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Shahjahanpur News: गो आश्रय स्थल अपर्याप्त, सड़कों पर छुट्टा माैत
Mon, 09 Sep 2024 02:56 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Mon, 09 Sep 2024 02:56 AM IST
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कांट के पिपरौला गांव के पास स्टेट हाईवे पर घूमता गोवंशीय पशुओं का झुंड। संवाद
शाहजहांपुर। गोवंशीय पशुओं को अभियान के तहत पकड़कर गो आश्रय स्थल में भेजे जाने का दावा प्रशासन भले ही कर रहा हो, लेकिन वास्तविकता में यह खोखला साबित हो रहा है। सड़कों पर छुट्टा पशु माैत बनकर घूम रहे हैं। इनकी संख्या के सामने गो आश्रय स्थल भी अपर्याप्त साबित हो रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के संपर्क मार्गों के साथ अधिकांश राजमार्गों पर छुट्टा पशुओं के झुंड दिखाई पड़ रहे हैं। इनकी चपेट में आने से आए दिन लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक, जिले में 97 गो आश्रय स्थल संचालित हैं। इसमें करीब 12 हजार पशुओं को संरक्षित किया गया है। 81 हजार पशुओं को सहभागिता के तहत ग्रामीणों को दिया गया है।
ददरौल क्षेत्र के विधायक अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि सिर्फ उनके निर्वाचन क्षेत्र में ही आठ से दस हजार के आसपास छुट्टा पशु होने का अनुमान है। ये पशु राहगीरों के लिए न केवल जानलेवा साबित हो रहे हैं। फसलें बर्बाद कर किसानों को तबाह करने पर तुले हैं।
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बरेली मोड़ से जलालाबाद तक पशुओं से घिरा हाईवे : बरेली मोड़ से लेकर जलालाबाद के याकूबपुर तिराहे तक लिपुलेख-भिंड नेशनल हाईवे जगह-जगह पशुओं के झुंड से घिरा दिखता है। कांट क्षेत्र में पिपरौला गांव से लेकर खाद फैक्टरी के गेट तक पशु घूमते रहते हैं। सिर्फ कुर्रियाकलां क्षेत्र में करीब 400 पशु 12 गांवों में खेतों से लेकर सड़कों तक घूम रहे हैं। इन पशुओं से किसान बहुत परेशान हैं। शाम के समय ये पशु कांट-पाली मार्ग पर सैकड़ों की संख्या में नहर पुलिया के पास बैठते हैं। कांट नगर में दो गो आश्रय स्थल बने हैं, लेकिन उनकी व्यवस्था पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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पीलीभीत-मैगलगंज हाईवे पर भी पशुओं का कब्जा
पीलीभीत से बंडा, पुवायां, मोहम्मदी होते हुए मैगलगंज तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 730 पर कई जगह पशुओं ने कब्जा कर रखा है। यहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। 10 जुलाई को गांव रामपुर हीरा निवासी बांकेलाल वर्मा पशु से टकराकर घायल हो गए थे। सात अप्रैल को खेत पर गए गांव बंडी निवासी अरविंद को पशु ने घायल कर दिया। शुक्रवार को बंडा के मोहल्ला बृजपाल नगर निवासी अकबर हुसैन पशु की चपेट में आ गए। पशुओं के हमले में गत दस जून को गांव उदयपुर खखरा के हेतराम को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
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बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे पर पशुओं के कई ठिकाने
बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे पर जिले की सीमा में अल्हागंज से लेकर मीरानपुर कटरा तक छुट्टा पशुओं ने कई जगह ठिकाने बना रखे हैं। दिन में पशुओं के झुंड फसलें बर्बाद करते हैं और रात में हाईवे को घेरकर बैठ जाते हैं। मदनापुर में मुख्य चौराहे पर पशुओं की वजह से अक्सर जाम लग जाता है। जलालाबाद क्षेत्र के शाहपुर, कुंडरा, हथिनापुर व फरीदापुर में पशुओं के हमले में महिला समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासन कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। इसी क्षेत्र में शुक्लामई, चमरडुही, नयागांव, सिमराखेड़ा, खण्डहर, हारगुरैया आदि गांव छुट्टा जानवरों के प्रमुख अड्डे हैं। खंडहर व रूपापुर में दो गो आश्रय स्थल हैं, जो कि सैकड़ों छुट्टा पशुओं को देखते हुए अपर्याप्त हैं।
