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Shahjahanpur News: फर्जी बिल बनाकर हड़पे चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लाखों रुपये
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शाहजहांपुर। फर्जी बिल बनाकर सीएमओ कार्यालय से चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लाखों रुपये हड़पने के मामले में डीएम ने 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। 15 दिन में हड़पा धन वापस न करने पर आरसी जारी की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनकी पत्नी के निजी अस्पताल में चिकित्सा में आने वाले खर्च की धनराशि की प्रतिपूर्ति सीएमओ कार्यालय से की जाती है। गत वर्ष अक्तूबर से दिसंबर के मध्य चिकित्सा प्रतिपूर्ति में अनियमितता की शिकायत मिलने पर वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने जांच कर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था।
12 लोगों ने लखनऊ के लाइफ केयर अस्पताल, सरस्वती हार्ट केयर एंड मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल और मिशन अस्पताल में इलाज कराया था। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने दो फरवरी को सीडीओ की अध्यक्षता में वरिष्ठ कोषाधिकारी और राजकीय मेडिकल कॉलेज के डॉ. पंकज की कमेटी गठित की।
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सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी और सीएचसी जरियनपुर की दो सदस्यीय उपसमिति बनाकर स्थलीय निरीक्षण कराया। उपसमिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लाइफ केयर अस्पताल के मालिक ने जानकारी दी कि उनके अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध ही नहीं है और न ही किसी व्यक्ति का उनके यहां इलाज किया गया है। लखनऊ के मिशन अस्पताल संचालक ने भी यही जवाब दिया। सरस्वती हार्ट केयर एंड मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के नाम से कोई अस्पताल संचालित नहीं मिला।
जांच समिति की ओर से प्रकरण की सुनवाई के लिए निर्धारित तिथि में सेवानिवृत्त वीएचडब्ल्यू कुसुम लता रस्तोगी के बेटे विशाल कुमार ने अपने बयान दर्ज कराए। सेवानिवृत्त जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार भटनागर ने डीएम के सामने उपस्थित होकर बताया कि उन्होंने या उनकी पत्नी ने इस दौरान लखनऊ में इलाज नहीं कराया है।
उनके खाते में आए चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लगभग दो लाख रुपये उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के खाते में जमा कर दिए हैं। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर लाभ प्राप्त करने वाले सभी लोगों के खिलाफ सरकारी धन हड़पने, फर्जी कागज बनाने आदि आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नोटिस देने के 15 दिन में रुपये वापस न करने पर आरसी जारी करने के लिए निर्देशित किया है।
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इनके नाम आए सामने
अक्तूबर से दिसंबर के मध्य निर्मला देवी, प्रेमा, श्रीकांत शुक्ला, शमीम बानो, नन्हीं देवी, कमला देवी, धूपकली, जावित्री देवी, सुधा देवी, राजेश कुमार भटनागर के खाते में लगभग दो-दो लाख रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति भेजी गई है। इसी बीच कुसुमलता रस्तोगी के खाते में तीन बार और सरोजनी अग्रवाल के खाते में दो बार इतनी ही प्रतिपूर्ति की धनराशि भेजी गई है।
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स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनकी पत्नी के निजी अस्पताल में चिकित्सा में आने वाले खर्च की धनराशि की प्रतिपूर्ति सीएमओ कार्यालय से की जाती है। गत वर्ष अक्तूबर से दिसंबर के मध्य चिकित्सा प्रतिपूर्ति में अनियमितता की शिकायत मिलने पर वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने जांच कर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था।
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12 लोगों ने लखनऊ के लाइफ केयर अस्पताल, सरस्वती हार्ट केयर एंड मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल और मिशन अस्पताल में इलाज कराया था। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने दो फरवरी को सीडीओ की अध्यक्षता में वरिष्ठ कोषाधिकारी और राजकीय मेडिकल कॉलेज के डॉ. पंकज की कमेटी गठित की।
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सीडीओ ने जिला विकास अधिकारी और सीएचसी जरियनपुर की दो सदस्यीय उपसमिति बनाकर स्थलीय निरीक्षण कराया। उपसमिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लाइफ केयर अस्पताल के मालिक ने जानकारी दी कि उनके अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध ही नहीं है और न ही किसी व्यक्ति का उनके यहां इलाज किया गया है। लखनऊ के मिशन अस्पताल संचालक ने भी यही जवाब दिया। सरस्वती हार्ट केयर एंड मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के नाम से कोई अस्पताल संचालित नहीं मिला।
जांच समिति की ओर से प्रकरण की सुनवाई के लिए निर्धारित तिथि में सेवानिवृत्त वीएचडब्ल्यू कुसुम लता रस्तोगी के बेटे विशाल कुमार ने अपने बयान दर्ज कराए। सेवानिवृत्त जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी राजेश कुमार भटनागर ने डीएम के सामने उपस्थित होकर बताया कि उन्होंने या उनकी पत्नी ने इस दौरान लखनऊ में इलाज नहीं कराया है।
उनके खाते में आए चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लगभग दो लाख रुपये उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के खाते में जमा कर दिए हैं। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर लाभ प्राप्त करने वाले सभी लोगों के खिलाफ सरकारी धन हड़पने, फर्जी कागज बनाने आदि आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नोटिस देने के 15 दिन में रुपये वापस न करने पर आरसी जारी करने के लिए निर्देशित किया है।
इनके नाम आए सामने
अक्तूबर से दिसंबर के मध्य निर्मला देवी, प्रेमा, श्रीकांत शुक्ला, शमीम बानो, नन्हीं देवी, कमला देवी, धूपकली, जावित्री देवी, सुधा देवी, राजेश कुमार भटनागर के खाते में लगभग दो-दो लाख रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति भेजी गई है। इसी बीच कुसुमलता रस्तोगी के खाते में तीन बार और सरोजनी अग्रवाल के खाते में दो बार इतनी ही प्रतिपूर्ति की धनराशि भेजी गई है।