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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पनपने लगीं संक्रामक बीमारियां
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शाहजहांपुर। जलालाबाद और कलान तहसील में गंगा, रामगंगा के किनारे बसे गांवों के लोगों को अभी बाढ़ से पूरी तरह निजात भी नहीं मिल सकी कि वहां संक्रामक बीमारियां पनपने लगी हैं। गांवों में आबादी तक भरे पानी से सड़ांध उठने लगी है। इस पानी में मच्छर पनप रहे हैं तो वायरल फीवर, उल्टी-दस्त आदि बीमारियां फैल रही हैं। गांवों के आसपास और संपर्क मार्गों पर जगह-जगह पानी भरा होने से मरीजों का अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
बीघापुर नई बस्ती के घरों में ठहरना मुश्किल
कोलाघाट पुल के पास रामगंगा के तटवर्ती गांव बीघापुर नई बस्ती का संपर्क मार्ग जलभराव और कीचड़ से भरा मिला। वीरपाल कश्यप की पत्नी कुसुमा दरवाजे तक भरे बाढ़ के पानी से निकलकर आईं। बोल- कई दिन से भरे बाढ़ के पानी में कूड़ा करकट और आसपास की गंदगी सड़ने से उठ रही दुर्गंध से घर में बैठना मुश्किल है। पड़ोसी सुराज की पत्नी माधुरी ने बस्ती में एक भी सरकारी हैंडपंप नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि घरों में लगे हैंडपंप से लोग गंदा पानी पीकर बीमार पड़ रहे हैं। गांव की लौंगश्री, उर्मिला, संतोषी, शशि, शिवचरण, रवि, सोनी आदि ने गांव में जलभराव के लिए नाली-खड़ंजा नहीं होना मुख्य कारण गिनाया। बबली बोलीं: बाढ़ से भरे घर से गृहस्थी का सामान निकालकर रोड पर झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। बीमारियां फैलने के बावजूद अस्पताल से कोई कर्मचारी नहीं आने पर नाराजगी जताई।
रामगंगा किनारे नारायणनगर पश्चिमी तक जाना मुश्किल
परौर से नारायणनगर पश्चिमी तक जाने के दौरान कई जगह गांव के संपर्क मार्ग पर कीचड़ और फिसलन से सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह बारिश से हुए जलभराव को लांघते हुए यहां जाना पड़ता है। रामकली दरवाजे पर एक वर्ष के नाती आदित्य को गोद में लिए बैठीं दिखीं। बताया कि आठ दिन से बुखार आ रहा है लेकिन दवा लेने पर कोई फायदा नहीं हुआ। अब शहर में डॉक्टर को दिखाना चाहती हैं, लेकिन वहां तक जाना कठिन है।
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घरों में बुखार से तप रहे लोग
रामगंगा के किनारे नारायणनगर पश्चिमी में दोपहर के वक्त ज्यादातर लोग घरों के अंदर थे। गांव के लेखपाल की बेटी नेहा ने बताया कि छह-सात दिन से जाड़ा लगने के साथ बुखार आ रहा है। एक झोलाछाप से दवा ली, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। नेहा के अनुसार गांव और रास्ते में पानी भरा होने से सरकारी अस्पताल नहीं जा सकी। रामवती ने परौर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दवाएं नहीं मिलने की शिकायत की।
नदियों में बाढ़ बहुत घट गई है लेकिन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। ऐसे में संक्रामक रोग फैलने से रोकने के लिए प्रतिदिन बाढ़ग्रस्त गांवों में कैंप लगाकर रोगियों को दवाएं देने के साथ घरेलू हैंडपंपों में डालने के लिए क्लोरीन की गोलियां भी बांटी जा रहीं हैं। -डॉ. आदेश रस्तोगी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी जरीनपुर (मिर्जापुर)
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बीघापुर नई बस्ती के घरों में ठहरना मुश्किल
कोलाघाट पुल के पास रामगंगा के तटवर्ती गांव बीघापुर नई बस्ती का संपर्क मार्ग जलभराव और कीचड़ से भरा मिला। वीरपाल कश्यप की पत्नी कुसुमा दरवाजे तक भरे बाढ़ के पानी से निकलकर आईं। बोल- कई दिन से भरे बाढ़ के पानी में कूड़ा करकट और आसपास की गंदगी सड़ने से उठ रही दुर्गंध से घर में बैठना मुश्किल है। पड़ोसी सुराज की पत्नी माधुरी ने बस्ती में एक भी सरकारी हैंडपंप नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि घरों में लगे हैंडपंप से लोग गंदा पानी पीकर बीमार पड़ रहे हैं। गांव की लौंगश्री, उर्मिला, संतोषी, शशि, शिवचरण, रवि, सोनी आदि ने गांव में जलभराव के लिए नाली-खड़ंजा नहीं होना मुख्य कारण गिनाया। बबली बोलीं: बाढ़ से भरे घर से गृहस्थी का सामान निकालकर रोड पर झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। बीमारियां फैलने के बावजूद अस्पताल से कोई कर्मचारी नहीं आने पर नाराजगी जताई।
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रामगंगा किनारे नारायणनगर पश्चिमी तक जाना मुश्किल
परौर से नारायणनगर पश्चिमी तक जाने के दौरान कई जगह गांव के संपर्क मार्ग पर कीचड़ और फिसलन से सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह बारिश से हुए जलभराव को लांघते हुए यहां जाना पड़ता है। रामकली दरवाजे पर एक वर्ष के नाती आदित्य को गोद में लिए बैठीं दिखीं। बताया कि आठ दिन से बुखार आ रहा है लेकिन दवा लेने पर कोई फायदा नहीं हुआ। अब शहर में डॉक्टर को दिखाना चाहती हैं, लेकिन वहां तक जाना कठिन है।
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घरों में बुखार से तप रहे लोग
रामगंगा के किनारे नारायणनगर पश्चिमी में दोपहर के वक्त ज्यादातर लोग घरों के अंदर थे। गांव के लेखपाल की बेटी नेहा ने बताया कि छह-सात दिन से जाड़ा लगने के साथ बुखार आ रहा है। एक झोलाछाप से दवा ली, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। नेहा के अनुसार गांव और रास्ते में पानी भरा होने से सरकारी अस्पताल नहीं जा सकी। रामवती ने परौर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से दवाएं नहीं मिलने की शिकायत की।
नदियों में बाढ़ बहुत घट गई है लेकिन अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। ऐसे में संक्रामक रोग फैलने से रोकने के लिए प्रतिदिन बाढ़ग्रस्त गांवों में कैंप लगाकर रोगियों को दवाएं देने के साथ घरेलू हैंडपंपों में डालने के लिए क्लोरीन की गोलियां भी बांटी जा रहीं हैं। -डॉ. आदेश रस्तोगी, प्रभारी चिकित्साधिकारी, सीएचसी जरीनपुर (मिर्जापुर)