फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Health

1826 में खुला था पहला सिविल अस्पताल, विदेशों में भी था नाम

Thu, 20 May 2021 12:39 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 20 May 2021 12:39 AM IST
विज्ञापन
Health
शाहजहांपुर। कोविड महामारी के वक्त सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सबसे ज्यादा तवज्जो दे रही है तो आम आदमी ने भी स्वास्थ्य सेवाओं के महत्व को सबसे ज्यादा पहचाना है। मगर जो स्वास्थ्य सेवाएं आज जिले में उपलब्ध हैं उनके क्रमिक विकास का भी इतिहास है। खासतौर पर एलोपैथिक चिकित्सा को सुदृढ़ करने में अंग्रेजी हुकूमत की बड़ी भूमिका रही थी। 1826 में जिले में पहला सिविल अस्पताल खुला था।
विज्ञापन

शाहजहांपुर में जिला चिकित्सालय, मेडिकल कॉलेज और अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं की ओर से बड़ी भूमिका अदा की जा रही है। शाहजहांपुर में इन संस्थाओं के उद्भव और विकास पर एसएस कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना का शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जनरल ऑफ ह्यूमिनिटीज, साइंस एंड कामर्स में प्रकाशित हुआ है। इस शोध पत्र में ब्रिटिश कालीन आगरा-अवध के संयुक्त प्रांत में जिला शाहजहांपुर में यूरोपीय ढंग की चिकित्सा व्यवस्था के प्रारंभ के साथ-साथ महामारियों के दौरान उनकी भूमिका को रेखांकित किया गया है। इस शोध पत्र में जनरल हिस्ट्री ऑफ डिस्ट्रिक्ट के खंड पांच, ब्रिटिशकालीन शाहजहांपुर गजेटियर तथा संयुक्त प्रांत के गजेटियर को मूल स्रोत बनाया गया है।
विज्ञापन

शोध पत्र के अनुसार शाहजहांपुर सन 1803 में अंग्रेजों के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ गया था किंतु तब यह बरेली जिले की तहसील था और इस कारण उपेक्षित बना रहा।1813 में जब जिला बना तो आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत पुलिस, रेल, डाक तार कोर्ट, इत्यादि विभाग शुरू किए गए। इसी प्रकार वर्तमान की तहसील जाने वाली इमारत में सिविल अस्पताल शुरू करने का निर्णय किया गया। सिविल अस्पताल ने 1826 से कार्य करना शुरू किया। यह जिले में अपनी तरह का इकलौता संस्थान था। 1857 के विद्रोह तक इसकी कोई भी शाखा नहीं थी किंतु बाद में कटरा तथा खुदागंज में इसकी शाखाएं खोली गईं। इसी प्रकार 1868 में जलालाबाद, 1873 में तिलहर, 1880 में पुवायां में इसकी शखाएं खुलीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

-
परौर में खुला था पहला निजी चिकित्सालय
1887 में परौर में जनपद का पहला निजी चिकित्सालय खुला किंतु धन की कमी के कारण 1898 में बंद हो गया। कोर्ट आफ वार्ड्स की ओर से इसे सरकारी मान्यता देने के प्रयास चलते रहे।
-
तहसील में था शाहजहांपुर सिविल अस्पताल
शाहजहांपुर डिस्पेंसरी तथा सिविल अस्पताल शहर में बीचोबीच, आजकल जहां तहसील है, में स्थापित था। बाद में इसे रोजा तथा 1892 में शाहजहांपुर जेल के दक्षिण में तत्कालीन रोजा रोड जो शहर की पूर्वी सीमा का निर्धारण करती थी में स्थानांतरित कर दिया गया। इसमें एक महिला वार्ड भी जोड़ा गया जिसे भारत के गवर्नर जनरल के नाम पर डफरिन वार्ड की संज्ञा दी गई।
-
लंदन के अखबारों की सुर्खियां बने थे यहां के काम
शाहजहांपुर। वर्ष 1909 में शाहजहांपुर गजेटियर के संकलन के समय तक अनेक अस्पताल तथा डिस्पेंसरी अस्तित्व में आ चुके थे। इनमें लोधीपुर, रोजा फैक्टरी तथा पुलिस लाइन का अस्पताल विशेष रूप से प्रसिद्ध थे। डिस्ट्रिक्ट बोर्ड की ओर से भी छह डिस्पेंसरी की व्यवस्था थी, जिसका 75 प्रतिशत व्यय बोर्ड ही वहन करता था जबकि शेष नगरपालिका की ओर से आहरित था। कटरा तथा खुदागंज में व्यय निवेशित फंड से जुटाया जाता था। इन डिस्पेंसरियों का अधीक्षण एक सिविल सर्जन तथा दो सहायक सिविल सर्जन करते थे। जिनके प्रभार में शाहजहांपुर तथा तिलहर की डिस्पेंसरी थी।
अपने शुरुआती काल से ही इन संस्थानों ने दैवीय आपदा, महामारियों के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यहां के स्टाफ के किए गए प्रयास लंदन तक की अखबारों में न्यायोचित ठहराए गए। गजेटियर के वर्णन से पता चलता है जब जिले में प्लेग फैला तो सात डॉक्टरों की टीम ने घर-घर जाकर वैक्सिनेशन के कार्य को किया। इसी प्रकार स्पेनिश फ्लू के फैलने पर जिला अस्पताल की ओर से विशेष कैंप लगाकर महामारी का मुकाबला किया गया। ब्रिटिश गजेटियर संकलन वर्ष के समय से पांच वर्ष पूर्व तक जिला अस्पताल में वार्षिक मरीजों की उपस्थिति 26214 थी जिसमे डफरिन वार्ड तथा लोधीपुर अस्पताल के आंकड़े शामिल हैं। डफरिन वार्ड में इस अवधि में 7664 महिला मरीजों को इलाज कर स्वस्थ किया गया। संवाद

---
यह बहुत ही आश्चर्य का विषय है कि हेनरी रिवर्स नेविल्स कृत शाहजहांपुर गजेटियर में शहर को अपनी अच्छी आबोहवा के लिए पूरे ब्रिटिश भारत में मशहूर बताया गया है और लोग यहां स्वास्थ्य लाभ लेने आते थे। अंग्रेजों के समय शहर एक बड़े बाग का प्रतिनिधित्व करता था और नदियों के मध्य की ऊंची भूमि का महत्व सारगर्भित था। यूरोपीय ढंग की आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था से पहले भी मुगल काल में हम लोगों को शहर के अनेक सुप्रसिद्ध हकीमों का भी वर्णन मिलता है जो नब्ज देखकर ही मर्ज पकड़ लेते थे। जिला चिकिसालय स्टाफ द्वारा प्लेग और स्पेनिश फ्लू जैसी महामारियों से निपटने की चर्चा लंदन के अखबारों में भी हुई थी। वर्तमान में भी चिकित्सीय स्टाफ द्वारा अच्छी भूमिका का निर्वहन किया जा रहा है।
-डॉ. विकास खुराना, विभागाध्यक्ष इतिहास, एसएस कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed