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पत्ती-पत्ती फूल-फूल, या रसूल या रसूल
शाहजहांपुर
Updated Thu, 24 Dec 2015 11:55 PM IST
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पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा की यौमे विलादत ईद मीलादुन्नबी का जुलूस शहर में शानोशौकत से निकाला गया। जुलूस में उमड़े मुस्लिमों से शहर की सड़कें पट गईं। जुलूस में बच्चे, युवा और बुजुर्ग हाथों में हरे झंडे लहराते हुए पत्ती-पत्ती फूल-फूल, या रसूल या रसूल, सरकार की आदम मरहबा, आका की आमद मरहबा आदि नारे लगाते हुए चल रहे थे। मुख्य जुलूस रेलवे स्टेशन वाली मस्जिद से दावते इस्लामी के तत्वावधान में निकाला गया, इसके अलावा शहर के अन्य हिस्सों में भी जुलूस निकाल कर खुशियां मनाई गईं। जुलूस में दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, चौपहिया वाहनों पर कि डीजे और लाउडस्पीकर से नात बज रही थीं। झूमते और खुशियां मनाते युवाओं पर जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई। इस बीच जुलूस में शामिल लोगों को लंगर भी तकसीम किया गया। ईद मीलादुन्नबी का जश्न मनाने के लिए शहर के विभिन्न मोहल्लों में जलसे हुए और हरी झंडियों तथा बिजली की रंग-बिरंगी झालरों से सजावट की गई।
जुलूस में शामिल होने के लिए लोग वाहन लेकर स्टेशन के समीम रीबा मैरिज लॉन में एकत्र होने शुरू हो गए थे। सुबह तड़के हर लोगों का हुजूम जुलूस के रूप में शहर की ओर चल पड़ा। पेश इमाम मौलाना हुजूर अहमद मंजरी ने झंडी दिखाकर जुलूस रवाना किया। इसके बाद दावते इस्लामी के जिला निगरा अनीस अत्तारी के नेतृत्व में जुलूस रोडवेज, टाउनहाल पुल, लाल इमली चौराहा, घंटाघर, चौकी अंजान होता हुआ अंटा चौराहा स्थित कटहल वाली मस्जिद में दुआ के साथ संपन्न हुआ। लाल इमली चौराहा के समीप चेयरमैन तनवीर खां ने अनीत अत्तारी का स्वागत किया। जुलूस में बच्चों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर खुशियां मनाईं। जुलूस में मक्का-मदीना की झांकी, मोटरसाइकिल पर सवार युवाओं का जत्था, उछलते-कूदते लोग सरकार की आमद मरहबा, पत्ती पत्ती फूल फूल, या रसूल या रसूल आदि नारे लगा रहे थे।
व्यवस्था में चांद मियां, हनीफ खां, वसीम इदरीसी, शब्बीर खां, तसनीम हसन खां, फार्रूख अली, सुल्तान अत्तारी, मुजीब अत्तारी, नबीे उल्ला, शावेज अत्तारी, शहबाज अत्तारी, नौहीद अत्तारी, प्यारे खां, सादिक हसन, डॉ. इब्राहीम, मशकूर अत्तारी आदि का योगदान रहा।
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जमकर बरसा लंगर
ईद मीलादुन्नबी के जुलूस में जिससे जो बन पड़ा, वह लंगर के रूप में पेश किया गया। कहीं, गरमागरम चाय तो कहीं, पकौड़ी, बिस्कुट, हलवा बांटा जा रहा था। पानी की पौच भी खूब बांटे गए। लंगर के लिए सबीलें भी सजीं और छतों से भी बिस्कुट, फल आदि बांटे गए। बहादुर गंज तिराहा पर पूरे दिन लंगर बांटा गया। वहीं, दिनभर मिष्ठान भंडारों पर जलेबियों की जमकर बिक्री हुई। मस्जिदों, प्रतिष्ठानों और घरों में मोमबत्तियां जलाकर चरागां किया गया।
