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गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य तेज, यूपीडा के अधिकारियों ने सुनीं समस्याएं
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जलालाबाद के गांव कलक्टरगंज में जनसुनवाई करते यूपीडा के राजस्व अधिकारी ओमकार नाथ वर्मा । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
जलालाबाद। मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले एक्सप्रेस-वे के 18 दिसंबर को प्रस्तावित शिलान्यास कार्यक्रम के चलते जमीन की खरीद का काम शतप्रतिशत पूरा करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के अधिकारियों ने कई गांवों में विवादित जमीनों के मामलों के निपटारे के लिए जनसुनवाई की। इस दौरान एसडीएम व तहसीलदार भी मौजूद रहे। हालांकि कुछ किसानों ने समस्याओं का निस्तारण न होने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन भी किया।
गंगा एक्सप्रेस-वे जनपद के 41 गांवों से होकर गुजरेगा, जिनमें सदर के छह, तिलहर के आठ तथा जलालाबाद तहसील के सर्वाधिक 27 गांव शामिल हैं। इन सभी गांवों में पिछले कई महीनों से सहमति के आधार पर मालिकों से उनकी जमीन का बैनामा करवाया जा रहा है। जलालाबाद में 91.1 प्रतिशत जमीनों के बैनामे कराए जा चुके हैं। शेष बचे बैनामे जमीनों के चल रहे विवादों के चलते अभी तक नहीं हो सके है। 22 गांवों में 36 हेक्टेयर जमीन का बैनामा विवाद के कारण नहीं हो सका है। सबसे ज्यादा 10 हेक्टेयर जमीन गांव गुलड़िया की शामिल है।
करनापुर और उजेरा दो ऐसे गांव है जहां जमीन खरीद शतप्रतिशत है। इसके अलावा इस प्रक्रिया में शामिल हैजनरे, चौकी आजमपुर व नगला ताल्लुके खंडहर गांवों का प्रकाशन देर से होने के कारण यहां जनसुनवाई कुछ दिन बाद होगी। मंगलवार को विवादित जमीनों के निपटारे के लिए यूपीडा के राजस्व अधिकारी ओमकार नाथ वर्मा व इरफान उल्ला खां की अध्यक्षता में गांव कलक्टरगंज, चौरा खुर्द व बिरियाकलां गांव स्थित प्राथमिक विद्यालयों में जनसुनवाई की गई। इस दौरान यूपीडा के शोध सहायक अमित कुमार व अतुल श्रीवास्तव के अलावा एसडीएम बरखा सिंह व तहसीलदार चमन सिंह मौजूद रहे।
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जिन गांवों में विवाद या किसी अन्य कारण के चलते जमीन खरीद का कार्य पूरा नहीं हो सका है, वहां जनसुनवाई के जरिये मामला निपटाने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद भी जो जमीन अवशेष रह जाएगी उसका अधिग्रहण कर लिया जाएगा। हालांकि उस जमीन का पैसा डीएम के खाते में जमा कर दिया जाएगा। विवाद के निपटारे के बाद संबंधित को जमीन के अनुरूप भुगतान कर दिया जाएगा। जनपद में 94 प्रतिशत सहमति के आधार पर बैनामे कराए जा चुके हैं।
- इरफान उल्ला खां, राजस्व अधिकारी, यूपीडा
गुलड़िया गांव के पास बनेगा इंटरचेंज
इस जनपद में एक्सप्रेसवे पर वाहनों के चढ़ने-उतरने के लिए (इंटरचेंज) गांव गुलड़िया में बनेगा। यह गांव जलालाबाद से करीब तीन किलोमीटर दूर शाहजहांपुर रोड के किनारे है। इरफान उल्ला ने बताया कि इसके लिए अतिरिक्त जमीन की व्यवस्था की गई है। इंटरचेंज बनने से यहां के लोगो को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचेगा। उन्हें एक्सप्रेस-वे से कहीं जाने के लिए अतिरिक्त दूरी भी नहीं तय करनी होगी। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने का लाभ भी क्षेत्रीय जनता को मिलेगा।
ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
गांव कलक्टरगंज में यूपीडा के अधिकारियों द्वारा की गई जनसुनवाई में किसी भी समस्या का निस्तारण न करने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में ही प्रदर्शन कर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारी शाहजहांपुर रोड पर स्थित विश्रामनगर गांव के थे। यहां के शेरबहादुर, धमदेवी, महेश, रामसेवक, मदनपाल, रोशनलाल, श्रीपाल, जगदीश आदि का कहना था कि उनमें से कई लोगों के आवासीय मकान या रोड किनारे के प्लॉट एक्सप्रेस-वे में जा रहे हैं जबकि उनको मुआवजा कृषि भूमि का दिया जा रहा है।
कुछ लोगों ने बताया कि उनकी जमीन फंस रही है, लेकिन लेखपाल द्वारा बैनामा कराने में आनाकानी की जा रही है। लोगों का कहना है कि जनसुनवाई में उनके निस्तारण की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक्सप्रेसवे से जो इंटरचेंज बनना प्रस्तावित है, उसमें विश्रामनगर की भी काफी जमीन आ रही है और यहां सड़क किनारे होने के कारण यहां ज्यादातर आवास बने है या प्लाट पड़े हुए है।
कोई शिकायत नहीं आई
जैतीपुर। गढ़िया रंगीन में लोक सुनवाई का आयोजन तिलहर उप जिला अधिकारी हिमांशु उपाध्याय की अध्यक्षता में हुआ। तहसीलदार तृप्ति गुप्ता व ग्राम प्रधान लालू प्रसाद प्रजापति भी मौजूद रहे। मंगलवार को यूपीडा के भूवर्धन अधिकारी डॉ. केएस वर्मा ने किसानों से उनके सुझाव मांगे। लोक सुनवाई में किसानों ने मांग रखी कि एक्सप्रेस-वे किनारे आने वाले गांवों के लिंक मार्ग बनाए जाएं।
डॉ. केएस वर्मा ने किसानों से कार्य में सहयोग करने की अपील करते हुए उनके सुझाव भी शामिल करने का आश्वासन दिया। तहसीलदार तिलहर तृप्ति गुप्ता ने एक्सप्रेस-वे से होने वाले फायदे के विषय में किसानों को अवगत कराया है। जिन किसानों का मुआवजा अब तक नहीं मिल सका है, उन्हें जल्द ही दिलाने का आश्वासन दिया। घसा कल्याणपुर, खिरिया रतन, धारामघसा, खमरिया, रामपुरकलां गांव की जमीन एक्सप्रेस वे में आ रही हैं।
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गंगा एक्सप्रेस-वे जनपद के 41 गांवों से होकर गुजरेगा, जिनमें सदर के छह, तिलहर के आठ तथा जलालाबाद तहसील के सर्वाधिक 27 गांव शामिल हैं। इन सभी गांवों में पिछले कई महीनों से सहमति के आधार पर मालिकों से उनकी जमीन का बैनामा करवाया जा रहा है। जलालाबाद में 91.1 प्रतिशत जमीनों के बैनामे कराए जा चुके हैं। शेष बचे बैनामे जमीनों के चल रहे विवादों के चलते अभी तक नहीं हो सके है। 22 गांवों में 36 हेक्टेयर जमीन का बैनामा विवाद के कारण नहीं हो सका है। सबसे ज्यादा 10 हेक्टेयर जमीन गांव गुलड़िया की शामिल है।
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करनापुर और उजेरा दो ऐसे गांव है जहां जमीन खरीद शतप्रतिशत है। इसके अलावा इस प्रक्रिया में शामिल हैजनरे, चौकी आजमपुर व नगला ताल्लुके खंडहर गांवों का प्रकाशन देर से होने के कारण यहां जनसुनवाई कुछ दिन बाद होगी। मंगलवार को विवादित जमीनों के निपटारे के लिए यूपीडा के राजस्व अधिकारी ओमकार नाथ वर्मा व इरफान उल्ला खां की अध्यक्षता में गांव कलक्टरगंज, चौरा खुर्द व बिरियाकलां गांव स्थित प्राथमिक विद्यालयों में जनसुनवाई की गई। इस दौरान यूपीडा के शोध सहायक अमित कुमार व अतुल श्रीवास्तव के अलावा एसडीएम बरखा सिंह व तहसीलदार चमन सिंह मौजूद रहे।
