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गंगा के जल स्तर में आई मामूली कमी, रामगंगा फिर उफनाई
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शाहजहांपुर/मिर्जापुर/परौर। उत्तराखंड और पश्चिमी उप्र के बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी के कारण जिले से होकर निकली नदियों में बहाव सोमवार को भी असामान्य बना रहा। पांच दिन बाद गंगा के जल स्तर में पांच सेमी की मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन रामगंगा का जल स्तर नौ सेमी बढ़ गया। हालांकि गंगा का पानी अभी सड़कों पर नहीं आया है, लेकिन मुख्य मार्ग से तटवर्ती गांवों के रास्ते मेें पानी भरा होने से ग्रामीण आवागमन को लेकर परेशान हैं। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि बीते 24 घंटे की तुलना में बैराजों से गंगा एवं रामगंगा मेें डिस्चार्ज बढ़ा है और इससे मंगलवार तक नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका है।
नरौरा से गंगा में सोमवार सुबह 30147 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ जो बीते दिन की तुलना में करीब 8000 क्यूसेक ज्यादा है। उधर, रामनगर, खो, किच्छा, हरेली आदि बैराजों से रामगंगा में 9547 क्यूसेक पानी का बहाव जारी है जो बीते दिन की तुलना में करीब दो हजार क्यूसेक बढ़ा है। सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि दो दिन पहले गंगा में डिस्चार्ज कम होने पर जल स्तर में थोड़ी कमी आई है, लेकिन सोमवार को बैराज से बहाव अधिक हो जाने से इसका असर यहां गंगा के जल स्तर में वृद्धि के तौर पर 36 से 48 घंटे बाद दिखेगा।
इस लिहाज से रामगंगा का जल स्तर भी बढ़ना तय माना जा रहा है। फिलहाल, गंगा के तटवर्ती गांवों का आवागमन सामान्य बना हुआ है, क्योंकि जलालाबाद-ढाई मार्ग और शमशाबाद जाने वाले मार्गों से बाढ़ अभी थोड़े फासले पर है। वहां के आजादनगर, इस्लामनगर, कमथरी, चितार आदि करीब दो दर्जन तटवर्ती गांवों के आसपास गंगा फैलाव लिए है। उधर, परौर क्षेत्र में रामगंगा, मोहनपुर, बिचपुरी आदि गांवों के और करीब आने से ग्रामीण बाढ़ को लेकर बेहद खौफजदा हैं, लेकिन फिर भी परौर को बचानें के लिए स्थाई प्रयास नहीं किए गए। परौर निवासी सुखवीर सिंह, विजय वीर सिंह, रामचंद्र, दोदराम कुशवाहा आदि इस बात से बेहद खफा हैं कि प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और सांसद अरुण सागर एक कार्यक्रम में शामिल होकर कलान से लौट गए, लेकिन क्षेत्र मेें बाढ़ पीड़ितों की दिक्कतें समझने की जरूरत नहीं समझी।
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नरौरा से गंगा में सोमवार सुबह 30147 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ जो बीते दिन की तुलना में करीब 8000 क्यूसेक ज्यादा है। उधर, रामनगर, खो, किच्छा, हरेली आदि बैराजों से रामगंगा में 9547 क्यूसेक पानी का बहाव जारी है जो बीते दिन की तुलना में करीब दो हजार क्यूसेक बढ़ा है। सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि दो दिन पहले गंगा में डिस्चार्ज कम होने पर जल स्तर में थोड़ी कमी आई है, लेकिन सोमवार को बैराज से बहाव अधिक हो जाने से इसका असर यहां गंगा के जल स्तर में वृद्धि के तौर पर 36 से 48 घंटे बाद दिखेगा।
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इस लिहाज से रामगंगा का जल स्तर भी बढ़ना तय माना जा रहा है। फिलहाल, गंगा के तटवर्ती गांवों का आवागमन सामान्य बना हुआ है, क्योंकि जलालाबाद-ढाई मार्ग और शमशाबाद जाने वाले मार्गों से बाढ़ अभी थोड़े फासले पर है। वहां के आजादनगर, इस्लामनगर, कमथरी, चितार आदि करीब दो दर्जन तटवर्ती गांवों के आसपास गंगा फैलाव लिए है। उधर, परौर क्षेत्र में रामगंगा, मोहनपुर, बिचपुरी आदि गांवों के और करीब आने से ग्रामीण बाढ़ को लेकर बेहद खौफजदा हैं, लेकिन फिर भी परौर को बचानें के लिए स्थाई प्रयास नहीं किए गए। परौर निवासी सुखवीर सिंह, विजय वीर सिंह, रामचंद्र, दोदराम कुशवाहा आदि इस बात से बेहद खफा हैं कि प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और सांसद अरुण सागर एक कार्यक्रम में शामिल होकर कलान से लौट गए, लेकिन क्षेत्र मेें बाढ़ पीड़ितों की दिक्कतें समझने की जरूरत नहीं समझी।
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