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ददरौल में पिछड़े गांव भी होंगे अगड़े
शाहजहांपुर।
Updated Mon, 22 Feb 2016 11:51 PM IST
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नव निर्वाचित ब्लॉक प्रमुखों ने अपने-अपने विकास खंडों में विकास कार्यों का खाका खींचना शुरू कर दिया है। ददरौल ब्लॉक से निर्विरोध निर्वाचित ब्लॉक प्रमुख क्षमा वर्मा ने भी विकास से जुड़ा अपना विजन स्पष्ट कर दिया है। उनकी प्राथमिकता में ब्लाक क्षेत्र में सुविधाएं मुहैया कराकर उसे मॉडल ब्लाक बनाना है। इसके लिए वह सबसे पिछड़े गांव में विकास की योजनाएं लागू करेंगी। साथ ही ददरौल ब्लाक कार्यालय के जर्जर हो रहे भवन को सुधार कर उसे माडर्न लुक दिया जाएगा। दूसरे चरण में गर्रा नदी के पार के पिछड़े गांव को चिह्नित कर वहां सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
इन गांवों को विकास की रोशनी की जरूरत
विकास खंड के उन सभी गांवों की दशा कमोबेश सुधर गई है जिन्हें बसपा शासनकाल में अंबेडकर ग्राम और सपा सरकार में लोहिया समग्र ग्राम श्रेणी में शामिल किया गया। खास यह है कि ऐसे सभी गांव शहर और ब्लॉक मुख्यालय के आसपास सिमटे हैं। कांट के सीमावर्ती क्षेत्र में दूरदराज के गांव विकास की पहुंच से अछूते हैं। उदाहरणार्थ, गर्रा नदी पार के चांदापुर, हसनपुर रसकूपा, गंधार, कपसेड़ा, हरनोखा, घुसवारी, पंथी, बकियापुर आदि गांवों तक पहुंचना कठिन है क्योंकि वहां के लिए न तो कायदे की पुलिया हैं और न ही संपर्क मार्ग। कई गांवों में स्वास्थ्य उपकेंद्र और स्कूलों की कमी भी क्षेत्र की जनता को खल रही है।
सत्ता और विरासत से मदद मिलने की पूरी उम्मीद
सपा के सहयोग से निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख बनीं क्षमा वर्मा को पंचायत की सियासत परिवार से विरासत में मिली है। वर्ष 1995 से 2000 तक उनकी जेठानी बताशो देवी ग्राम पंचायत बलेली की प्रधान रहीं। वर्ष 2000 से 2010 तक वह स्वयं बलेली की प्रधान रहीं। इसी वर्ष ददरौल प्रथम वार्ड से वह जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं और बलेली की प्रधानी उनकी सासू मां विलासो देवी को मिली। चूंकि, अब सत्ता पक्ष का साथ मिल गया है इसलिए क्षमा वर्मा को उम्मीद है कि पंचायती राजनीति के अनुभव और सरकार से निकटता के बूते विकास के सपने साकार कर सकेंगी।
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सबसे बेकार को सबसे श्रेष्ठ बनाना लक्ष्य
ब्लॉक प्रमुख के अनुसार विकास की दृष्टि से ददरौल ब्लॉक सबसे पिछड़ा है। इसकी बानगी जर्जर हो रहे ब्लॉक कार्यालय से झलकती है। इसीलिए उन्होंने विकास खंड मुख्यालय को सबसे बेहतर बनाने की ठानी है। उन्हें पता है कि शासन से मिलने वाले बजट की आधी धनराशि मरम्मत पर खर्च की जा सकती है। वह कहती हैं कि बिना भेदभाव के पक्षपात रहित तरीके से काम कराना उनका लक्ष्य है क्योंकि निर्विरोध चुने जाने के बाद उन्हें अपनी जिम्मेदारी का पूरा अहसास है।
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इन गांवों को विकास की रोशनी की जरूरत
विकास खंड के उन सभी गांवों की दशा कमोबेश सुधर गई है जिन्हें बसपा शासनकाल में अंबेडकर ग्राम और सपा सरकार में लोहिया समग्र ग्राम श्रेणी में शामिल किया गया। खास यह है कि ऐसे सभी गांव शहर और ब्लॉक मुख्यालय के आसपास सिमटे हैं। कांट के सीमावर्ती क्षेत्र में दूरदराज के गांव विकास की पहुंच से अछूते हैं। उदाहरणार्थ, गर्रा नदी पार के चांदापुर, हसनपुर रसकूपा, गंधार, कपसेड़ा, हरनोखा, घुसवारी, पंथी, बकियापुर आदि गांवों तक पहुंचना कठिन है क्योंकि वहां के लिए न तो कायदे की पुलिया हैं और न ही संपर्क मार्ग। कई गांवों में स्वास्थ्य उपकेंद्र और स्कूलों की कमी भी क्षेत्र की जनता को खल रही है।
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सत्ता और विरासत से मदद मिलने की पूरी उम्मीद
सपा के सहयोग से निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख बनीं क्षमा वर्मा को पंचायत की सियासत परिवार से विरासत में मिली है। वर्ष 1995 से 2000 तक उनकी जेठानी बताशो देवी ग्राम पंचायत बलेली की प्रधान रहीं। वर्ष 2000 से 2010 तक वह स्वयं बलेली की प्रधान रहीं। इसी वर्ष ददरौल प्रथम वार्ड से वह जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं और बलेली की प्रधानी उनकी सासू मां विलासो देवी को मिली। चूंकि, अब सत्ता पक्ष का साथ मिल गया है इसलिए क्षमा वर्मा को उम्मीद है कि पंचायती राजनीति के अनुभव और सरकार से निकटता के बूते विकास के सपने साकार कर सकेंगी।
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सबसे बेकार को सबसे श्रेष्ठ बनाना लक्ष्य
ब्लॉक प्रमुख के अनुसार विकास की दृष्टि से ददरौल ब्लॉक सबसे पिछड़ा है। इसकी बानगी जर्जर हो रहे ब्लॉक कार्यालय से झलकती है। इसीलिए उन्होंने विकास खंड मुख्यालय को सबसे बेहतर बनाने की ठानी है। उन्हें पता है कि शासन से मिलने वाले बजट की आधी धनराशि मरम्मत पर खर्च की जा सकती है। वह कहती हैं कि बिना भेदभाव के पक्षपात रहित तरीके से काम कराना उनका लक्ष्य है क्योंकि निर्विरोध चुने जाने के बाद उन्हें अपनी जिम्मेदारी का पूरा अहसास है।