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पलिया-लखनऊ हाईवे पर भी कई जगह पशुओं का डेरा
पलिया-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगह पशुओं ने कब्जा कर रखा है। सेहरामऊ दक्षिणी में थाना परिसर के पास रौरा चौराहे पर अक्सर पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इससे हाईवे का यातायात प्रभावित हो रहा है। शहर से आगे पुवायां मार्ग पर बढ़ते ही नियामतपुर मोड़, लधौली मोड़ और पैना हाइडिल के पास हरियाली वाले ठिकानों पर पशु जमे रहते हैं। सिंधौली कस्बे में हाईवे की मुख्य लेन का एक हिस्सा पशुओं के कब्जे में रहता है। गोरा रायपुर वाले तिराहा, महमंदपुर मोड़ और कोरोकुइयां से लेकर बड़ागांव तक हाईवे पर घूमते पशु वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
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रविवार तक 272 गोवंशीय पशु पकड़े गए
प्रशासन ने अभियान चलाकर रविवार तक कुल 272 पशुओं को पकड़कर गो आश्रय स्थलों में भेजने का दावा किया है। पशुओं को पकड़ने के लिए छह टीमें गठित की गई है, जो कि हाईवे पर अलग-अलग स्थानों से पशुओं को पकड़कर नजदीकी गो आश्रय स्थल पहुंचाती हैं। सीडीओ डॉ. अपराजिता सिंह इस काम की निगरानी कर रही हैं।
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गोवंशीय पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चल रहा है। दो अक्तूबर तक सभी हाईवे पशुओं से मुक्त कर दिए जाएंगे। नए गो आश्रय स्थलों का निर्माण हो रहा है। इससे अधिक से अधिक गोवंशीय पशुओं को पकड़कर गो आश्रय स्थलों में भेजा जाएगा।
- डॉ. अपराजिता सिंह, सीडीओ
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ग्रामीण क्षेत्र के संपर्क मार्गों के साथ अधिकांश राजमार्गों पर छुट्टा पशुओं के झुंड दिखाई पड़ रहे हैं। इनकी चपेट में आने से आए दिन लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं। प्रशासन के मुताबिक, जिले में 97 गो आश्रय स्थल संचालित हैं। इसमें करीब 12 हजार पशुओं को संरक्षित किया गया है। 81 हजार पशुओं को सहभागिता के तहत ग्रामीणों को दिया गया है।
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ददरौल क्षेत्र के विधायक अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि सिर्फ उनके निर्वाचन क्षेत्र में ही आठ से दस हजार के आसपास छुट्टा पशु होने का अनुमान है। ये पशु राहगीरों के लिए न केवल जानलेवा साबित हो रहे हैं। फसलें बर्बाद कर किसानों को तबाह करने पर तुले हैं।
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बरेली मोड़ से जलालाबाद तक पशुओं से घिरा हाईवे : बरेली मोड़ से लेकर जलालाबाद के याकूबपुर तिराहे तक लिपुलेख-भिंड नेशनल हाईवे जगह-जगह पशुओं के झुंड से घिरा दिखता है। कांट क्षेत्र में पिपरौला गांव से लेकर खाद फैक्टरी के गेट तक पशु घूमते रहते हैं। सिर्फ कुर्रियाकलां क्षेत्र में करीब 400 पशु 12 गांवों में खेतों से लेकर सड़कों तक घूम रहे हैं। इन पशुओं से किसान बहुत परेशान हैं। शाम के समय ये पशु कांट-पाली मार्ग पर सैकड़ों की संख्या में नहर पुलिया के पास बैठते हैं। कांट नगर में दो गो आश्रय स्थल बने हैं, लेकिन उनकी व्यवस्था पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।
