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गंगा और रामगंगा की तलहटी को छलनी कर रहे खनन माफिया
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शाहजहांपुर। जल संपदा के लिहाज से जिले की जलालाबाद और कलान तहसीलें काफी संपन्न हैं। इन दोनों तहसील क्षेत्रों में गंगा, रामगंगा, बहगुल समेत कई नदियां हैं, जिनके किनारे सवा सौ से अधिक गांव बसे हैं। मगर खनन माफिया नदियों के तट छलनी करने पर लगे हैं। नदियों के तटवर्ती गांवों के आसपास करीब चार दर्जन ऐसे ठिकाने हैं, जहां माफिया बेखौफ होकर रेत और बालू का खनन कर रहे हैं। मगर पूरे जिले में खनन का एक भी ठेका न होने के बावजूद यहां लगातार हो रहे अवैध खनन पर रोकथाम के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। दिन-रात जेसीबी मशीन से खनन कराकर यहां से ट्रालियों से रेत ले जाया जा रहा है। मगर अफसर यहां के खोखले हो रहे किनारे बचाने के बजाय लखीमपुर से रेत आने का दम भर रहे हैं।
जलालाबाद में राजकीय ठेकेदार करा रहे खनन
जलालाबाद। खंडहर इलाके में टॉपर गांव से पहले बहगुल नदी पर बने पुल के पास, इसी नदी के किनारे गांव तिकोला के पास और अल्लागंज क्षेत्र के गांव बेलाखेड़ा में रामगंगा नदी के पास तीन प्वाइंट ऐसे हैं, जहां रात में धड़ल्ले से रेत का खनन होता है। इन ठिकानों से क्षेत्र के अलावा अल्हागंज से लेकर बुधुआना तक रेत की सप्लाई की जाती है। खनन का यह काम रात एक बजे से सुबह चार बजे तक होता है। नदियों के किनारे से निकाले जाने वाले इस रेत के सबसे बड़े खरीदार सरकारी काम कराने वाले ठेकेदार हैं। लालकुआं और हल्द्वानी से मंगाकर दुकानों पर बेचा जाने वाला रेत स्थानीय नदियों के रेत के मुकाबले काफी मंहगा पड़ता है। इसलिए राजकीय ठेकेदार माफिया से सांठगांठ कर नदियों से खनन करा रहे हैं। खनन रोकने की गरज से गत सात जून को पुलिस ने रेत भरी चार ट्रॉलियां पकड़कर सीज की थीं, लेकिन उसके बाद से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने से माफिया के हौसले बुलंद हैं।
ढाई घाट पर खुलेआम हो रही रेत बिक्री
मिर्जापुर। फर्रुखाबाद जिले की सीमा पर स्थित ढाई घाट गंगा तट पर खनन माफिया जेसीबी मशीन से रेत का खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं। माफिया लगभग दो वर्ष से इलेक्ट्रॉनिक धर्म कांटा लगाकर खनन किया गया रेत 30 रुपये क्विंटल के भाव बेच रहे हैं। खुलेआम चल रहे खनन के इस अवैध कारोबार में जनपद समेत आसपास के अन्य जिलों के अफसरों की हिस्सेदारी तय है। यही नहीं, क्षेत्र में चल रहे एक दर्जन से अधिक ईंट भट्टों केे लिए रात में मानक से अधिक गहराई तक मिट्टी का खनन किया जा रहा है। खनन की शिकायत पर जांच से पहले ही भट्टा मालिकों को सूचित कर खनन बंद करा दिया जाता है और शिकायतकर्ता झूठे साबित हो जाते हैं। यही वजह है कि क्षेत्र में रेत और मिट्टी के खनन का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
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अल्हागंज में पुलिस के नाम पर बढ़े रेट
