Hathras Stampede: शाहजहांपुर के मासूम भाई-बहन समेत चार ने गंवाई जान, एक महिला लापता; सदमे में परिजन
Hathras Stampede News: हाथरस जिले में भोले बाबा के सत्संग में हुई भगदड़ में शाहजहांपुर जिले के दो मासूम भाई-बहन और दो महिलाओं की भी मौत हो गई। इसकी खबर मिलते ही इनके परिवारों में कोहराम मच गया। तिलहर क्षेत्र की एक महिला लापता बताई जा रही है।
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नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग में शामिल होने हाथरस गए शाहजहांपुर जिले के दो बच्चों और दो महिलाओं की भगदड़ में मौत हो गई। इसकी सूचना जब घर पहुंची तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सत्संग में शामिल होने के लिए कई और लोग भी गए थे। परिजनों को जब उनके सकुशल होने की जानकारी मिली तो उन्होंने राहत की सांस ली। कांट के गांव भमौली के रहने वाले आनंद के नौ साल के पुत्र आयुष व तीन साल की बेटी काव्या की हाथरस में भगदड़ में मौत हो गई। उनकी मौत की खबर सुनकर गांव में बाबा रामविलास व दादी सावित्री बिलख पड़ी। तिलहर के गांव रजाकपुर की धनदेवी लापता हैं। उनके परिजन रातभर तलाश में जुटे रहे।
गांव भमौली निवासी आनंद भोले बाबा के अनुयायी हैं। हाथरस में सत्संग की सूचना पर आनंद की पत्नी दुर्गेश, बहन रामा व सीमा व बेटे आरुष, आयुष और काव्या के साथ बस से रवाना हुईं थीं। आसपास के करीब 50 लोग भी बस में साथ गए थे। भगदड़ में आनंद के बच्चों की मौत हो गई। दोपहर को आनंद ने अपने पिता रामविलास को बच्चों की मौत की सूचना दी। कॉल पर बात करते हुए वह दहाड़े मारकर रो पड़े।
दोनों बच्चों की दादी सावित्री भी गम में डूब गईं। शोर-शराबा होने पर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। उन्होंने सांत्वना दी। रामविलास तो सुधबुध खो बैठे हैं। वहीं पौत्र-पौत्री को याद करते हुए सावित्री की आंखों के आंसू नहीं थम रहे। आरुष बाल-बाल बच गया है। हादसे में शाहजहांपुर निवासी दीपमाला (35) की भी जान गई है।
निगोही की महिला की भी हुई मौत
हाथरस भगदड़ में निगोही के पुवायां रोड पर रेलवे क्रॉसिंग के पास नई बस्ती निवासी हरीशरण की 40 वर्षीय पत्नी रामा देवी की भी मौत हुई है। साथ में उनके पति ने हादसे की खबर दी तो परिजनों में मातम छा गया। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। मूलरूप से पीलीभीत के बिलसंडा क्षेत्र के गांव मन्निया निवासी हरीशरण करीब दस वर्ष पहले यहां आकर रेलवे क्रॉसिंग के पास मकान बनाकर रहने लगे थे। हरीशरण निजी क्लीनिक चलाते हैं।
उनकी पत्नी रामा देवी की भोले बाबा में काफी आस्था थी। वह पिछले सात-आठ वर्ष से हर माह भोले बाबा के सत्संग में शामिल होने जातीं थीं। इस बार भी रामा देवी के साथ उनके पति समेत नगर के अन्य कई लोग गए थे। इनमें नई बस्ती निवासी सियाराम, प्रदीप, राजवीर, नन्हेंलाल की पत्नी और करौंदा गांव के कल्लू व उनकी पत्नी भी शामिल हैं।
