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जलालाबाद : चेयरमैन पद पर पहली बार हुआ सपा का कब्जा

Sun, 14 May 2023 01:25 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Sun, 14 May 2023 01:25 AM IST
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Jalalabad: SP occupied the post of chairman for the first time
जलालाबाद। पिछले कई चुनावों में चेयरमैन पद के लिए सपा प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया, लेकिन जीत हासिल नही कर सके। यह पहला मौका है जब सपा के शकील अहमद ने जीत दर्ज की है। इससे पहले मुस्लिम समाज से सादिक अली और वैश्य समाज से मनेंद्र गुप्ता भी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं सके। खास बात यह है कि जब यहां नगर पंचायत थी, तब वर्ष 1971 के चुनाव में मोहल्ला सदुल्लागंज निवासी अजमततुल्ला कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर चेयरमैन बने थे। अब 52 साल बाद मुस्लिम समाज से शकील अहमद ने जीत दर्ज की है।
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अंतिम राउंड तक बढ़ी रही सभी प्रत्याशियों की धड़कन
अंतिम राउंड में एक-एक वोट के लिए कशमकश रही। इसके चलते कभी सपा प्रत्याशी शकील तो कभी निर्दलीय मनेंद्र आगे-पीछे होते रहे। अपने प्रत्याशी की जीत पक्की मानकर चल रहे दोनों के समर्थक जिंदाबाद के नारे लगाते हुए मतगणना स्थल के बाहर माला लेकर स्वागत के इंतजार में खड़े रहे। मतगणना के बाद सपा के शकील को विजयी घोषित किया गया। बाद में दोबारा गणना होने की अफवाह पर समर्थकों में मायूसी छा गई। इस दौरान मतगणना स्थल पर दोनों के समर्थकों के बीच झड़प हो जाने की खबर भी फैल गई। कुछ ही देर में पुलिस ने बाहर खंडहर रोड पर मौजूद समर्थकों को दूर तक खदेड़ दिया और शकील को प्रमाणपत्र मिलने के बाद थाना प्रभारी ने अपनी गाड़ी से उनके घर तक छोड़ा।
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अंतिम समय में शकील के पक्ष में आए भाजपा समर्थक
अंतिम राउंड की गणना के बाद जब शकील 24 वोटोंं से विजयी घोषित कर दिए गए तो मनेंद्र के समर्थकों ने दोबारा मतगणना कराने को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके चलते शकील को प्रमाणपत्र देने में विलंब होने लगा। दोबारा मतगणना में हरा दिए जाने की आशंका के चलते शकील प्रमाणपत्र जारी करने का दबाव बनाने लगे। चूंकि भाजपा नेता मनेंद्र बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े थे इसलिए वह पार्टी के लोगों के लिए पहले ही किरकिरी बने हुए थे। मौके की नजाकत को देखते हुए भाजपा समर्थकों को हिसाब चुकता करने का यह समय उपयुक्त लगा और वे लोग खुलकर शकील के पक्ष में आ गए। भाजपा समर्थकों ने मतगणना दोबारा न कराने की मांग प्रशासन से की। इसके कुछ देर बाद शकील अहमद को जीत का प्रमाणपत्र दे दिया गया।
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