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किसान नेताओं ने कानून वापसी की घोषणा पर जताई खुशी, बोले- यह हमारी जीत
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आदित्य प्रताप सिंह
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद अब लगभग तय हो गया है कि तीन नए कृषि कानूनों को केंद्र सरकार वापस लेगी। इस घोषणा पर किसान नेताओं और अन्य किसानों ने हर्ष व्यक्त किया है। लोगों ने आज के दिन को खुशी का दिन बताया। किसानों का कहना था कि प्रधानमंत्री का यह अच्छा निर्णय है।
तीन काले कानूनों की वापसी किसानों के लिए खुशी की बात है। लेकिन दुख भी है कि आंदोलन में कई किसान भाई शहीद हो गए, हमारे प्रधानमंत्री ने दुख तक प्रकट नहीं किया। किसानों के लिए आज खुशी का दिन है।
रक्षपाल सिंह, गांव जमुनिया बंडा
प्रधानमंत्री का यह अच्छा निर्णय है। कृषि कानून वापस होने से किसानों को राहत मिली है। अब किसान आंदोलन से वापस आकर अपने खेतों पर पूरे मनोयोग से काम कर सकेंगे। इसे किसी पक्ष की हार-जीत की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
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रामशंकर मिश्रा, सिल्हुआ खुटार
सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है, यह खुशी की बात है। सरकार बहुत जल्द संसद में प्रस्ताव पास कर कॉपी जारी करने का काम करें। सरकार ने बहुत देर कर की है, यह बहुत ही दुख की बात भी हैं।
मंजीत सिंह धालीवाल, जिलाध्यक्ष भाकियू टिकैत गुट शाहजहांपुर
किसान खुश हैं। वो एक-दूसरे को मिठाई खिला रहे हैं। प्रधानमंत्री किसानों के हित में काम करें, तभी किसान खुशहाल होगा। दुख भी है कि प्रधानमंत्री ने बहुत देर कर दी है। जो किसान शहीद हुए हैं उनकी भरपाई नहीं हो सकती है।
जसपाल सिंह, गांव कुइयां महोलिया बंडा
प्रधानमंत्री द्वारा कृषि कानून वापस लेने की घोषणा सराहनीय कदम है, लेकिन इससे काम नहीं चलेगा। एमएसपी के बारे में भी सरकार अपनी नीति स्पष्ट करें। संसदीय प्रक्रिया में कानून वापस लिए जाएं तभी किसानों का सम्मान होगा।
आदित्य प्रताप सिंह किसान नेता, जिला प्रवक्ता किसान यूनियन टिकैत गुट।
तीनों कृषि कानून वापस लेने का प्रधानमंत्री का निर्णय स्वागत योग्य है। सरकार ने किसानों की पीड़ा को समझा है और उनकी मांग मानकर उनका मान सम्मान बढ़ाया है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों के हित में उचित कदम उठाकर उठाए।
सुखदेव वर्मा पूर्व प्रधान गांव पंचायत मोहनपुर।
देर सवेर ही सही, तीनों कृषि कानून वापस लेकर प्रधानमंत्री ने किसानों का गौरव बढ़ाया है। वैसे सरकार किसानों के हित में काम कर रही है, इस कदम से आगामी चुनाव में भी सरकार को काफी लाभ होगा। यह कदम बेहद सराहनीय है।
राजेश मौर्य, पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत रजवारी
तमाम किसान साथियों की आंदोलन में शहादत का परिणाम है कि सरकार को झुकना पड़ा। जब तक संसद में कानूनों की वापसी और एमएसपी पर बिल नहीं आता है आंदोलन जारी रहेगा। खीरी हिंसा को लेकर 22 को लखनऊ में महापंचायत में किसान पहुंच रहे हैं।
