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Shahjahanpur News: पीएमश्री स्कूलों में साल में दो बार मिलेगा प्रगति पत्र
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शाहजहांपुर। पीएमश्री योजना के तहत चयनित परिषदीय विद्यालयों में अब विद्यार्थियों की प्रगति का आकलन केवल परीक्षा के अंकों से नहीं होगा। उन्हें समग्र प्रगति पत्र (होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड) दिया जाएगा। विद्यार्थियों को सत्र में दो बार प्रगति पत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
जिले में 2716 परिषदीय स्कूलों का संचालन होता है। जिसमें 28 पीएमश्री स्कूल भी शामिल हैं और यहां लगभग 7600 छात्र-छात्राओं का नामांकन हैं। एक बच्चे के प्रगति पत्र पर 20 रुपये खर्च होंगे। इसमें पढ़ाई के परिणाम के साथ बच्चों के व्यवहार, जीवन कौशल, रुचियों, कला, उपस्थिति और व्यक्तित्व विकास का भी लेखा-जोखा दर्ज होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत एनसीईआरटी की ओर से तैयार समग्र प्रगति पत्र का संशोधित प्रारूप विकसित किया है। प्रगति पत्र में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, शैक्षिक उपलब्धियों और शिक्षक की टिप्पणी के लिए स्थान होगा। इसके साथ ही अभिभावकों की प्रतिक्रिया भी दर्ज की जा सकेगी।
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इससे बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके सर्वांगीण विकास की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। बीएसए जयशंकर श्रीवास्तव ने बताया कि समग्र प्रगति पत्र के माध्यम से शिक्षक और अभिभावक बच्चों की क्षमताओं, रुचियों और सीखने में आ रही कठिनाइयों को समझ सकेंगे। इसके आधार पर विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार उन्हें बेहतर शैक्षिक सहयोग देने में भी मदद मिलेगी।
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जिले में 2716 परिषदीय स्कूलों का संचालन होता है। जिसमें 28 पीएमश्री स्कूल भी शामिल हैं और यहां लगभग 7600 छात्र-छात्राओं का नामांकन हैं। एक बच्चे के प्रगति पत्र पर 20 रुपये खर्च होंगे। इसमें पढ़ाई के परिणाम के साथ बच्चों के व्यवहार, जीवन कौशल, रुचियों, कला, उपस्थिति और व्यक्तित्व विकास का भी लेखा-जोखा दर्ज होगा।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत एनसीईआरटी की ओर से तैयार समग्र प्रगति पत्र का संशोधित प्रारूप विकसित किया है। प्रगति पत्र में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर, शैक्षिक उपलब्धियों और शिक्षक की टिप्पणी के लिए स्थान होगा। इसके साथ ही अभिभावकों की प्रतिक्रिया भी दर्ज की जा सकेगी।
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इससे बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके सर्वांगीण विकास की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। बीएसए जयशंकर श्रीवास्तव ने बताया कि समग्र प्रगति पत्र के माध्यम से शिक्षक और अभिभावक बच्चों की क्षमताओं, रुचियों और सीखने में आ रही कठिनाइयों को समझ सकेंगे। इसके आधार पर विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार उन्हें बेहतर शैक्षिक सहयोग देने में भी मदद मिलेगी।