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गंगा का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण भयभीत, कृषि भूमि का कटान कर रही रामगंगा
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मिर्जापुर के ग्राम पहरुआ में कटान करती रामगंगा। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रही भारी वर्षा के कारण बांधों और बैराजों से पानी की निकासी बढ़ने लगी है। हालांकि, रामगंगा में बीते 24 घंटे की तुलना में जलस्तर 20 सेमी कम हो गया, लेकिन जैतीपुर से लेकर परौर क्षेत्र के तटवर्ती गांवों तक नदी कृषि भूमि तेजी से काट रही है। उधर, कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर बृहस्पतिवार को लगातार पांचवें दिन बढ़ने से तटवर्ती गांवों के ग्रामीण बाढ़ की आशंका को लेकर भयभीत हैं।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि आज सुबह नरौरा से गंगा में 63231 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ है। पानी की यह मात्रा बीते दिन से करीब 12000 क्यूसेक अधिक होने से शुक्रवार को भी गंगा में उफान बने रहने के संकेत हैं।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर बीते दिन की तुलना में 11 सेमी बढ़कर 142.88 मीटर हो गया है। उधर, रामगंगा में खो, हरेली, किच्छा, रामनगर और कालागढ़ बैराजों से कुल 16173 क्यूसेक पानी की निकासी हो रही है। फिलहाल, बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा 20 सेमी घटकर 159.50 मीटर पर बह रही है, लेकिन नदी में पानी कम होने के साथ भूमि कटान की समस्या बढ़ रही है।
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ड्यूनी डाम से पानी की निकासी बंद हो जाने से शहर के समीप गर्रा भी तेजी से उतार पर है और उसका जलस्तर 70 सेमी घटकर 145 मीटर हो गया है। खन्नौत 15 सेमी उतरकर 143.30 मीटर पर बह रही है।
गंगा में पानी बढ़ने से ढाईघाट से लेकर मिर्जापुर तक ढाई, आजादनगर, इस्लामनगर, कमतरी, चितार आदि तटवर्ती गांवों के ग्रामीण घरों से विस्थापन को लेकर चिंतित हैं। उधर, रामगंगा के कटान से पहरुआ, मौजमपुर, परौर के मजरा मोहनपुर, नारायणनगर पश्चिमी आदि गांव प्रभावित हैं। सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार नदी उतार पर होने की दशा में पानी का बहाव तेज हो जाता है और इसीलिए किनारों पर भूमि कटान की समस्या बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को बैराजों से पानी की निकासी बढ़ी है और बारिश भी हो रही है। इसलिए रामगंगा भी शुक्रवार को बढ़ सकती है। उनका कहना है कि मैदानी क्षेत्रों में हो रही वर्षा को देखते हुए नदियों में पानी का बहाव अगले कुछ दिन तक असामान्य बने रहने के आसार हैं।
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केसीनगला में भूमि कटान से किसानों में दहशत
जैतीपुर। रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के गांव केसीनगला के ग्रामीण भूमि कटान की समस्या से जूझ रहे हैं। चूंकि, नदी काफी तेजी से कटान कर रही है, इसलिए ग्रामीणों में खेती की जमीनें नदी में समाने से दहशत का माहौल है। केसीनगला गांव में नदी की तेज धार किनारे की जमीनें काट रही है। किसान खेतों पर भी नहीं जा पा रहे हैं। इससे जानवरों के चारे को लेकर ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भूमि कटान की समस्या से निजात पाने के लिए ग्रामीण अधिकारियों से भी गुहार लगा चुके लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
तिलहर के एसडीएम सुरेंद्र कुमार के अनुसार केसीनगला गांव कर्मचारियों को भेजकर कटान की स्थिति को दिखाया जाएगा और अगर कोई समस्या उत्पन्न हो रही है तो उसके समाधान को जरूरी व्यवस्था की जाएगी। संवाद
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गर्रा के तटवर्ती इलाकों का अधिकारियों ने किया निरीक्षण
