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जिले में उत्पादन से ज्यादा हो रही दूध की खपत
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शाहजहांपुर। सर्दी की तुलना में गर्मियों में दुधारू पशुओं में दूध देने की क्षमता पांच से दस प्रतिशत कम हो जाती है, लेकिन इसी दौरान सहालगी सीजन में शादी समारोहों और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में दूध की मांग बढ़ने के साथ खपत भी बढ़ जाती है। इसके बावजूद विक्रेता दूध में पानी की मिलावट कर या कृत्रिम दूध तैयार कर उसकी मांग आसानी से पूरी कर रहे हैं।
पशुपालन और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि जिले में जितना दुग्ध उत्पादन हो रहा है, उसकी तुलना में मांग और खपत अधिक है। इसलिए मिलावटखोर दूध में पानी मिलाने के अलावा मिल्क पाउडर और अन्य रसायनों के घालमेल से ऐसा तरल पदार्थ तैयार कर लेते हैं, जो एकदम दूध जैसा होता है।
दुग्धशाला में हो रही छह हजार लीटर प्रतिदिन दूध आवक
रौसर स्थित राजकीय दुग्धशाला से जिले में न्याय पंचायत स्तर पर गठित 306 सहकारी दुग्ध उत्पादक समितियां संबद्ध रही हैं। पांच वर्ष पहले तक इन समितियों से दुग्धशाला को रोजाना 11 हजार लीटर दूध मिलता था। विभागीय अव्यवस्थाओं के चलते अब दुग्ध समितियों की संख्या घटकर 212 रह गई है। उप दुग्धशाला विकास अधिकारी ब्रजमोहन त्यागी के अनुसार वर्तमान में बमुश्किल 100 सहकारी समितियां क्रियाशील हैं और उनसे प्रतिदिन छह हजार लीटर दूध मिल रहा है।
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उनका कहना है कि जिले मेें दुग्ध उत्पादन इससे कहीं अधिक हो रहा है, क्योंकि सभी गांवों में दुग्ध समितियां गठित नहीं हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले मेें रोजाना 40 हजार लीटर दुग्ध उत्पादन होता है, लेकिन घरेलू और बाजार की खपत को देखते जिले में दूध की मांग करीब 60 हजार लीटर प्रतिदिन है।
पानी की मात्रा के अनुसार दूध के भाव
देहात से दूध लाने वाले फुटकर विक्रेताओं ने दूध में घालमेल करने के शहर में कई ठिकाने बना रखे हैं। सुबह के वक्त सदर बाजार स्थित पंखी चौराहा के पास दूधियों का जमावड़ा लगता है। इसी तरह लाल इमली चौराहा के पास और टाउनहाल में तेल टंकी रोड पर फुटकर दूध विक्रेता एकत्र होते है। फुटकर विक्रेता दूध 30 से लेकर 40 रुपये लीटर के भाव बेच रहे हैं, जबकि डेयरियों पर 50 से 55 रुपये लीटर के भाव बिकने वाले दूध में भी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है।
23 और 24 को जिले में रहेगी फूड सेफ्टी मोबाइल वैन
23 और 24 जून को जिले में फूड सेफ्टी मोबाइल वैन रहेगी। विशेषज्ञ लोगों को घरेलू एवं पारंपरिक उपायों से मिलावट की परख करने के आसान तरीके भी बताएंगे। इसके अलावा लोग मिलावट का शक होने पर खाद्य पदार्थों की जांच भी करा सकते हैं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से दूधियों की लगातार निगरानी कराई जाती है और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता परखने को उनके नमूने भी लिए जा रहे हैं। विक्रेता दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उनमें हानिकारक रसायन मिलाने से बाज नहीं आ रहे। दूध के जो नमूने जांच मेें फेल हो रहे हैं, उनमें एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) की कमी पाई जा रही है। -विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन।
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पशुपालन और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी मानते हैं कि जिले में जितना दुग्ध उत्पादन हो रहा है, उसकी तुलना में मांग और खपत अधिक है। इसलिए मिलावटखोर दूध में पानी मिलाने के अलावा मिल्क पाउडर और अन्य रसायनों के घालमेल से ऐसा तरल पदार्थ तैयार कर लेते हैं, जो एकदम दूध जैसा होता है।
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दुग्धशाला में हो रही छह हजार लीटर प्रतिदिन दूध आवक
रौसर स्थित राजकीय दुग्धशाला से जिले में न्याय पंचायत स्तर पर गठित 306 सहकारी दुग्ध उत्पादक समितियां संबद्ध रही हैं। पांच वर्ष पहले तक इन समितियों से दुग्धशाला को रोजाना 11 हजार लीटर दूध मिलता था। विभागीय अव्यवस्थाओं के चलते अब दुग्ध समितियों की संख्या घटकर 212 रह गई है। उप दुग्धशाला विकास अधिकारी ब्रजमोहन त्यागी के अनुसार वर्तमान में बमुश्किल 100 सहकारी समितियां क्रियाशील हैं और उनसे प्रतिदिन छह हजार लीटर दूध मिल रहा है।
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उनका कहना है कि जिले मेें दुग्ध उत्पादन इससे कहीं अधिक हो रहा है, क्योंकि सभी गांवों में दुग्ध समितियां गठित नहीं हैं। पशुपालन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिले मेें रोजाना 40 हजार लीटर दुग्ध उत्पादन होता है, लेकिन घरेलू और बाजार की खपत को देखते जिले में दूध की मांग करीब 60 हजार लीटर प्रतिदिन है।
पानी की मात्रा के अनुसार दूध के भाव
देहात से दूध लाने वाले फुटकर विक्रेताओं ने दूध में घालमेल करने के शहर में कई ठिकाने बना रखे हैं। सुबह के वक्त सदर बाजार स्थित पंखी चौराहा के पास दूधियों का जमावड़ा लगता है। इसी तरह लाल इमली चौराहा के पास और टाउनहाल में तेल टंकी रोड पर फुटकर दूध विक्रेता एकत्र होते है। फुटकर विक्रेता दूध 30 से लेकर 40 रुपये लीटर के भाव बेच रहे हैं, जबकि डेयरियों पर 50 से 55 रुपये लीटर के भाव बिकने वाले दूध में भी शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है।
23 और 24 को जिले में रहेगी फूड सेफ्टी मोबाइल वैन
23 और 24 जून को जिले में फूड सेफ्टी मोबाइल वैन रहेगी। विशेषज्ञ लोगों को घरेलू एवं पारंपरिक उपायों से मिलावट की परख करने के आसान तरीके भी बताएंगे। इसके अलावा लोग मिलावट का शक होने पर खाद्य पदार्थों की जांच भी करा सकते हैं।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से दूधियों की लगातार निगरानी कराई जाती है और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता परखने को उनके नमूने भी लिए जा रहे हैं। विक्रेता दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उनमें हानिकारक रसायन मिलाने से बाज नहीं आ रहे। दूध के जो नमूने जांच मेें फेल हो रहे हैं, उनमें एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) की कमी पाई जा रही है। -विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन।