। खन्नौत नदी सदर क्षेत्र में 40 किमी तक है। वहीं गोमती नदी पुवायां तहसील में करीब 30 किमी का सफर तय करती है। गर्रा जिले की सबसे लंबी नदी है।

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अत्यधिक प्रदूषित है नदियों का पानी
ऑक्सीजन की मात्रा जो जल में कार्बनिक पदार्थों के जैव रासायनिक अपघटन के लिए आवश्यक होती है, वह बॉयोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड कहलाती है। यह जलीय जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक होती है। जब जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा 8.0 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम हो जाती है तो पानी प्रदूषित कहा जाता है। जब यह मात्रा 4.0 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम हो जाती है तो यह अत्यधिक प्रदूषित हो जाता है। गर्रा और खन्नौत का पानी अत्यधिक प्रदूषित है।


- डॉ. आदर्श पांडेय, विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान विभाग, एसएस कॉलेज।
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प्रदूषित पानी का इस्तेमाल कर देगा बीमार

शहर की नदियों का पानी काफी प्रदूषित हो चुका है। दूषित पानी शरीर में जाने से टायफाइड, पीलिया, कालरा, पेचिश आदि रोग होने की आशंका रहती है। प्रदूषित पानी में नहाने से त्वचा रोग हो सकते हैं।
- डॉ.एमएल अग्रवाल, वरिष्ठ फिजिशियन-राजकीय मेडिकल कॉलेज

डॉ.एमएल अग्रवाल

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