अल्हागंज। क्षेत्र में रेता-बालू और मिट्टी का खनन कोई नई बात नहीं है। गांव बेलाखेड़ा और हुल्लापुर के पास रामगंगा नदी के किनारे बालू और मिट्टी का खनन हो रहा है। करीब एक दर्जन माफिया इस कार्य में लगे हैं। माफिया ने खनन को ट्रैक्टर ट्रालियां भी खरीद रखी हैं। रात हो या दिन, खनन जारी रहता है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए माफिया के पास छोटे-बड़े हथियार भी होते हैं। इसलिए उनको किसी का कोई खौफ नहीं है। यहां एक ट्राली मिट्टी का 700 से 800 रुपये तक भाव खुला है, जबकि रेत 2500 से 3000 रुपये प्रति ट्राली बिक रही है। जरूरतमंद जब रेट के बारे में तर्क करता है तो माफिया कहते हैं कि पुलिस को पैसा देना पड़ता है और परमिट जारी होने में भी पांच हजार रुपये का खर्चा आता है। सूत्र बताते हैं कि खनन माफिया अपनी तिकड़मों के बल पर दस ट्राली का परमिट खनन के वास्ते जारी कराते हैं और ज्यादा खनन करते हैं।
कलान क्षेत्र मेें बैलगाड़ियों से ढोई जा रही रेत
कलान। क्षेत्र में गंगा, रामगंगा नदियों के पास बैलगाड़ियों से बड़े पैमाने पर रेत खनन हो रहा है और इसमें क्षेत्र के कई रसूखदार दबंग शामिल हैं। गंगा के किनारे गांव खमरिया और गोलागंज, परौर क्षेत्र में राम गंगा के किनारे कुंडलिया, चपरा और दहिलिया गांव के पास बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, लेकिन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी जानबूझकर अनजान बने हैं। माफिया नदियों से निकाली गई रेत रातों-रात ट्रैक्टर ट्राली से मोरंग-बजरी के ऐसे विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर पहुंचा देते हैं, जिन्होंने रेता भंडारण का लाइसेंस ले रखा है।
जैतीपुर पुलिस ने पकड़ी मिट्टी भरी ट्रॉली
जैतीपुर। पुलिस ने शनिवार शाम गांव बिनौरा बिनौरिया के पास खेत खोदकर निकाली गई मिट्टी से भरी ट्रॉली पकड़ी, लेकिन बाद मेें सौदेबाजी में उलझ गई। इस बारे मेें थानाध्यक्ष राजेश कुमार का कहना है कि जब्त की गई ट्राली की मिट्टी गांव मदरुआ के पास एक ईंट भट्ठे पर ले जाई जा रही थी। थानाध्यक्ष के अनुसार ईंट भट्ठा मालिक ने मिट्टी की रायल्टी जमा कर रखी है। इसलिए ट्रॉली को छोड़ा जा रहा है।
अवैध खनन पर सख्ती से निगाह रखी जा रही है। दो दिन पहले सदर क्षेत्र में रेत से भरा ट्रक पकड़ा गया, लेकिन जिस व्यापारी ने बाहर से रेत मंगाया था, उसने भंडारण शुल्क जमा नहीं किया था। उससे धनराशि जमा करा ली गई है। सभी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में खनन को कड़ाई से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। - गिरिजेश कुमार चौधरी, एडीएम फाइनेंस
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जलालाबाद में राजकीय ठेकेदार करा रहे खनन
जलालाबाद। खंडहर इलाके में टॉपर गांव से पहले बहगुल नदी पर बने पुल के पास, इसी नदी के किनारे गांव तिकोला के पास और अल्लागंज क्षेत्र के गांव बेलाखेड़ा में रामगंगा नदी के पास तीन प्वाइंट ऐसे हैं, जहां रात में धड़ल्ले से रेत का खनन होता है। इन ठिकानों से क्षेत्र के अलावा अल्हागंज से लेकर बुधुआना तक रेत की सप्लाई की जाती है। खनन का यह काम रात एक बजे से सुबह चार बजे तक होता है। नदियों के किनारे से निकाले जाने वाले इस रेत के सबसे बड़े खरीदार सरकारी काम कराने वाले ठेकेदार हैं। लालकुआं और हल्द्वानी से मंगाकर दुकानों पर बेचा जाने वाला रेत स्थानीय नदियों के रेत के मुकाबले काफी मंहगा पड़ता है। इसलिए राजकीय ठेकेदार माफिया से सांठगांठ कर नदियों से खनन करा रहे हैं। खनन रोकने की गरज से गत सात जून को पुलिस ने रेत भरी चार ट्रॉलियां पकड़कर सीज की थीं, लेकिन उसके बाद से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने से माफिया के हौसले बुलंद हैं।
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ढाई घाट पर खुलेआम हो रही रेत बिक्री
