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Shahjahanpur News: दस माह बाद भी पूरी नहीं हो सकी उप डाकघर में घोटाले की जांच
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अल्हागंज। उप डाकघर में तमाम खातेदारों के खातों से 1.20 करोड़ रुपये के घोटाले को उजागर हुए करीब दस माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक विभाग और पुलिस की जांच किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। पुलिस अब तक केवल 25 खाताधारकों के बयान दर्ज कर सकी है, जबकि घोटाला इससे कहीं अधिक खातेदारों की जमा रकम का किया गया है। अन्य खातेदारों के सामने आने पर घोटाले की रकम और बढ़ सकती है।
गत वर्ष जुलाई में घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब कई खाताधारकों ने उनकी वर्षों की जमा-पूंजी खातों से निकाल लिए जाने की शिकायतें करनी शुरू कीं। खातेदारों का आरोप था कि एक डाक कर्मी ने सुनियोजित तरीके से उनकी जमा रकम का गबन किया। उन्हें फर्जी रसीदें और पासबुक देकर रकम जमा होने का भरोसा दिलाया जाता रहा।
घोटाले की जांच उस समय धीमी पड़ गई, जब रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले के विवेचक का तबादला हो गया और आरोपियों को अदालत से अंतरिम राहत मिलने के कारण उनकी गिरफ्तारी भी नहीं हो सकी। अब पुलिस स्तर से जांच की जिम्मेदारी थाना प्रभारी ओमप्रकाश को सौंपी गई है।
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इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए डाक विभाग ने भी जांच टीम गठित की थी। विभागीय जांच के बाद उप डाकपाल नवीन आर्य, डाक कर्मी सूरज प्रकाश और उसके पुत्र रितिक के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। इसी आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। विभागीय जांच से पता चला कि घोटाले की योजना कई वर्ष पहले बनाई गई।
थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने बताया कि विभागीय जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए कई बार पत्राचार करने पर शनिवार को डाक विभाग के अधिकारी थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि मामले की जांच जल्द पूरी हो जाएगी।
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गत वर्ष जुलाई में घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब कई खाताधारकों ने उनकी वर्षों की जमा-पूंजी खातों से निकाल लिए जाने की शिकायतें करनी शुरू कीं। खातेदारों का आरोप था कि एक डाक कर्मी ने सुनियोजित तरीके से उनकी जमा रकम का गबन किया। उन्हें फर्जी रसीदें और पासबुक देकर रकम जमा होने का भरोसा दिलाया जाता रहा।
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घोटाले की जांच उस समय धीमी पड़ गई, जब रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले के विवेचक का तबादला हो गया और आरोपियों को अदालत से अंतरिम राहत मिलने के कारण उनकी गिरफ्तारी भी नहीं हो सकी। अब पुलिस स्तर से जांच की जिम्मेदारी थाना प्रभारी ओमप्रकाश को सौंपी गई है।
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इधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए डाक विभाग ने भी जांच टीम गठित की थी। विभागीय जांच के बाद उप डाकपाल नवीन आर्य, डाक कर्मी सूरज प्रकाश और उसके पुत्र रितिक के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। इसी आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। विभागीय जांच से पता चला कि घोटाले की योजना कई वर्ष पहले बनाई गई।
थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने बताया कि विभागीय जांच रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए कई बार पत्राचार करने पर शनिवार को डाक विभाग के अधिकारी थाने पहुंचे। उन्होंने बताया कि मामले की जांच जल्द पूरी हो जाएगी।