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Shahjahanpur News: जलालाबाद-शमसाबाद हाईवे दो जगह डूबा, पैलानी उत्तरी के घरों में पहुंचा पानी
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जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे पर भरे पानी से गुजरते लोग। संवाद
शाहजहांपुर/मिर्जापुर। गंगा और रामगंगा में उफान जारी रहने से कलान और जलालाबाद तहसील के करीब चार दर्जन तटीय गांवों में बाढ़ विकराल होती जा रही है। बीते 24 घंटों में गंगा का जलस्तर 10 सेमी और रामगंगा का 21 सेमी बढ़ा है। गंगा अब खतरे के निशान से महज 15 सेमी नीचे है। बाढ़ के पानी से जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे दो स्थानों पर डूब गया है और करीब दो फुट पानी बह रहा है। पैलानी उत्तरी में कई घरों में पानी घुस गया है।
मिर्जापुर क्षेत्र में चौरा गांव के पास हाईवे पर करीब 200 मीटर सड़क डूब गई है। गुटेटी उत्तर के पास नाले पर बनी रपटा पुलिया भी पानी में डूब गई है। पैलानी उत्तरी, इस्लामनगर, आजादनगर और मस्जिदनगला के संपर्क मार्ग पहले से डूबे थे। अब पानी बढ़ने से इनसे गुजरना जोखिम भरा हो गया है। इसके बावजूद ग्रामीण पशुओं का चारा, दवाएं और खाद्य सामग्री लाने के लिए तेज बहाव के बीच निकलने के लिए मजबूर हैं।
पैलानी उत्तरी में कई घरों के बाहर बने शौचालय डूब गए हैं। इंडिया मार्का हैंडपंप पानी में डूबने से ग्रामीणों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। खेतों में ज्वार, बाजरा, उड़द, तिल्ली, गन्ना और धान की फसलें जलमग्न हैं। इससे किसान परेशान हैं।
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लुहारन नगला, बांसखेड़ा, भरतपुर, निबिया नगला, बटन नगला, मोती नगला, अभिचारपुर, कटेला नगला और पिड़रिया भी बाढ़ से घिर गए हैं, लेकिन अभी नाव की व्यवस्था नहीं हुई है। पैलानी उत्तरी के फूल सिंह कुशवाहा ने बताया कि घर में पानी भरने से भोजन की दिक्कत है।
इस्लामनगर के सालिम, मोहम्मद शहजाद, लालू और नन्हे ने बताया कि गलियों में पानी भरने से आवागमन मुश्किल है। जरूरतमंद लोग निजी मोटर बोट से बाजार जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था न होने से पशुपालक भी परेशान हैं।
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने बताया कि नदियों के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। स्थिति अभी नियंत्रण में है। प्रशासनिक टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं।
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रामगंगा के कटान से भरतौली को बचाने की कवायद तेज
अल्हागंज। रामगंगा में उफान बढ़ने के साथ तटवर्ती गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। जैतीपुर, जलालाबाद और परौर होते हुए जिले की सीमा पर स्थित डबरी घाट में रामगंगा का जलस्तर 21 सेंटीमीटर बढ़कर 136.81 मीटरगेज पहुंच गया है। इसके बीच भरतौली गांव को कटान से बचाने के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। सिंचाई विभाग कटान वाले हिस्सों में बंबू क्रेट लगाकर उनमें ईंट-पत्थर और बालू की बोरियां भर रहा है।
ग्रामीणों को इससे राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर और लगातार कटान ने गांव के अस्तित्व को लेकर खतरा खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले वर्ष से नदी फिर गांव की ओर बढ़ रही है। इससे पहले वर्ष 2011 की बाढ़ में रामगंगा के कटान से गांव के करीब 20-25 मकान नदी में समा गए थे। ग्रामीण कमलेश शर्मा ने बताया कि उस समय गांव का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। आशुतोष सिंह के अनुसार नदी किनारे बसा पूरा टोला कटान की भेंट चढ़ गया था और कई ग्रामीणों की उपजाऊ जमीन भी नदी में समा गई थी।
