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फफूंद मार दवा से धान की  तीस एकड़ फसल खराब

Thu, 29 Sep 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो पुवायां।
अमर उजाला ब्यूरो पुवायां। Updated Thu, 29 Sep 2016 12:18 AM IST
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Fungal repellent paddy Thirty acres of crops
दुष्परिणाम - फोटो : अमर उजाला
- धान की आधी से ज्यादा बालियां सूखीं
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- दवा कंपनी के अधिकारियों ने किया मुआयना, लेकिन नहीं दिया संतोषजनक जवाब

 कीटनाशक, खरपतवार नाशक दवाओं पर अत्याधिक निर्भरता के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। सिंधौली के गांव रक्शा में किसान जगदेव सिंह की 19 एकड़ धान की फसल खराब होने का मामला सामने आने के बाद अब पुवायां क्षेत्र में 30 एकड़ धान की फसल खराब होने का मामला सामने आया है।
गांव रनमस्तपुर खुर्द निवासी अमनदीप सिंह ने बताया कि उनके और परिवार के लोगों के पास तीस एकड़ जमीन है। उन्होंने पूरी जमीन में धान की फसल लगा रखी है। काफी लागत के बाद धान की फसल बेहद अच्छी थी। उम्मीद थी कि बढ़िया पैदावार होने से मुनाफा भी बढ़िया होगा। उन्होंने गांव गंगसरा की एक दुकान से नामी गिरामी कंपनी की फफूंद नाशक दवा खरीदी थी और छह सितंबर को धान में इसका छिड़काव कराया था। दवा छिड़कने के तीन दिन बाद से धान की आधे से अधिक बालियां सूखने लगीं। उन्होंने दुकानदार को सूचना दी तो दवा कंपनी के वैज्ञानिकों ने खेत पर पहुंचकर मुआयना किया। 
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कंपनी के लोग अब तक चार बार फसल का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। फसल में भारी घाटे के अंदेशे से किसान के परिवार के लोग बेहद परेशान हैं। अमनदीप ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत कृषि विभाग के अधिकारियों से करने के साथ ही दुकानदार पर उपभोक्ता फोरम में केस करने के लिए नोटिस भिजवाया है।
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