मंदिरों की सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहीं टीमें
जलसे की विशेषता यह रही कि टीम प्रबंधन ने अपनी घोषणा पर बाकायदा अमल करते हुए जुलूस के रास्तों में पड़ने वाले मंदिरों की सुरक्षा भी जिम्मेदारी से की। इसके लिए मंदिरों को चिन्हित किया गया और सभी मंदिरों के सामने दावते इस्लामी के सदस्य झंडों के साथ मुस्तैद दिखे और जुलूस को आगे बढ़ाते रहे। इस व्यवस्था ने हिंदू-मुस्लिम भाइचारे की डोर को और मजबूत करने का काम किया।
ऐसे भी हुआ जुलूस का स्वागत
जुलूसे मोहम्मदी के स्वागत को शहर में कई रंग दिखाई दिए। कहीं गुलाब के फूलों की बरसात हो रही थी, तो कहीं लंगर बांटकर लोग आत्म संतुष्टि से लबरेज दिख रहे थे। लाल इमली चौेराहा पर एक बुजुर्ग काली टोपी पहने जुलूस में शामिल लोगों को इत्र लगाने में मशगूल दिखे। वह काफी देर तक बिना किसी भेदभाव के लोगों को इत्र लगा रहे थे।
अधिकारियों ने भी किया नेतृत्व
जुलूसे मोहम्मदी का नेतृत्व आयोजकों ने तो किया ही, साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट नरेंद्र सिंह और सीओ सदर अनुराग दर्शन भी जवानों के साथ मुस्तैद थे। प्रमुख चौराहों और स्थलों पर पुलिस के जवान तैनात रहे।
विभिन्न स्थानों से निकाले गए जुलूस, जलसे भी हुए
नूरी मस्जिद के मुख्य जुलूस के अलावा मोहल्ला ककरा कलां, मेहमानशाह, जियाखेल, किला आदि क्षेत्रों में भी जुलूस निकाले गए। फैक्ट्री इस्टेट में जलसा का आयोजन किया गया। जुलूसों में सैयद शबाब अहमद नूरी, मुनीर रजा, आसिफ रजा, गुलाम रसूल, फिरासत उल्ला खां, दिलशाद खां, मो. नबीेह खां, शाहिद खां, नूर अहमद, कामरान अंसारी, मो. सईद, छोटे मियां, रहमत अली, मो. वली, महफूज आदि तथा फैक्ट्री इस्टेट के जलसे में सैयद अहसान मियां, मौलाना हुजूर अहमद मंजरी, फैक्ट्री के अपर महाप्रबंधक के सत्यनारायण, सुकुमार रथ आदि ने सभी को मुबारकबाद देते हुए आपसी भाईचारा कायम रखने की नसीहत दी। आयोजन में हदीस अली, नसीब अहमद, माशूक अली, वाजिद बेग, नियासतुल्लाह, इकबाल अहमद, हाजी शफीउल्लाह मंसूरी, मो. जावेद, मो. इशहाक, अब्दुल लतीफ आदि का योगदान रहा।
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जुलूस में शामिल होने के लिए लोग वाहन लेकर स्टेशन के समीम रीबा मैरिज लॉन में एकत्र होने शुरू हो गए थे। सुबह तड़के हर लोगों का हुजूम जुलूस के रूप में शहर की ओर चल पड़ा। पेश इमाम मौलाना हुजूर अहमद मंजरी ने झंडी दिखाकर जुलूस रवाना किया। इसके बाद दावते इस्लामी के जिला निगरा अनीस अत्तारी के नेतृत्व में जुलूस रोडवेज, टाउनहाल पुल, लाल इमली चौराहा, घंटाघर, चौकी अंजान होता हुआ अंटा चौराहा स्थित कटहल वाली मस्जिद में दुआ के साथ संपन्न हुआ। लाल इमली चौराहा के समीप चेयरमैन तनवीर खां ने अनीत अत्तारी का स्वागत किया। जुलूस में बच्चों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर खुशियां मनाईं। जुलूस में मक्का-मदीना की झांकी, मोटरसाइकिल पर सवार युवाओं का जत्था, उछलते-कूदते लोग सरकार की आमद मरहबा, पत्ती पत्ती फूल फूल, या रसूल या रसूल आदि नारे लगा रहे थे।
