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वायदे से मुकरा रोजा चीनी मिल प्रबंधन
रोजा।
Updated Sat, 03 Oct 2015 10:51 PM IST
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चीनी मिल का प्रबंधन क्षेत्र के किसानों और मजदूरों के हित में दिखाई नहीं दे रहा। एक सप्ताह पहले पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद से किए गए वायदे से अब वह मुकर गया है। वायदे के अनुसार मिल प्रबंधन ने न तो मिल में रिपेयरिंग का काम शुरू किया और न ही मिल बंद होने की अधिकारिक सूचना ही सरकार को दी। इसको लेकर यहां 22 दिन से अनशन पर बैठे मजदूर संगठनों में उबाल आ गया और उन्होंने जमकर नारेबाजी कर हंगामा काटा।
बता दें कि रोजा शुगर मिल में पिछले पांच साल से घाटे का दंश झेल रही थी। इसके चलते यहां के कर्मियों को घर जाने का आदेश दे दिया गया था। मिल बंद होने की आहट पाकर रोजा शुगर मिल इंप्लाइज यूनियन और रोजा शुगर मिल संघर्ष समिति पिछले 22 दिन से मिल गेट के बाहर धरने पर बैठी है।
गत 26 सितंबर को पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने मिल गेट के अनशनकारी नेताओं से बात की थी और मंच से ही कार्यकारी अध्यक्ष वीके मालपानी को बुलाकर दो टूक शब्दों में कहा था कि मिल नहीं चला सकते तो सरकार के हवाले कर दो, लेकिन उस समय मालपानी ने मंच से मजदूर संगठनों को भरोसा दिलाया था कि 27 सितंबर से मिल की रिपेयरिंग का काम शुरू हो जाएगा और तीन अक्तूबर तक मिल न चल पाने की दशा में सरकार को सूचित किया जाएगा।
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यूनियन के अध्यक्ष भगवान सिंह, महामंत्री रवींद्र शुक्ला और युवा नेता आनंद दीक्षित की अगुवाई में शनिवार की सुबह चीनी मिल गेट पर अनशनकारियों ने जमकर नारेबाजी कर हंगामा काटा। नेताओं का कहना था कि मिल प्रबंधन अपने वादे से मुकर गया। वह शासन प्रशासन को भी गुमराह कर रहा है।
यूनियन के अध्यक्ष भगवान सिंह ने कहा कि किसी कर्मचारी को ड्यूटी पर लिया है और न ही मिल बंद होने की अधिकारिक घोषणा की है इसलिए अब मिल प्रबंधन के साथ आरपार की लड़ाई होगी। प्रदर्शन करने वालों में फुरकान अहमद,सुनील सिंह, कृपाराम अवस्थी, अश्वनी कुमार द्विवेदी, राजेश गुप्ता, श्याम बाबू जयपाल, हरि सुमिरन दीक्षित, योगेश्वर, शरदवीर, राहुल पाठक, अनिल वर्मा आदि शामिल रहे।
हमने जो वायदा किया था उससे मिल मालिकानों को अवगत करा दिया था। हमारे कारपोरेट आफिस के द्वारा सरकार को पत्र भेजा गया है। उसमें क्या लिखा है हम नहीं बता सकते। कुछ दिनों में हमारे पास उसकी प्रति आ जायेगी, उसी के आधार पर हम बता सकेंगे कि मिल बंद होगी या चलेगी।
- वीके मालपानी ,कार्यकारी अध्यक्ष,रोजा चीनी मिल
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बता दें कि रोजा शुगर मिल में पिछले पांच साल से घाटे का दंश झेल रही थी। इसके चलते यहां के कर्मियों को घर जाने का आदेश दे दिया गया था। मिल बंद होने की आहट पाकर रोजा शुगर मिल इंप्लाइज यूनियन और रोजा शुगर मिल संघर्ष समिति पिछले 22 दिन से मिल गेट के बाहर धरने पर बैठी है।
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गत 26 सितंबर को पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने मिल गेट के अनशनकारी नेताओं से बात की थी और मंच से ही कार्यकारी अध्यक्ष वीके मालपानी को बुलाकर दो टूक शब्दों में कहा था कि मिल नहीं चला सकते तो सरकार के हवाले कर दो, लेकिन उस समय मालपानी ने मंच से मजदूर संगठनों को भरोसा दिलाया था कि 27 सितंबर से मिल की रिपेयरिंग का काम शुरू हो जाएगा और तीन अक्तूबर तक मिल न चल पाने की दशा में सरकार को सूचित किया जाएगा।
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यूनियन के अध्यक्ष भगवान सिंह, महामंत्री रवींद्र शुक्ला और युवा नेता आनंद दीक्षित की अगुवाई में शनिवार की सुबह चीनी मिल गेट पर अनशनकारियों ने जमकर नारेबाजी कर हंगामा काटा। नेताओं का कहना था कि मिल प्रबंधन अपने वादे से मुकर गया। वह शासन प्रशासन को भी गुमराह कर रहा है।
यूनियन के अध्यक्ष भगवान सिंह ने कहा कि किसी कर्मचारी को ड्यूटी पर लिया है और न ही मिल बंद होने की अधिकारिक घोषणा की है इसलिए अब मिल प्रबंधन के साथ आरपार की लड़ाई होगी। प्रदर्शन करने वालों में फुरकान अहमद,सुनील सिंह, कृपाराम अवस्थी, अश्वनी कुमार द्विवेदी, राजेश गुप्ता, श्याम बाबू जयपाल, हरि सुमिरन दीक्षित, योगेश्वर, शरदवीर, राहुल पाठक, अनिल वर्मा आदि शामिल रहे।
हमने जो वायदा किया था उससे मिल मालिकानों को अवगत करा दिया था। हमारे कारपोरेट आफिस के द्वारा सरकार को पत्र भेजा गया है। उसमें क्या लिखा है हम नहीं बता सकते। कुछ दिनों में हमारे पास उसकी प्रति आ जायेगी, उसी के आधार पर हम बता सकेंगे कि मिल बंद होगी या चलेगी।
- वीके मालपानी ,कार्यकारी अध्यक्ष,रोजा चीनी मिल