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पीलीभीत-मैगलगंज हाईवे पर भी पशुओं का कब्जा
पीलीभीत से बंडा, पुवायां, मोहम्मदी होते हुए मैगलगंज तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 730 पर कई जगह पशुओं ने कब्जा कर रखा है। यहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। 10 जुलाई को गांव रामपुर हीरा निवासी बांकेलाल वर्मा पशु से टकराकर घायल हो गए थे। सात अप्रैल को खेत पर गए गांव बंडी निवासी अरविंद को पशु ने घायल कर दिया। शुक्रवार को बंडा के मोहल्ला बृजपाल नगर निवासी अकबर हुसैन पशु की चपेट में आ गए। पशुओं के हमले में गत दस जून को गांव उदयपुर खखरा के हेतराम को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
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बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे पर पशुओं के कई ठिकाने
बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे पर जिले की सीमा में अल्हागंज से लेकर मीरानपुर कटरा तक छुट्टा पशुओं ने कई जगह ठिकाने बना रखे हैं। दिन में पशुओं के झुंड फसलें बर्बाद करते हैं और रात में हाईवे को घेरकर बैठ जाते हैं। मदनापुर में मुख्य चौराहे पर पशुओं की वजह से अक्सर जाम लग जाता है। जलालाबाद क्षेत्र के शाहपुर, कुंडरा, हथिनापुर व फरीदापुर में पशुओं के हमले में महिला समेत तीन लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासन कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। इसी क्षेत्र में शुक्लामई, चमरडुही, नयागांव, सिमराखेड़ा, खण्डहर, हारगुरैया आदि गांव छुट्टा जानवरों के प्रमुख अड्डे हैं। खंडहर व रूपापुर में दो गो आश्रय स्थल हैं, जो कि सैकड़ों छुट्टा पशुओं को देखते हुए अपर्याप्त हैं।
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पलिया-लखनऊ हाईवे पर भी कई जगह पशुओं का डेरा
पलिया-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई जगह पशुओं ने कब्जा कर रखा है। सेहरामऊ दक्षिणी में थाना परिसर के पास रौरा चौराहे पर अक्सर पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। इससे हाईवे का यातायात प्रभावित हो रहा है। शहर से आगे पुवायां मार्ग पर बढ़ते ही नियामतपुर मोड़, लधौली मोड़ और पैना हाइडिल के पास हरियाली वाले ठिकानों पर पशु जमे रहते हैं। सिंधौली कस्बे में हाईवे की मुख्य लेन का एक हिस्सा पशुओं के कब्जे में रहता है। गोरा रायपुर वाले तिराहा, महमंदपुर मोड़ और कोरोकुइयां से लेकर बड़ागांव तक हाईवे पर घूमते पशु वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
रविवार तक 272 गोवंशीय पशु पकड़े गए
प्रशासन ने अभियान चलाकर रविवार तक कुल 272 पशुओं को पकड़कर गो आश्रय स्थलों में भेजने का दावा किया है। पशुओं को पकड़ने के लिए छह टीमें गठित की गई है, जो कि हाईवे पर अलग-अलग स्थानों से पशुओं को पकड़कर नजदीकी गो आश्रय स्थल पहुंचाती हैं। सीडीओ डॉ. अपराजिता सिंह इस काम की निगरानी कर रही हैं।
गोवंशीय पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चल रहा है। दो अक्तूबर तक सभी हाईवे पशुओं से मुक्त कर दिए जाएंगे। नए गो आश्रय स्थलों का निर्माण हो रहा है। इससे अधिक से अधिक गोवंशीय पशुओं को पकड़कर गो आश्रय स्थलों में भेजा जाएगा।
- डॉ. अपराजिता सिंह, सीडीओ

कांट के पिपरौला गांव के पास स्टेट हाईवे पर घूमता गोवंशीय पशुओं का झुंड। संवाद

कांट के पिपरौला गांव के पास स्टेट हाईवे पर घूमता गोवंशीय पशुओं का झुंड। संवाद