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जहां मान न हो, वहां जाना ठीक नहीं : अरविंद
Wed, 09 Apr 2025 12:52 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Wed, 09 Apr 2025 12:52 AM IST
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पुवायां के गांव बिलसड़ी खुर्द में कथा सुनाते अरविंद दीक्षित। संवाद
पुुुुुुुुवायां। गांव बिलसड़ी खुर्द में चल रहे रामजन्म महोत्सव में मंगलवार को कथा व्यास अरविंद दीक्षित ने सती प्रसंग सुनाया।
कथा व्यास ने कहा कि सती राजा दक्ष की पुत्री थीं। दक्ष के प्रजापति बनने पर उन्होंने एक विराट यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन नाराजगी के चलते सती और भगवान शंकर को यज्ञ में निमंत्रण नहीं भेजा। भगवान शिव ने कहा कि जहां मान न हो, वहां नहीं जाना चाहिए। फिर भी सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गईं। दक्ष ने पुत्री के आने पर उपेक्षा का भाव प्रकट किया और शिव के विषय में सती के सामने ही अपमानजनक बातें कहीं। इस कारण सती ने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए।
यह खबर सुनते ही शिव ने वीरभद्र को भेजा, जिसने दक्ष का सिर काट दिया। इसके बाद दुखी शिव ने सती के शरीर को उठाकर तांडव नृत्य किया। पृथ्वी समेत तीनों लोकों को व्याकुल देखकर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। सती के शरीर का जो हिस्सा और धारण किए आभूषण जहां-जहां गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आ गए।
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कथा व्यास ने कहा कि सती राजा दक्ष की पुत्री थीं। दक्ष के प्रजापति बनने पर उन्होंने एक विराट यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन नाराजगी के चलते सती और भगवान शंकर को यज्ञ में निमंत्रण नहीं भेजा। भगवान शिव ने कहा कि जहां मान न हो, वहां नहीं जाना चाहिए। फिर भी सती अपने पिता के यज्ञ में पहुंच गईं। दक्ष ने पुत्री के आने पर उपेक्षा का भाव प्रकट किया और शिव के विषय में सती के सामने ही अपमानजनक बातें कहीं। इस कारण सती ने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए।
यह खबर सुनते ही शिव ने वीरभद्र को भेजा, जिसने दक्ष का सिर काट दिया। इसके बाद दुखी शिव ने सती के शरीर को उठाकर तांडव नृत्य किया। पृथ्वी समेत तीनों लोकों को व्याकुल देखकर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। सती के शरीर का जो हिस्सा और धारण किए आभूषण जहां-जहां गिरे वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आ गए।

पुवायां के गांव बिलसड़ी खुर्द में कथा सुनाते अरविंद दीक्षित। संवाद
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