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देर रात तक चला मान मनौव्वल का दौर
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पुवायां। चुनाव प्रचार के दिन तक मतदाताओं की चिरौरी करने वाले नेताओं और समर्थकों ने रविवार देर रात तक गांव के नेताओं, प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पक्ष में करने को पूरी ताकत झोंक दी। किसी पर रिश्तेदारी का दबाव डाला गया तो किसी से पुराने संबंधों की दुहाई देकर पक्ष में आने की अपील की गई। प्रत्याशियों को कुछ जगह से आशा तो कुछ जगह से निराशा हाथ लगी।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य मतदाताओं को प्रत्याशियों के पक्ष में करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। कारण है कि इनका गांव में मतदाताओं पर प्रभाव होता है। प्रत्याशियों ने शुक्रवार शाम तक डोर टू डोर संपर्क करने और बड़े नेताओं की सभाएं करवाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में दिन रात एक कर रखा था। कोरोना संक्रमण के चलते चुनाव आयोग की पाबंदियों ने प्रत्याशियों को हलकान कर रखा था, रही सही कसर दो बार खराब हुए मौसम ने पूरी कर दी। इस कारण प्रत्याशी कुछ गांवों में नहीं पहुंच सके।
शुक्रवार शाम चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद साम, दाम, दंड, भेद का खेल शुरू हो गया। गांव के ऐसे नेताओं जो मतदाताओं पर प्रभाव रखते हो और प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए देर रात तक रस्साकशी जारी रही। फोन से संपर्क कर लोगों के गिले शिकवे दूर किए गए और चुनाव में मदद की अपील की गई। जीत के बाद आगे साथ रहने का भरोसा भी दिया गया। प्रत्याशियों को कुछ जगहों से कामयाबी की खबर भी मिली और कुछ जगहों से निराशा भी हाथ लगी।
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लोकसभा और विधानसभा चुनाव में प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य मतदाताओं को प्रत्याशियों के पक्ष में करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। कारण है कि इनका गांव में मतदाताओं पर प्रभाव होता है। प्रत्याशियों ने शुक्रवार शाम तक डोर टू डोर संपर्क करने और बड़े नेताओं की सभाएं करवाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में दिन रात एक कर रखा था। कोरोना संक्रमण के चलते चुनाव आयोग की पाबंदियों ने प्रत्याशियों को हलकान कर रखा था, रही सही कसर दो बार खराब हुए मौसम ने पूरी कर दी। इस कारण प्रत्याशी कुछ गांवों में नहीं पहुंच सके।
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शुक्रवार शाम चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद साम, दाम, दंड, भेद का खेल शुरू हो गया। गांव के ऐसे नेताओं जो मतदाताओं पर प्रभाव रखते हो और प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अपने पक्ष में करने के लिए देर रात तक रस्साकशी जारी रही। फोन से संपर्क कर लोगों के गिले शिकवे दूर किए गए और चुनाव में मदद की अपील की गई। जीत के बाद आगे साथ रहने का भरोसा भी दिया गया। प्रत्याशियों को कुछ जगहों से कामयाबी की खबर भी मिली और कुछ जगहों से निराशा भी हाथ लगी।
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