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व्यवस्था में चांद मियां, हनीफ खां, वसीम इदरीसी, शब्बीर खां, तसनीम हसन खां, फार्रूख अली, सुल्तान अत्तारी, मुजीब अत्तारी, नबीे उल्ला, शावेज अत्तारी, शहबाज अत्तारी, नौहीद अत्तारी, प्यारे खां, सादिक हसन, डॉ. इब्राहीम, मशकूर अत्तारी आदि का योगदान रहा।
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जमकर बरसा लंगर
ईद मीलादुन्नबी के जुलूस में जिससे जो बन पड़ा, वह लंगर के रूप में पेश किया गया। कहीं, गरमागरम चाय तो कहीं, पकौड़ी, बिस्कुट, हलवा बांटा जा रहा था। पानी की पौच भी खूब बांटे गए। लंगर के लिए सबीलें भी सजीं और छतों से भी बिस्कुट, फल आदि बांटे गए। बहादुर गंज तिराहा पर पूरे दिन लंगर बांटा गया। वहीं, दिनभर मिष्ठान भंडारों पर जलेबियों की जमकर बिक्री हुई। मस्जिदों, प्रतिष्ठानों और घरों में मोमबत्तियां जलाकर चरागां किया गया।
मंदिरों की सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहीं टीमें
जलसे की विशेषता यह रही कि टीम प्रबंधन ने अपनी घोषणा पर बाकायदा अमल करते हुए जुलूस के रास्तों में पड़ने वाले मंदिरों की सुरक्षा भी जिम्मेदारी से की। इसके लिए मंदिरों को चिन्हित किया गया और सभी मंदिरों के सामने दावते इस्लामी के सदस्य झंडों के साथ मुस्तैद दिखे और जुलूस को आगे बढ़ाते रहे। इस व्यवस्था ने हिंदू-मुस्लिम भाइचारे की डोर को और मजबूत करने का काम किया।
ऐसे भी हुआ जुलूस का स्वागत
जुलूसे मोहम्मदी के स्वागत को शहर में कई रंग दिखाई दिए। कहीं गुलाब के फूलों की बरसात हो रही थी, तो कहीं लंगर बांटकर लोग आत्म संतुष्टि से लबरेज दिख रहे थे। लाल इमली चौेराहा पर एक बुजुर्ग काली टोपी पहने जुलूस में शामिल लोगों को इत्र लगाने में मशगूल दिखे। वह काफी देर तक बिना किसी भेदभाव के लोगों को इत्र लगा रहे थे।
अधिकारियों ने भी किया नेतृत्व
जुलूसे मोहम्मदी का नेतृत्व आयोजकों ने तो किया ही, साथ ही सिटी मजिस्ट्रेट नरेंद्र सिंह और सीओ सदर अनुराग दर्शन भी जवानों के साथ मुस्तैद थे। प्रमुख चौराहों और स्थलों पर पुलिस के जवान तैनात रहे।
विभिन्न स्थानों से निकाले गए जुलूस, जलसे भी हुए
नूरी मस्जिद के मुख्य जुलूस के अलावा मोहल्ला ककरा कलां, मेहमानशाह, जियाखेल, किला आदि क्षेत्रों में भी जुलूस निकाले गए। फैक्ट्री इस्टेट में जलसा का आयोजन किया गया। जुलूसों में सैयद शबाब अहमद नूरी, मुनीर रजा, आसिफ रजा, गुलाम रसूल, फिरासत उल्ला खां, दिलशाद खां, मो. नबीेह खां, शाहिद खां, नूर अहमद, कामरान अंसारी, मो. सईद, छोटे मियां, रहमत अली, मो. वली, महफूज आदि तथा फैक्ट्री इस्टेट के जलसे में सैयद अहसान मियां, मौलाना हुजूर अहमद मंजरी, फैक्ट्री के अपर महाप्रबंधक के सत्यनारायण, सुकुमार रथ आदि ने सभी को मुबारकबाद देते हुए आपसी भाईचारा कायम रखने की नसीहत दी। आयोजन में हदीस अली, नसीब अहमद, माशूक अली, वाजिद बेग, नियासतुल्लाह, इकबाल अहमद, हाजी शफीउल्लाह मंसूरी, मो. जावेद, मो. इशहाक, अब्दुल लतीफ आदि का योगदान रहा।