तिलहर। गर्रा नदी के कटान से बीते दिन क्षेत्र के गांव चितीवोझी घनश्यामपुर में तीन मकान नदी में समा जाने और अन्य परिवारों को खतरा होने की आशंका को देखते बृहस्पतिवार को एसडीएम सुरेंद्र सिंह और सीओ परमानंद पांडेय ने गांव में नदी के किनारे पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ितों से हालचाल पूछते हुए उन्हेें नदी के बहाव से दूर रहने की सलाह दी। इस बीच, एसडीएम ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर नदी के तटबंध मजबूत कराने के निर्देश दिए।
बता देें कि गांव चितीवोझी घनश्यामपुर के उत्तर दिशा में गर्रा नदी के कटान से गांव के सोनपाल, रामचंद्र और राजेंद्र के मकान नदी में समा चुके है। नदी के किनारे बसे तमाम लोग अपने मकानों को खाली करके तथा उनका मलबा हटाकर अन्यत्र ले जाने में जुटे हैं। कटान की सूचना पर बीते दिन नायब तहसीलदार भानु प्रताप और लेखपाल रमेश चंद शर्मा अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे और पीड़ितों से संपर्क करके उनके नुकसान का ब्यौरा लिया। तमाम पीड़ितों को गांव के प्राइमरी स्कूल में शरण दिलाई गई है। एसडीएम ने बताया कि प्राइमरी स्कूल में रह रहे परिवारों को राशन मुहैया कराने के साथ अन्य आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गर्रा में पानी कम हो गया है, लेकिन जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को तटबंध मजबूत कराने के निर्देश दिए गए हैं। गांव में अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि के नहीं पहुंचने से ग्रामीण खासे नाराज हैं। गांव के रजत, रामस्वरूप आदि ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव होता तो वोट मांगने नेता नाव पर बैठकर चले आते, लेकिन इस मुसीबत में कोई भी जनप्रतिनिधि उनकी परवाह नहीं कर रहा है। संवाद
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बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की बात
कटान होने से जमीन रामगंगा में समा रही हैं। हर वर्ष मानसून सीजन में नदी से भूमि कटान होता है, लेकिन समस्या बताने पर भी कोई अधिकारी नहीं सुनता।
-रतिराम, केसीनगला (जैतीपुर)
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रामगंगा की धारा फैलाव लेकर गांव के नजदीक आने से अब बाढ़ से गांव के घिरने का खतरा है। बच्चों का नदी की ओर जाना खतरे से खाली नहीं लग रहा है। कई परिवार बेहद चिंतित हैं।
-अनिल निवासी, केसी नगला (जैतीपुर)
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि आज सुबह नरौरा से गंगा में 63231 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ है। पानी की यह मात्रा बीते दिन से करीब 12000 क्यूसेक अधिक होने से शुक्रवार को भी गंगा में उफान बने रहने के संकेत हैं।
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर बीते दिन की तुलना में 11 सेमी बढ़कर 142.88 मीटर हो गया है। उधर, रामगंगा में खो, हरेली, किच्छा, रामनगर और कालागढ़ बैराजों से कुल 16173 क्यूसेक पानी की निकासी हो रही है। फिलहाल, बरेली के चौबारी घाट पर रामगंगा 20 सेमी घटकर 159.50 मीटर पर बह रही है, लेकिन नदी में पानी कम होने के साथ भूमि कटान की समस्या बढ़ रही है।
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ड्यूनी डाम से पानी की निकासी बंद हो जाने से शहर के समीप गर्रा भी तेजी से उतार पर है और उसका जलस्तर 70 सेमी घटकर 145 मीटर हो गया है। खन्नौत 15 सेमी उतरकर 143.30 मीटर पर बह रही है।
गंगा में पानी बढ़ने से ढाईघाट से लेकर मिर्जापुर तक ढाई, आजादनगर, इस्लामनगर, कमतरी, चितार आदि तटवर्ती गांवों के ग्रामीण घरों से विस्थापन को लेकर चिंतित हैं। उधर, रामगंगा के कटान से पहरुआ, मौजमपुर, परौर के मजरा मोहनपुर, नारायणनगर पश्चिमी आदि गांव प्रभावित हैं। सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार नदी उतार पर होने की दशा में पानी का बहाव तेज हो जाता है और इसीलिए किनारों पर भूमि कटान की समस्या बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को बैराजों से पानी की निकासी बढ़ी है और बारिश भी हो रही है। इसलिए रामगंगा भी शुक्रवार को बढ़ सकती है। उनका कहना है कि मैदानी क्षेत्रों में हो रही वर्षा को देखते हुए नदियों में पानी का बहाव अगले कुछ दिन तक असामान्य बने रहने के आसार हैं।
