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हाईटेंशन लाइनों की खामियों से जूझते हुए ड्यूटी निभा रहे संविदा कर्मचारी
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खुटार के मोहल्ला बजरिया में घर की दीवारों को छू रही जर्जर बिजली लाइन
- फोटो : POWAYAN
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शाहजहांपुर। करंट से हादसों में मौत की घटनाएं जनपद में आए दिन हो रही हैं। हादसे के बाद विद्युत निगम के अधिकारी अपनी लापरवाहियां छिपाने में जुट जाते हैं। ताकि मृतक का परिवार विभाग पर भारी भरकम मुआवजे का दावा न ठोक सके । संविदा कर्मचारी लाइनों पर काम करने के लिए सुरक्षा उपकरणों की लगातार मांग कर रहे हैं। लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिए जाता। करंट से हादसे का खतरा बना ही रहता है।
जिले में 11, 33 एवं 220 केवी वाली 2348 किमी लंबी हाईटेंशन (एचटी) और 220 एवं 440 वोल्ट वाली 4145 किमी लंबी लोटेंशन (एलटी) लाइनों का जाल फैला है। पॉवर नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए सब स्टेशनों के निर्माण समेत छूटे हुए गांवों में विद्युतीकरण कराया जा रहा है, लेकिन पुरानी हो चुकी लाइनों के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। तार, इंसुलेटर, स्टे वायर (खंभों को सहारा देने वाले तार), एचटी-एलटी लाइनों के दो तारों के बीच दूरी बनाए रखने को इस्तेमाल होने वाली इंसुलेटेड स्टिक, कैपेसिटर आदि की मांग विभागीय स्टोर से पूरी नहीं होती और इसी वजह से लाइनों में खराबियां आने के साथ खंभों पर करंट उतरने की शिकायतें पैदा होती हैं।
इन हालातों में भी संविदा कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरणों के बगैर हाईटेंशन लाइनों पर अक्सर काम करना पड़ता है। कर्मचारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपकेंद्रों की बाद दूर, नगरीय क्षेत्र के उपकेंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को भी सुरक्षा उपकरण नहीं मिल रहे हैं। संविदा विद्युत कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी गत शनिवार को अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन देकर सभी उपकेंद्रों को नई सीढ़ियों के अलावा रबर के ग्लब्स (दस्ताने), अर्थ चेन, सेफ्टी बेल्ट, प्लास्टिक कुचालक लगा इंसुलेटेड प्लायर आदि की मांग कर चुके हैं। संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार पाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के उपकेंद्रों पर बहुधा उच्चाधिकारी कम पहुंचते हैं। इसलिए वहां कर्मचारियों को इस्तेमाल के लायक सीढ़ी भी उपलब्ध नहीं हो पाती।
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जो हाईटेंशन लाइनें पुरानी हो चुकी हैं, उनके अनुरक्षण का काम लगातार कराया जा रहा है। शासन की रिवांप योजना से सभी पुरानी लाइनों के नवीनीकरण का काम बहुत जल्द शुरू होगा। बाराकलां की घटना के मद्देनजर सभी अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वह दूसरों से अवैध रूप से अपना काम कराने वाले संविदा कर्मचारियों को शिकायत मिलने पर तत्काल हटा दें। ऐसे मामलों में मृतक के आश्रितों को मुआवजा दिलाने के लिए संबंधित अभियंता के स्तर से विद्युत सुरक्षा विभाग को विद्युत अधिनियम की धारा 22 के तहत एक सप्ताह में रिपोर्ट भेज दी जाती है। विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच आख्या मिलने के बाद मुआवजा धनराशि की निदेशालय को मांग भेजी जाती है और यह प्रक्रिया दो सप्ताह में पूरी हो जाती है।
-रामनरेश सरोज, अधीक्षण अभियंता, विद्युत निगम
बिजली की लाइन सही करने के लिए ग्लव्स, सेफ्टी बेल्ट, चेन, हेलमेट आदि चीजे मिलनी चाहिए। इससे लाइनमैन की जान बचाने में सहायता मिल सकेगी। सुरक्षा उपकरण नहीं मिलते हैं, जिससे काम करते समय भारी खतरा बना रहता है।
