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बाढ़ का पानी उतरने के बाद दिखने लगा फसलों की बरबादी का मंजर

Fri, 06 Aug 2021 12:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 06 Aug 2021 12:52 AM IST
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परौर क्षेत्र में कटान करती रामगंगा। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। बैराज से पानी की निकासी कम होने से बाढ़ से उफनाई गंगा का जलस्तर कम होने लगा है। उधर, परौर से लेकर अल्हागंज क्षेत्र तक रामगंगा पहले से उतार पर है, लेकिन दोनों नदियों में पानी घटने के साथ ही तटवर्ती खेतों में लंबे समय तक डूबी रही खरीफ की सैकड़ों बीघा फसलें खराब हो गईं हैं।
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष को मिली सूचना के अनुसार नरौरा बैराज से गंगा में पानी की निकासी कम रही है। इसीलिए कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर लगातार दूसरे दिन नौ सेमी कम होकर 143.40 मीटर हो रहा। इसी तरह रामगंगा में इन बैराजों से सिर्फ 11526 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे चौबारी घाट से लेकर जिले के जैतीपुर और परौर क्षेत्र तक रामगंगा छह सेमी घट गया।
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मिर्जापुर क्षेत्र में बाढ़ घटने से सड़कों पर पानी कम होने लगा है। यही नहीं गांव आजादनगर के घरों से भी बाढ़ का पानी निकलने लगा है, लेकिन कई दिन तक डूबी रहीं खरीफ फसलें नष्ट होने से किसान परेशान हैं। आजाद नगर के सत्तार ने बताया कि चौंरा-कमथरी और जलालाबाद-ढाईघाट मार्ग पर बाढ़ का पानी कम हुआ है, लेकिन इस्लामनगर-आजादनगर के कच्चे रास्ते में पानी भरा होने से आवागमन ठप है।
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उन्होंने बताया कि दस दिन से बाढ़ में डूबी रहीं उर्द, तिल, ज्वार, बाजरा, मक्का आदि फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं, लेकिन गन्ने की फसल सुरक्षित है।
पैलानी उत्तरी की प्रधान मोईन बेगम के पति फारुक अली, समाजसेवी रिजवान अहमद, सत्तार, खलील, नदीम, बुधुआ, इशहाक आदि ने डीएम और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से बाढ़ से नष्ट फसलों की भरपाई कराने और सुरक्षित आवागमन के लिए गांव के कच्चे रास्ते को पक्का बनवाने की गुहार लगाई है।
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परेशान किसानों ने कहा-मदद मिले
परौर। रामगंगा के जलस्तर में दस दिन से कमी आने से भूमि कटान तो कम हो गया, लेकिन अब फसलें खराब होने से किसान बहुत परेशान हैं। इस वर्ष क्षेत्र के अधिकर किसानों ने तिल के अलावा ज्वार, बाजरा, मक्का आदि की बुआई की, लेकिन फसलेें चौपट होने से अब उनकी लागत मिलना भी कठिन है। क्षेत्र के सुखपाल सिंह गुर्जर, ओमपाल सिंह, अरविंद कुशवाहा, नत्थू लाल कश्यप, धनपाल सिंह आदि ने अधिकारियों से मदद दिलाने की गुहार लगाई है।
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बाढ़पीड़ित किसानों की बात
अधिकतर खेतों की फसलें चौपट हो गईं हैं। रामगंगा में जमीनें कटने से किसानों को दोहरा नुकसान हुआ, इसलिए उन्हें शासन-प्रशासन से तत्काल मुआवजा मिलना चाहिए।
-तरनवीर गुर्जर, मंझा (परौर)
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एक तरफ जमीन कटने से भारी नुकसान हुआ। वहीं अब पानी मेें डूबीं फसलें बरबाद होने से किसान कहीं का नहीं रहा। मदद नहीं मिली तो किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे।
-सत्यपाल सिंह उर्फ कल्लू, मोहनपुर
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रामगंगा ने इस बार भीषण तबाही मचाई। रामगंगा के पार मैंने अपने खेत में तिल, शकरकंद, बाजरा आदि की फसलें बोई थीं, लेकिन आज खेत पर जाकर देखा तो फसलें सिल्ट जमा होने से मुरझाई मिलीं।

-कृष्ण पाल, हैदरपुर
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जिन किसानों ने कृषि ऋण लिया है, उनकी फसलें पहले से बीमित हैं और उन्हें फसल बीमा योजना के तहत संबंधित कंपनी क्षतिपूर्ति कराएगी। अन्य किसानों की खराब हुई फसलों अथवा बाढ़ में कटी जमीनों का सर्वे कराया जा रहा है। चूंकि, अभी मानसून सीजन चल रहा है और बारिश का दौर अगले कुछ दिन तक जारी रहने के आसार हैं। इसलिए फसली नुकसान का सर्वे चालू माह के अंत तक जारी रहेगा और उसके बाद प्रभावित किसानों को शासन के निर्देशानुसार दैवीय आपदा राहत प्रकोष्ठ से उचित आर्थिक मदद दिलाई जाएगी।
-रमेश बाबू, एसडीएम, कलान
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