{"_id":"69a497b618adf6729f093210","slug":"gifts-given-to-hafiz-on-completion-of-quran-shahjahanpur-news-c-122-1-sbly1042-166898-2026-03-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: कुरान मुकम्मल होने पर हाफिज को दिए तोहफे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: कुरान मुकम्मल होने पर हाफिज को दिए तोहफे
विज्ञापन
मोहल्ला बाडूजई में मस्जिद शेरुज्जमा खां में कुरान सुनाने वाले हाफिज अबु हमजा को उपहार देते कमेट
शाहजहांपुर। शहर के मोहल्ला बाडूजई प्रथम स्थित मस्जिद शेरुज्जमा खां में रमजान के महीने में तरावीह की नमाज में कुरान मुकम्मल हो गया। इस बीच कुरान सुनाने वाले हाफिज अबु हमजा को तोहफे देकर हौसला बढ़ाया गया।
शनिवार को फातिहाख्वानी के बाद सभी को शीरीनी तकसीम की गई। मस्जिद इमाम मौलाना जुनैद रजा ने कहा कि कुरान की हिफाजत की जिम्मेदारी खुद अल्लाह ने ली है। कुरान-ए-करीम रमजान के मुकद्दस महीने में नाजिल हुआ। मस्जिद कमेटी अध्यक्ष आफताब अली ने कहा कि हम सब आपस में मिलजुल कर मुल्क और कौम की तरक्की के लिए काम करें।
इस मौके पर कमेटी सचिव हाफिज शाह आलम, फाजिल खां, सुहेल खां, शरीफ कुरैशी, सरताज हुसैन, तौहीद आलम, हाजी फारूक, हाफिज हमजा, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के क्षेत्रीय संयोजक सरताज मंसूरी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
-- -- -- -- -
रोजा इफ्तार में की गई दुआ
मस्जिद में सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया। मगरिब की अजान के साथ ही सभी ने खजूर से रोजा इफ्तार किया और विभिन्न पकवानों का आनंद लिया। इसके बाद मगरिब की नमाज अदा की गई।
विज्ञापन
शनिवार को फातिहाख्वानी के बाद सभी को शीरीनी तकसीम की गई। मस्जिद इमाम मौलाना जुनैद रजा ने कहा कि कुरान की हिफाजत की जिम्मेदारी खुद अल्लाह ने ली है। कुरान-ए-करीम रमजान के मुकद्दस महीने में नाजिल हुआ। मस्जिद कमेटी अध्यक्ष आफताब अली ने कहा कि हम सब आपस में मिलजुल कर मुल्क और कौम की तरक्की के लिए काम करें।
विज्ञापन
इस मौके पर कमेटी सचिव हाफिज शाह आलम, फाजिल खां, सुहेल खां, शरीफ कुरैशी, सरताज हुसैन, तौहीद आलम, हाजी फारूक, हाफिज हमजा, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के क्षेत्रीय संयोजक सरताज मंसूरी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
रोजा इफ्तार में की गई दुआ
मस्जिद में सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया। मगरिब की अजान के साथ ही सभी ने खजूर से रोजा इफ्तार किया और विभिन्न पकवानों का आनंद लिया। इसके बाद मगरिब की नमाज अदा की गई।