सलमान, संविदा लाइनमैन बिजली उपकेंद्र पुवायां
लाइन फाल्ट ठीक करते समय कई बार इन्वर्टर का करंट बैक आता है। इससे भी कई बार झटका लग जाता है। लाइन की मशीनें गड़बड़ी होने पर भी करंट आ जाता है। इससे बचाव के लिए लाइन मैन को सुरक्षा उपकरण मिलने चाहिए।
महेंद्र कुमार, संविदा लाइन मैन बिजली उपकेंद्र पुवायां
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जिले में 11, 33 एवं 220 केवी वाली 2348 किमी लंबी हाईटेंशन (एचटी) और 220 एवं 440 वोल्ट वाली 4145 किमी लंबी लोटेंशन (एलटी) लाइनों का जाल फैला है। पॉवर नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नए सब स्टेशनों के निर्माण समेत छूटे हुए गांवों में विद्युतीकरण कराया जा रहा है, लेकिन पुरानी हो चुकी लाइनों के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। तार, इंसुलेटर, स्टे वायर (खंभों को सहारा देने वाले तार), एचटी-एलटी लाइनों के दो तारों के बीच दूरी बनाए रखने को इस्तेमाल होने वाली इंसुलेटेड स्टिक, कैपेसिटर आदि की मांग विभागीय स्टोर से पूरी नहीं होती और इसी वजह से लाइनों में खराबियां आने के साथ खंभों पर करंट उतरने की शिकायतें पैदा होती हैं।
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इन हालातों में भी संविदा कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरणों के बगैर हाईटेंशन लाइनों पर अक्सर काम करना पड़ता है। कर्मचारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के बिजली उपकेंद्रों की बाद दूर, नगरीय क्षेत्र के उपकेंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को भी सुरक्षा उपकरण नहीं मिल रहे हैं। संविदा विद्युत कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी गत शनिवार को अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन देकर सभी उपकेंद्रों को नई सीढ़ियों के अलावा रबर के ग्लब्स (दस्ताने), अर्थ चेन, सेफ्टी बेल्ट, प्लास्टिक कुचालक लगा इंसुलेटेड प्लायर आदि की मांग कर चुके हैं। संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक कुमार पाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के उपकेंद्रों पर बहुधा उच्चाधिकारी कम पहुंचते हैं। इसलिए वहां कर्मचारियों को इस्तेमाल के लायक सीढ़ी भी उपलब्ध नहीं हो पाती।
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जो हाईटेंशन लाइनें पुरानी हो चुकी हैं, उनके अनुरक्षण का काम लगातार कराया जा रहा है। शासन की रिवांप योजना से सभी पुरानी लाइनों के नवीनीकरण का काम बहुत जल्द शुरू होगा। बाराकलां की घटना के मद्देनजर सभी अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वह दूसरों से अवैध रूप से अपना काम कराने वाले संविदा कर्मचारियों को शिकायत मिलने पर तत्काल हटा दें। ऐसे मामलों में मृतक के आश्रितों को मुआवजा दिलाने के लिए संबंधित अभियंता के स्तर से विद्युत सुरक्षा विभाग को विद्युत अधिनियम की धारा 22 के तहत एक सप्ताह में रिपोर्ट भेज दी जाती है। विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच आख्या मिलने के बाद मुआवजा धनराशि की निदेशालय को मांग भेजी जाती है और यह प्रक्रिया दो सप्ताह में पूरी हो जाती है।
-रामनरेश सरोज, अधीक्षण अभियंता, विद्युत निगम
बिजली की लाइन सही करने के लिए ग्लव्स, सेफ्टी बेल्ट, चेन, हेलमेट आदि चीजे मिलनी चाहिए। इससे लाइनमैन की जान बचाने में सहायता मिल सकेगी। सुरक्षा उपकरण नहीं मिलते हैं, जिससे काम करते समय भारी खतरा बना रहता है।
सलमान, संविदा लाइनमैन बिजली उपकेंद्र पुवायां
लाइन फाल्ट ठीक करते समय कई बार इन्वर्टर का करंट बैक आता है। इससे भी कई बार झटका लग जाता है। लाइन की मशीनें गड़बड़ी होने पर भी करंट आ जाता है। इससे बचाव के लिए लाइन मैन को सुरक्षा उपकरण मिलने चाहिए।
महेंद्र कुमार, संविदा लाइन मैन बिजली उपकेंद्र पुवायां