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केसीनगला में भूमि कटान से किसानों में दहशत
जैतीपुर। रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के गांव केसीनगला के ग्रामीण भूमि कटान की समस्या से जूझ रहे हैं। चूंकि, नदी काफी तेजी से कटान कर रही है, इसलिए ग्रामीणों में खेती की जमीनें नदी में समाने से दहशत का माहौल है। केसीनगला गांव में नदी की तेज धार किनारे की जमीनें काट रही है। किसान खेतों पर भी नहीं जा पा रहे हैं। इससे जानवरों के चारे को लेकर ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भूमि कटान की समस्या से निजात पाने के लिए ग्रामीण अधिकारियों से भी गुहार लगा चुके लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
तिलहर के एसडीएम सुरेंद्र कुमार के अनुसार केसीनगला गांव कर्मचारियों को भेजकर कटान की स्थिति को दिखाया जाएगा और अगर कोई समस्या उत्पन्न हो रही है तो उसके समाधान को जरूरी व्यवस्था की जाएगी। संवाद
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गर्रा के तटवर्ती इलाकों का अधिकारियों ने किया निरीक्षण
तिलहर। गर्रा नदी के कटान से बीते दिन क्षेत्र के गांव चितीवोझी घनश्यामपुर में तीन मकान नदी में समा जाने और अन्य परिवारों को खतरा होने की आशंका को देखते बृहस्पतिवार को एसडीएम सुरेंद्र सिंह और सीओ परमानंद पांडेय ने गांव में नदी के किनारे पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ितों से हालचाल पूछते हुए उन्हेें नदी के बहाव से दूर रहने की सलाह दी। इस बीच, एसडीएम ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर नदी के तटबंध मजबूत कराने के निर्देश दिए।
बता देें कि गांव चितीवोझी घनश्यामपुर के उत्तर दिशा में गर्रा नदी के कटान से गांव के सोनपाल, रामचंद्र और राजेंद्र के मकान नदी में समा चुके है। नदी के किनारे बसे तमाम लोग अपने मकानों को खाली करके तथा उनका मलबा हटाकर अन्यत्र ले जाने में जुटे हैं। कटान की सूचना पर बीते दिन नायब तहसीलदार भानु प्रताप और लेखपाल रमेश चंद शर्मा अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे और पीड़ितों से संपर्क करके उनके नुकसान का ब्यौरा लिया। तमाम पीड़ितों को गांव के प्राइमरी स्कूल में शरण दिलाई गई है। एसडीएम ने बताया कि प्राइमरी स्कूल में रह रहे परिवारों को राशन मुहैया कराने के साथ अन्य आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गर्रा में पानी कम हो गया है, लेकिन जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता को तटबंध मजबूत कराने के निर्देश दिए गए हैं। गांव में अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि के नहीं पहुंचने से ग्रामीण खासे नाराज हैं। गांव के रजत, रामस्वरूप आदि ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव होता तो वोट मांगने नेता नाव पर बैठकर चले आते, लेकिन इस मुसीबत में कोई भी जनप्रतिनिधि उनकी परवाह नहीं कर रहा है। संवाद
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बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की बात
कटान होने से जमीन रामगंगा में समा रही हैं। हर वर्ष मानसून सीजन में नदी से भूमि कटान होता है, लेकिन समस्या बताने पर भी कोई अधिकारी नहीं सुनता।
-रतिराम, केसीनगला (जैतीपुर)
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रामगंगा की धारा फैलाव लेकर गांव के नजदीक आने से अब बाढ़ से गांव के घिरने का खतरा है। बच्चों का नदी की ओर जाना खतरे से खाली नहीं लग रहा है। कई परिवार बेहद चिंतित हैं।
-अनिल निवासी, केसी नगला (जैतीपुर)