अब नदी के बिल्कुल करीब पहुंच चुके मकानों को ग्रामीण खुद तोड़कर ईंटें निकाल रहे हैं, ताकि गृहस्थी का सामान बचाया जा सके। उनका कहना है कि भविष्य में जहां रहने की व्यवस्था होगी, वहीं ईंटों का दोबारा इस्तेमाल करेंगे। गांव का संपर्क मार्ग पानी में डूबने से आवागमन ठप है और ग्रामीण दैनिक जरूरत की वस्तुओं के लिए परेशान हैं। संवाद
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खेतों तक पहुंचने के लिए निजी नाव का सहारा
भरतौली के कई ग्रामीणों के खेत रामगंगा के पार हैं। जलस्तर बढ़ने पर नाव ही आवागमन का साधन हैं। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन कई बार नाव उपलब्ध कराता है, लेकिन तेज बहाव में छोटी नाव से नदी पार करना जोखिम भरा है। कई बार ग्रामीण चंदा जुटाकर निजी नाव की व्यवस्था करते हैं, जो एक-दो साल से अधिक कारगर नहीं रहती। एसडीएम जलालाबाद मधुसूदन गुप्ता ने बताया कि गांव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नाव भिजवा दी गई है। बाढ़ नियंत्रण अधिकारी बांस के क्रेट लगाकर कटान रोकने का प्रयास कर रहे हैं। पास के विद्यालय में बाढ़ चौकी स्थापित कर लेखपालों को लगातार निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
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बाढ़ प्रभावित मोहनपुर में लगा स्वास्थ्य शिविर
परौर। रामगंगा की बाढ़ से प्रभावित गांव मोहनपुर में मंगलवार को कलान पीएचसी के डॉक्टरों की टीम ने जनहित शिक्षा सेवा समिति के सहयोग से स्वास्थ्य शिविर लगाया। इस दौरान 120 मरीजों का परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाएं दी गईं।
शिविर में डॉ. इमरान खां, दंत रोग चिकित्सक डॉ. इमरान अहमद, लैब टेक्नीशियन सूर्य प्रताप आदि ने ग्रामीणों में बारिश में होने वाली बीमारियों पर विशेष ध्यान दिया। डॉक्टरों के अनुसार जांच में बुखार, पेटदर्द, उल्टी-दस्त, एलर्जी, आंख दुखने आदि बीमारियों से ग्रस्त मरीज ज्यादा पहुंचे। व्यवस्था में समिति के प्रबंधक सत्यवीर चौहान, रवि राना, राजीव चौहान, राजीव प्रजापति रामलड़ैते प्रजापति, मदन पाल सिंह आदि का सहयोग रहा। संवाद
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मिर्जापुर क्षेत्र में चौरा गांव के पास हाईवे पर करीब 200 मीटर सड़क डूब गई है। गुटेटी उत्तर के पास नाले पर बनी रपटा पुलिया भी पानी में डूब गई है। पैलानी उत्तरी, इस्लामनगर, आजादनगर और मस्जिदनगला के संपर्क मार्ग पहले से डूबे थे। अब पानी बढ़ने से इनसे गुजरना जोखिम भरा हो गया है। इसके बावजूद ग्रामीण पशुओं का चारा, दवाएं और खाद्य सामग्री लाने के लिए तेज बहाव के बीच निकलने के लिए मजबूर हैं।
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पैलानी उत्तरी में कई घरों के बाहर बने शौचालय डूब गए हैं। इंडिया मार्का हैंडपंप पानी में डूबने से ग्रामीणों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। खेतों में ज्वार, बाजरा, उड़द, तिल्ली, गन्ना और धान की फसलें जलमग्न हैं। इससे किसान परेशान हैं।
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लुहारन नगला, बांसखेड़ा, भरतपुर, निबिया नगला, बटन नगला, मोती नगला, अभिचारपुर, कटेला नगला और पिड़रिया भी बाढ़ से घिर गए हैं, लेकिन अभी नाव की व्यवस्था नहीं हुई है। पैलानी उत्तरी के फूल सिंह कुशवाहा ने बताया कि घर में पानी भरने से भोजन की दिक्कत है।
इस्लामनगर के सालिम, मोहम्मद शहजाद, लालू और नन्हे ने बताया कि गलियों में पानी भरने से आवागमन मुश्किल है। जरूरतमंद लोग निजी मोटर बोट से बाजार जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था न होने से पशुपालक भी परेशान हैं।