मिर्जापुर। फर्रुखाबाद जिले की सीमा पर स्थित ढाई घाट गंगा तट पर खनन माफिया जेसीबी मशीन से रेत का खुलेआम अवैध खनन कर रहे हैं। माफिया लगभग दो वर्ष से इलेक्ट्रॉनिक धर्म कांटा लगाकर खनन किया गया रेत 30 रुपये क्विंटल के भाव बेच रहे हैं। खुलेआम चल रहे खनन के इस अवैध कारोबार में जनपद समेत आसपास के अन्य जिलों के अफसरों की हिस्सेदारी तय है। यही नहीं, क्षेत्र में चल रहे एक दर्जन से अधिक ईंट भट्टों केे लिए रात में मानक से अधिक गहराई तक मिट्टी का खनन किया जा रहा है। खनन की शिकायत पर जांच से पहले ही भट्टा मालिकों को सूचित कर खनन बंद करा दिया जाता है और शिकायतकर्ता झूठे साबित हो जाते हैं। यही वजह है कि क्षेत्र में रेत और मिट्टी के खनन का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
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अल्हागंज में पुलिस के नाम पर बढ़े रेट
अल्हागंज। क्षेत्र में रेता-बालू और मिट्टी का खनन कोई नई बात नहीं है। गांव बेलाखेड़ा और हुल्लापुर के पास रामगंगा नदी के किनारे बालू और मिट्टी का खनन हो रहा है। करीब एक दर्जन माफिया इस कार्य में लगे हैं। माफिया ने खनन को ट्रैक्टर ट्रालियां भी खरीद रखी हैं। रात हो या दिन, खनन जारी रहता है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए माफिया के पास छोटे-बड़े हथियार भी होते हैं। इसलिए उनको किसी का कोई खौफ नहीं है। यहां एक ट्राली मिट्टी का 700 से 800 रुपये तक भाव खुला है, जबकि रेत 2500 से 3000 रुपये प्रति ट्राली बिक रही है। जरूरतमंद जब रेट के बारे में तर्क करता है तो माफिया कहते हैं कि पुलिस को पैसा देना पड़ता है और परमिट जारी होने में भी पांच हजार रुपये का खर्चा आता है। सूत्र बताते हैं कि खनन माफिया अपनी तिकड़मों के बल पर दस ट्राली का परमिट खनन के वास्ते जारी कराते हैं और ज्यादा खनन करते हैं।
कलान क्षेत्र मेें बैलगाड़ियों से ढोई जा रही रेत
कलान। क्षेत्र में गंगा, रामगंगा नदियों के पास बैलगाड़ियों से बड़े पैमाने पर रेत खनन हो रहा है और इसमें क्षेत्र के कई रसूखदार दबंग शामिल हैं। गंगा के किनारे गांव खमरिया और गोलागंज, परौर क्षेत्र में राम गंगा के किनारे कुंडलिया, चपरा और दहिलिया गांव के पास बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है, लेकिन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी जानबूझकर अनजान बने हैं। माफिया नदियों से निकाली गई रेत रातों-रात ट्रैक्टर ट्राली से मोरंग-बजरी के ऐसे विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर पहुंचा देते हैं, जिन्होंने रेता भंडारण का लाइसेंस ले रखा है।
जैतीपुर पुलिस ने पकड़ी मिट्टी भरी ट्रॉली
जैतीपुर। पुलिस ने शनिवार शाम गांव बिनौरा बिनौरिया के पास खेत खोदकर निकाली गई मिट्टी से भरी ट्रॉली पकड़ी, लेकिन बाद मेें सौदेबाजी में उलझ गई। इस बारे मेें थानाध्यक्ष राजेश कुमार का कहना है कि जब्त की गई ट्राली की मिट्टी गांव मदरुआ के पास एक ईंट भट्ठे पर ले जाई जा रही थी। थानाध्यक्ष के अनुसार ईंट भट्ठा मालिक ने मिट्टी की रायल्टी जमा कर रखी है। इसलिए ट्रॉली को छोड़ा जा रहा है।
अवैध खनन पर सख्ती से निगाह रखी जा रही है। दो दिन पहले सदर क्षेत्र में रेत से भरा ट्रक पकड़ा गया, लेकिन जिस व्यापारी ने बाहर से रेत मंगाया था, उसने भंडारण शुल्क जमा नहीं किया था। उससे धनराशि जमा करा ली गई है। सभी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में खनन को कड़ाई से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। - गिरिजेश कुमार चौधरी, एडीएम फाइनेंस