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जिन गांवों में विवाद या किसी अन्य कारण के चलते जमीन खरीद का कार्य पूरा नहीं हो सका है, वहां जनसुनवाई के जरिये मामला निपटाने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद भी जो जमीन अवशेष रह जाएगी उसका अधिग्रहण कर लिया जाएगा। हालांकि उस जमीन का पैसा डीएम के खाते में जमा कर दिया जाएगा। विवाद के निपटारे के बाद संबंधित को जमीन के अनुरूप भुगतान कर दिया जाएगा। जनपद में 94 प्रतिशत सहमति के आधार पर बैनामे कराए जा चुके हैं।
- इरफान उल्ला खां, राजस्व अधिकारी, यूपीडा
गुलड़िया गांव के पास बनेगा इंटरचेंज
इस जनपद में एक्सप्रेसवे पर वाहनों के चढ़ने-उतरने के लिए (इंटरचेंज) गांव गुलड़िया में बनेगा। यह गांव जलालाबाद से करीब तीन किलोमीटर दूर शाहजहांपुर रोड के किनारे है। इरफान उल्ला ने बताया कि इसके लिए अतिरिक्त जमीन की व्यवस्था की गई है। इंटरचेंज बनने से यहां के लोगो को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचेगा। उन्हें एक्सप्रेस-वे से कहीं जाने के लिए अतिरिक्त दूरी भी नहीं तय करनी होगी। उन्होंने बताया कि एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने का लाभ भी क्षेत्रीय जनता को मिलेगा।
ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
गांव कलक्टरगंज में यूपीडा के अधिकारियों द्वारा की गई जनसुनवाई में किसी भी समस्या का निस्तारण न करने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में ही प्रदर्शन कर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारी शाहजहांपुर रोड पर स्थित विश्रामनगर गांव के थे। यहां के शेरबहादुर, धमदेवी, महेश, रामसेवक, मदनपाल, रोशनलाल, श्रीपाल, जगदीश आदि का कहना था कि उनमें से कई लोगों के आवासीय मकान या रोड किनारे के प्लॉट एक्सप्रेस-वे में जा रहे हैं जबकि उनको मुआवजा कृषि भूमि का दिया जा रहा है।
कुछ लोगों ने बताया कि उनकी जमीन फंस रही है, लेकिन लेखपाल द्वारा बैनामा कराने में आनाकानी की जा रही है। लोगों का कहना है कि जनसुनवाई में उनके निस्तारण की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। एक्सप्रेसवे से जो इंटरचेंज बनना प्रस्तावित है, उसमें विश्रामनगर की भी काफी जमीन आ रही है और यहां सड़क किनारे होने के कारण यहां ज्यादातर आवास बने है या प्लाट पड़े हुए है।
कोई शिकायत नहीं आई
जैतीपुर। गढ़िया रंगीन में लोक सुनवाई का आयोजन तिलहर उप जिला अधिकारी हिमांशु उपाध्याय की अध्यक्षता में हुआ। तहसीलदार तृप्ति गुप्ता व ग्राम प्रधान लालू प्रसाद प्रजापति भी मौजूद रहे। मंगलवार को यूपीडा के भूवर्धन अधिकारी डॉ. केएस वर्मा ने किसानों से उनके सुझाव मांगे। लोक सुनवाई में किसानों ने मांग रखी कि एक्सप्रेस-वे किनारे आने वाले गांवों के लिंक मार्ग बनाए जाएं।
डॉ. केएस वर्मा ने किसानों से कार्य में सहयोग करने की अपील करते हुए उनके सुझाव भी शामिल करने का आश्वासन दिया। तहसीलदार तिलहर तृप्ति गुप्ता ने एक्सप्रेस-वे से होने वाले फायदे के विषय में किसानों को अवगत कराया है। जिन किसानों का मुआवजा अब तक नहीं मिल सका है, उन्हें जल्द ही दिलाने का आश्वासन दिया। घसा कल्याणपुर, खिरिया रतन, धारामघसा, खमरिया, रामपुरकलां गांव की जमीन एक्सप्रेस वे में आ रही हैं।

जनसुनवाई के बाद कलक्टरगंज गांव के प्राथमिक स्कूल में प्रदर्शन करते ग्रामीण। संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR