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प्राइमरी पास बबली से पोस्ट ग्रेजुएट आभा हारीं
शाहजहांपुर।
Updated Tue, 03 Nov 2015 12:15 AM IST
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बात किसी प्रतियोगी परीक्षा की हो तो योग्यता और अनुभव का आकलन प्रतिभागी की शैक्षिक उपलब्धियों तथा आयु से किया जाता है। इस लिहाज से जिला पंचायत के कई वार्डों के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले रहे। नतीजे घोषित होने पर विजेता और पराजित प्रत्याशियों की उम्र और शिक्षा से जुड़े कई रोचक तथ्य सामने आए। उदाहरणार्थ, कहीं 22 साल की युवा प्रत्याशी ने 81 साल की बूढ़ी अम्मा को सियासत के मैदान में आउट कर दिया, तो कहीं प्राइमरी पास उम्मीदवार ने पोस्ट ग्रेजुएट को भारी मतों के अंतर से हरा दिया।
वार्ड 12 सिंधौली तृतीय से चुनाव जीतने वाली बबली देवी की शैक्षिक योग्यता केवल प्राइमरी क्लास तक सीमित है, लेकिन चुनाव मैदान में उन्होंने एमए तक शिक्षित आभा यादव को 3387 वोटों के भारी अंतर से हराकर साबित कर दिया कि सियासत में तालीम कोई खास अहमियत नहीं रखती। वार्ड 21 तिलहर द्वितीय के चुनाव नतीजे भी इसी फलसफे को सच साबित करते हैं। वहां आठवीं पास बहोरन लाल ने पोस्ट ग्रेजुएट सुभाष चंद्र को 1630 वोटों के अंतर से पछाड़ दिया।
इसी कतार में वार्ड 29 मिर्जापुर प्रथम से चुनाव जीते देवेंद्र पाल को भी शामिल किया जा सकता है। देवेंद्र इंटरमीडिएट उत्तीर्ण हैं, लेकिन चुनावी समर में एमए तक शिक्षित रवीश पाल सिंह को पराजय का सामना करने को विवश कर दिया। बात आयु की करें तो भी उम्रदराजी पर आधारित अनुभव चुनाव में काम नहीं आया। वार्ड संख्या 30 मिर्जापुर द्वितीय से चुनाव जीतने वाली पोस्ट ग्रेजुएट प्रियंका प्रमाण हैं। उनकी उम्र महज 22 साल है, लेकिन चुनाव मैदान में डटीं 81 साल की बुजुर्ग जरीना समेत 24 प्रत्याशियों को पीछे छोड़कर जिला पंचायत बोर्ड में अपनी पैठ बनाने में कामयाब रहीं।
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वार्ड 12 सिंधौली तृतीय से चुनाव जीतने वाली बबली देवी की शैक्षिक योग्यता केवल प्राइमरी क्लास तक सीमित है, लेकिन चुनाव मैदान में उन्होंने एमए तक शिक्षित आभा यादव को 3387 वोटों के भारी अंतर से हराकर साबित कर दिया कि सियासत में तालीम कोई खास अहमियत नहीं रखती। वार्ड 21 तिलहर द्वितीय के चुनाव नतीजे भी इसी फलसफे को सच साबित करते हैं। वहां आठवीं पास बहोरन लाल ने पोस्ट ग्रेजुएट सुभाष चंद्र को 1630 वोटों के अंतर से पछाड़ दिया।
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इसी कतार में वार्ड 29 मिर्जापुर प्रथम से चुनाव जीते देवेंद्र पाल को भी शामिल किया जा सकता है। देवेंद्र इंटरमीडिएट उत्तीर्ण हैं, लेकिन चुनावी समर में एमए तक शिक्षित रवीश पाल सिंह को पराजय का सामना करने को विवश कर दिया। बात आयु की करें तो भी उम्रदराजी पर आधारित अनुभव चुनाव में काम नहीं आया। वार्ड संख्या 30 मिर्जापुर द्वितीय से चुनाव जीतने वाली पोस्ट ग्रेजुएट प्रियंका प्रमाण हैं। उनकी उम्र महज 22 साल है, लेकिन चुनाव मैदान में डटीं 81 साल की बुजुर्ग जरीना समेत 24 प्रत्याशियों को पीछे छोड़कर जिला पंचायत बोर्ड में अपनी पैठ बनाने में कामयाब रहीं।
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