एडीएम वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार ने बताया कि नदियों के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। स्थिति अभी नियंत्रण में है। प्रशासनिक टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं।
रामगंगा के कटान से भरतौली को बचाने की कवायद तेज
अल्हागंज। रामगंगा में उफान बढ़ने के साथ तटवर्ती गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। जैतीपुर, जलालाबाद और परौर होते हुए जिले की सीमा पर स्थित डबरी घाट में रामगंगा का जलस्तर 21 सेंटीमीटर बढ़कर 136.81 मीटरगेज पहुंच गया है। इसके बीच भरतौली गांव को कटान से बचाने के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। सिंचाई विभाग कटान वाले हिस्सों में बंबू क्रेट लगाकर उनमें ईंट-पत्थर और बालू की बोरियां भर रहा है।
ग्रामीणों को इससे राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन नदी के बढ़ते जलस्तर और लगातार कटान ने गांव के अस्तित्व को लेकर खतरा खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले वर्ष से नदी फिर गांव की ओर बढ़ रही है। इससे पहले वर्ष 2011 की बाढ़ में रामगंगा के कटान से गांव के करीब 20-25 मकान नदी में समा गए थे। ग्रामीण कमलेश शर्मा ने बताया कि उस समय गांव का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। आशुतोष सिंह के अनुसार नदी किनारे बसा पूरा टोला कटान की भेंट चढ़ गया था और कई ग्रामीणों की उपजाऊ जमीन भी नदी में समा गई थी।
अब नदी के बिल्कुल करीब पहुंच चुके मकानों को ग्रामीण खुद तोड़कर ईंटें निकाल रहे हैं, ताकि गृहस्थी का सामान बचाया जा सके। उनका कहना है कि भविष्य में जहां रहने की व्यवस्था होगी, वहीं ईंटों का दोबारा इस्तेमाल करेंगे। गांव का संपर्क मार्ग पानी में डूबने से आवागमन ठप है और ग्रामीण दैनिक जरूरत की वस्तुओं के लिए परेशान हैं। संवाद
खेतों तक पहुंचने के लिए निजी नाव का सहारा
भरतौली के कई ग्रामीणों के खेत रामगंगा के पार हैं। जलस्तर बढ़ने पर नाव ही आवागमन का साधन हैं। ग्रामीणों के अनुसार प्रशासन कई बार नाव उपलब्ध कराता है, लेकिन तेज बहाव में छोटी नाव से नदी पार करना जोखिम भरा है। कई बार ग्रामीण चंदा जुटाकर निजी नाव की व्यवस्था करते हैं, जो एक-दो साल से अधिक कारगर नहीं रहती। एसडीएम जलालाबाद मधुसूदन गुप्ता ने बताया कि गांव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नाव भिजवा दी गई है। बाढ़ नियंत्रण अधिकारी बांस के क्रेट लगाकर कटान रोकने का प्रयास कर रहे हैं। पास के विद्यालय में बाढ़ चौकी स्थापित कर लेखपालों को लगातार निगरानी के लिए तैनात किया गया है।
बाढ़ प्रभावित मोहनपुर में लगा स्वास्थ्य शिविर
परौर। रामगंगा की बाढ़ से प्रभावित गांव मोहनपुर में मंगलवार को कलान पीएचसी के डॉक्टरों की टीम ने जनहित शिक्षा सेवा समिति के सहयोग से स्वास्थ्य शिविर लगाया। इस दौरान 120 मरीजों का परीक्षण कर उन्हें आवश्यक दवाएं दी गईं।
शिविर में डॉ. इमरान खां, दंत रोग चिकित्सक डॉ. इमरान अहमद, लैब टेक्नीशियन सूर्य प्रताप आदि ने ग्रामीणों में बारिश में होने वाली बीमारियों पर विशेष ध्यान दिया। डॉक्टरों के अनुसार जांच में बुखार, पेटदर्द, उल्टी-दस्त, एलर्जी, आंख दुखने आदि बीमारियों से ग्रस्त मरीज ज्यादा पहुंचे। व्यवस्था में समिति के प्रबंधक सत्यवीर चौहान, रवि राना, राजीव चौहान, राजीव प्रजापति रामलड़ैते प्रजापति, मदन पाल सिंह आदि का सहयोग रहा। संवाद

जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे पर भरे पानी से गुजरते लोग। संवाद

जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे पर भरे पानी से गुजरते लोग। संवाद

जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे पर भरे पानी से गुजरते लोग। संवाद