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कोलाघाट पुल : बाढ़ ने रोकी तीन पिलर की जांच
Fri, 20 Sep 2024 04:28 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 20 Sep 2024 04:28 AM IST
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कोलाघाट पुल पर हो रहा भार वहन क्षमता जांच का काम। संवाद
मिर्जापुर। कोलाघाट पुल के तीन पिलर की भार वहन क्षमता की जांच रामगंगा व बहगुल की बाढ़ ने रोक दी है। बृहस्पतिवार को बीएचयू की आईआईटी विशेषज्ञ टीम ने 51वें पिलर की जांच की। टीम का दावा है, तय समय पर ही बचा काम भी पूरा कर लिया जाएगा। मांग के बावजूद अभी प्रशासन ने नाव भी उपलब्ध नहीं कराई है।
दोनों नदियों पर 1800 मीटर लंबा पुल 61 पिलर पर बनाया गया था। करीब तीन वर्ष पहले एक पिलर जमींदोज होने पर पुल टूटकर तीन हिस्सों में विभाजित हो गया। बाद में सेतु निगम ने पुल का पुनर्निर्माण कराया तो क्षतिग्रस्त हिस्से को मजबूती देने के लिए वहां एक अतिरिक्त पिलर बनाया गया। इस तरह अब कोलाघाट का पुल 62 पिलर पर टिका है।
पुल को सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए खोलने से पहले उसके पिलर की भार वहन क्षमता जांची जा रही है। इस काम में कई कारणों से अवरोध पड़ रहा है। पुल के बीच वाले हिस्से में कई पिलर बाढ़ में डूब जाने से विशेषज्ञों की टीम को उनकी जांच रोकनी पड़ी।
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पुलिसकर्मी नहीं कर रहे सहयोग
- जांच टीम के अनुसार, पुलिस का सहयोग नहीं मिलने से पुल पर अक्सर लोग पैदल अथवा दोपहिया वाहन लेकर निकलते हैं। टीम के रोकने पर वह परिवार के किसी सदस्य की बीमारी अथवा अन्य आपात स्थिति का हवाला देते हैं। जांच टीम में शामिल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियर अश्विनी कुमार के अनुसार लोगों का आवागमन नहीं थमने से मशीन की फ्रीक्वेंसी गड़बड़ा जाती है। मशीन गलत रीडिंग देने लगती है तो पुल खाली होने का इंतजार करके वही काम दोबारा करना पड़ता है।
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दोनों नदियों पर 1800 मीटर लंबा पुल 61 पिलर पर बनाया गया था। करीब तीन वर्ष पहले एक पिलर जमींदोज होने पर पुल टूटकर तीन हिस्सों में विभाजित हो गया। बाद में सेतु निगम ने पुल का पुनर्निर्माण कराया तो क्षतिग्रस्त हिस्से को मजबूती देने के लिए वहां एक अतिरिक्त पिलर बनाया गया। इस तरह अब कोलाघाट का पुल 62 पिलर पर टिका है।
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पुल को सभी श्रेणियों के वाहनों के लिए खोलने से पहले उसके पिलर की भार वहन क्षमता जांची जा रही है। इस काम में कई कारणों से अवरोध पड़ रहा है। पुल के बीच वाले हिस्से में कई पिलर बाढ़ में डूब जाने से विशेषज्ञों की टीम को उनकी जांच रोकनी पड़ी।
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पुलिसकर्मी नहीं कर रहे सहयोग
- जांच टीम के अनुसार, पुलिस का सहयोग नहीं मिलने से पुल पर अक्सर लोग पैदल अथवा दोपहिया वाहन लेकर निकलते हैं। टीम के रोकने पर वह परिवार के किसी सदस्य की बीमारी अथवा अन्य आपात स्थिति का हवाला देते हैं। जांच टीम में शामिल इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियर अश्विनी कुमार के अनुसार लोगों का आवागमन नहीं थमने से मशीन की फ्रीक्वेंसी गड़बड़ा जाती है। मशीन गलत रीडिंग देने लगती है तो पुल खाली होने का इंतजार करके वही काम दोबारा करना पड़ता है।