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गन्ना किसानों के लिए वरदान हैं कोशा 12232 व कोसे 11453 की प्रजाति
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 08 Jan 2016 10:51 PM IST
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गन्ना शोध परिषद के निदेशक डा. बीएल शर्मा ने कहा कि मध्य देर से पकने वाली गन्ना प्रजाति कोशा 12232 एवं कोसे 11453 गन्ना किसानों के लिए वरदान सिद्ध होगी।
निदेशक डा. शर्मा ने बताया कि नवीन उन्नतिशील गन्ना प्रजाति कोशा 12232 वर्तमान समय की सर्वाधिक प्रचलित प्रजाति कोशा 767 की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक उत्पादन क्षमता वाली प्रजाति है तथा इस प्रजाति मेें 42 प्रतिशत अधिक व्यवसायिक शर्करा उपज देने की भी क्षमता है। इसी प्रकार कोसे 11453 में गन्ना प्रजाति कोशा 767 की तुलना में 53 प्रतिशत अधिक उत्पादन क्षमता है तथा व्यवसायिक शर्करा उपज में वृद्धि 58 प्रतिशत है। डा. शर्मा ने कहा कि दोनों प्रजातियों में जमाव, ब्यॉत, मिल योग्य गन्ने तथा उपज उत्तम पाई गई है। शोध संस्थान के प्रक्षेत्र पर अवलोकन के दौरान किसानों द्वारा इसे सराहा गया है।
डा. शर्मा ने किसानों को सुझाव दिया कि उन्नतिशील प्रजातियों से बेहतर उत्पादन के लिए हमें खेती की उन्नत तकनीक को भी अपनाना होगा। खेती की पुरानी एवं पारंपरिक विधियों को छोड़ कर नई तकनीक से इन प्रजातियों से अधिक से अधिक गन्ना एवं चीनी उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
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निदेशक डा. शर्मा ने बताया कि नवीन उन्नतिशील गन्ना प्रजाति कोशा 12232 वर्तमान समय की सर्वाधिक प्रचलित प्रजाति कोशा 767 की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत अधिक उत्पादन क्षमता वाली प्रजाति है तथा इस प्रजाति मेें 42 प्रतिशत अधिक व्यवसायिक शर्करा उपज देने की भी क्षमता है। इसी प्रकार कोसे 11453 में गन्ना प्रजाति कोशा 767 की तुलना में 53 प्रतिशत अधिक उत्पादन क्षमता है तथा व्यवसायिक शर्करा उपज में वृद्धि 58 प्रतिशत है। डा. शर्मा ने कहा कि दोनों प्रजातियों में जमाव, ब्यॉत, मिल योग्य गन्ने तथा उपज उत्तम पाई गई है। शोध संस्थान के प्रक्षेत्र पर अवलोकन के दौरान किसानों द्वारा इसे सराहा गया है।
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डा. शर्मा ने किसानों को सुझाव दिया कि उन्नतिशील प्रजातियों से बेहतर उत्पादन के लिए हमें खेती की उन्नत तकनीक को भी अपनाना होगा। खेती की पुरानी एवं पारंपरिक विधियों को छोड़ कर नई तकनीक से इन प्रजातियों से अधिक से अधिक गन्ना एवं चीनी उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
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