हाथरस से सियाराम ने फोन पर बताया कि दोपहर करीब 1:30 बजे सत्संग खत्म होने पर श्रद्धालु बाहर निकले तो गेट पर बनी खाई में कुछ लोग गिर गए। चीख-पुकार मची तो लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगे। इसी भगदड़ में जो भी गिरा, उसे उठने का मौका नहीं मिला और भीड़ में शामिल लोग उनके ऊपर से निकलते गए। आंखों के सामने काफी देर तक अंधेरा छा गया।
उन्होंने बताया कि कुचलने से गंभीर रूप से घायल हुईं रामा देवी को हाथरस के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन वहां उन्होंने दम तोड़ दिया। रामा देवी की मौत की सूचना उनके पति ने बेटों के बजाय एक रिश्तेदार को दी ताकि घर पर बच्चे परेशान नहीं हों। हालांकि, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों की घर के बाहर भीड़ जुटने पर मृतका के बेटों को मां उसे बिछड़ने का अहसास हुआ तो वे गुमसुम हो गए। रामा देवी के बेटे योगेश, वैभव, दुर्गेश और अंश किसी से कुछ बोल नहीं रहे, लेकिन उनकी आंखें बार-बार डबडबा रही हैं।
तिलहर क्षेत्र से गए श्रद्धालुओं में से एक महिला लापता हो गई है। यहां से गए श्रद्धालु महिला की तलाश में जुटे हैं। गांव कुदकापुर खेडापुर निवासी पूरनलाल वर्मा ने फोन पर बताया कि तिलहर से सोमवार की रात 62 श्रद्धालुओं से भरी एक बस सत्संग के लिए हाथरस गई थीं। बताया कि दोपहर लगभग 2 बजे घटना के दौरान वह पंडाल में ही थे। पंडाल में महिलाएं और पुरुष अलग-अलग बैठे थे। सत्संग के समापन के दौरान सड़क के किनारे गड्ढे में कुछ लोग गिरने लगे। इससे भगदड़ मच गई।
उन्होंने बताया कि वे सभी लोग अपनी बस की ओर चले गए। उनके साथ गईं तिलहर के गांव रजाकपुर की धनदेवी का कुछ पता नहीं चल पा रहा है। रात 8: 30 बजे तक साथ गए लोग उन्हें तलाशते रहे। पूरनलाल ने बताया कि तिलहर से बस में क्षेत्र के गांव लाखोहा, रजाकपुर, रुजवारी, नगरिया, मोहनापुर, ईशवरा, शेरापुर, नवादा, खड़खड़ी आदि गांव के लोग गए थे। उन्होंने बताया कि हर महीने के प्रथम मंगलवार को सत्संग होता है। वे लोग भी हर सत्संग में पहुंचते थे।
खुटार से 65 श्रद्धालु गए थे हाथरस, सभी सुरक्षित
खुटार क्षेत्र से 65 श्रद्धालु हाथरस गए थे। सभी लोग सुरक्षित हैं और घर लौट रहे हैं। मोहल्ला बजरिया निवासी वीरेंद्र कुशवाहा ने फोन कॉल पर बताया कि वह अपने परिवार के दस लोगों के साथ हाथरस गए थे। इसके अलावा सिहुरा खुर्द कलां, पिपरिया भागवंत, सुजानपुर, बंडा आदि से 55 श्रद्धालु और बस से गए थे। वीरेंद्र ने बताया कि सत्संग का आमतौर पर दोपहर बाद तीन बजे समापन होता है।
मंगलवार दोपहर 1:20 पर ही सत्संग समाप्त हो गया। श्रद्धालु तीन बजे तक सत्संग की सोचकर बैठे थे। अचानक समापन के कारण लोगों में भगदड़ मच गई। सत्संगस्थल के सामने सड़क पर वाहनों का आवागमन भी ज्यादा था। इस कारण स्थिति ज्यादा बिगड़ गई। वीरेंद्र और उनके साथियों ने कई महिलाओं को भीड़ से निकालकर पंडाल तक पहुंचाया और भीड़ खत्म होने के बाद ही जाने की अपील की। इस बीच भीड़ में कई लोगों की दबने से मौत हो चुकी थी। वीरेंद्र ने बताया कि हमे सभी श्रद्धालु सुरक्षित हैं।