उदयवीर सिंह, ब्लाक अध्यक्ष भाकियू
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तीन काले कानूनों की वापसी किसानों के लिए खुशी की बात है। लेकिन दुख भी है कि आंदोलन में कई किसान भाई शहीद हो गए, हमारे प्रधानमंत्री ने दुख तक प्रकट नहीं किया। किसानों के लिए आज खुशी का दिन है।
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रक्षपाल सिंह, गांव जमुनिया बंडा
प्रधानमंत्री का यह अच्छा निर्णय है। कृषि कानून वापस होने से किसानों को राहत मिली है। अब किसान आंदोलन से वापस आकर अपने खेतों पर पूरे मनोयोग से काम कर सकेंगे। इसे किसी पक्ष की हार-जीत की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।
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रामशंकर मिश्रा, सिल्हुआ खुटार
सरकार ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर दी है, यह खुशी की बात है। सरकार बहुत जल्द संसद में प्रस्ताव पास कर कॉपी जारी करने का काम करें। सरकार ने बहुत देर कर की है, यह बहुत ही दुख की बात भी हैं।
मंजीत सिंह धालीवाल, जिलाध्यक्ष भाकियू टिकैत गुट शाहजहांपुर
किसान खुश हैं। वो एक-दूसरे को मिठाई खिला रहे हैं। प्रधानमंत्री किसानों के हित में काम करें, तभी किसान खुशहाल होगा। दुख भी है कि प्रधानमंत्री ने बहुत देर कर दी है। जो किसान शहीद हुए हैं उनकी भरपाई नहीं हो सकती है।
जसपाल सिंह, गांव कुइयां महोलिया बंडा
प्रधानमंत्री द्वारा कृषि कानून वापस लेने की घोषणा सराहनीय कदम है, लेकिन इससे काम नहीं चलेगा। एमएसपी के बारे में भी सरकार अपनी नीति स्पष्ट करें। संसदीय प्रक्रिया में कानून वापस लिए जाएं तभी किसानों का सम्मान होगा।
आदित्य प्रताप सिंह किसान नेता, जिला प्रवक्ता किसान यूनियन टिकैत गुट।
तीनों कृषि कानून वापस लेने का प्रधानमंत्री का निर्णय स्वागत योग्य है। सरकार ने किसानों की पीड़ा को समझा है और उनकी मांग मानकर उनका मान सम्मान बढ़ाया है। सरकार को चाहिए कि वह किसानों के हित में उचित कदम उठाकर उठाए।
सुखदेव वर्मा पूर्व प्रधान गांव पंचायत मोहनपुर।
देर सवेर ही सही, तीनों कृषि कानून वापस लेकर प्रधानमंत्री ने किसानों का गौरव बढ़ाया है। वैसे सरकार किसानों के हित में काम कर रही है, इस कदम से आगामी चुनाव में भी सरकार को काफी लाभ होगा। यह कदम बेहद सराहनीय है।
राजेश मौर्य, पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत रजवारी
तमाम किसान साथियों की आंदोलन में शहादत का परिणाम है कि सरकार को झुकना पड़ा। जब तक संसद में कानूनों की वापसी और एमएसपी पर बिल नहीं आता है आंदोलन जारी रहेगा। खीरी हिंसा को लेकर 22 को लखनऊ में महापंचायत में किसान पहुंच रहे हैं।
उदयवीर सिंह, ब्लाक अध्यक्ष भाकियू

सुखदेव वर्मा पूर्व प्रधान- फोटो : SHAHJAHANPUR

राकेश मौर्य पूर्वप्रधान- फोटो : SHAHJAHANPUR

उदयवीर सिंह ब्लाक अध्यक्ष भाकियू (टिकैत गुट)- फोटो : SHAHJAHANPUR

रक्षपाल सिंह, गांव जमुनिया बंडा- फोटो : POWAYAN

मंजीत सिंह धालीवाल, जिलाध्यक्ष भाकियू टिकैत शाहजहांपुर- फोटो : POWAYAN

जसपाल सिंह, गांव कुइयां महोलिया बंडा- फोटो : POWAYAN