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शासन स्तर पर अटके गर्रा में बाढ़ से बचाव के प्रस्ताव
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-शाहजहांपुर में ददरौल ब्लॉक के भरगवां गांव के समीप गर्रा की बाढ़ से हुआ कटान। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। गर्रा नदी की बाढ़ से खुदागंज क्षेत्र के गांवों को भूमि कटान से बचाने के लिए बाढ़ से बचाव की चार नई परियोजनाओं पर भी काम तेजी से चल रहा है, लेकिन ददरौल और भावलखेड़ा ब्लाक के गर्रा-खन्नौत नदियों के किनारे बसे गांवों को बाढ़ से बचाने के अभी तक कोई इंतजाम नहीं किए हैं।
कांट-भरगवां मार्ग समेत अन्य कई मार्गों और गांवों के आबादी क्षेत्र को कटान से बचाने के लिए क्षेत्रीय विधायक मानवेंद्र सिंह के प्रयास से बाढ़ से बचाव संबंधी दो परियोजनाओं के प्रस्ताव चार वर्ष पूर्व शासन को भेजे गए, लेकिन उन्हें मंजूरी नही मिल सकी।
ठोकरें जल्द बनवाने की मांग
ददरौल। मानसून नजदीक आ चुका है, लेकिन क्षेत्र के गांव ऊधौपारा से लेकर अन्य तमाम गांवों को गर्रा व खन्नौत नदी के कटान से बचाने के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की गई है। शहबाजपुर गांव के पास दोनों नदी एक में मिल जाने के कारण वहां बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर दोगुना हो जाता है। कटान से क्षेत्र के गांव भरगवां, पतेल गौटिया, शहबाजपुर के सैकड़ों घर नदी में बह चुके हैं। इन गांवों के रामकुमार वर्मा, प्रधान रामसेवक वर्मा, धर्मेंद्र वर्मा, हरीशंकर त्रिपाठी, सचिन श्रीवास्तव, सत्यपाल सागर, परमवीर कनौजिया आदि ने बाढ़ से बचाव को ठोकरें जल्द बनवाने की मांग दोहराई है। संवाद
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जल शक्ति मंत्री से विधायक ने किया पत्राचार
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को ददरौल विधायक मानवेंद्र सिंह ने पत्र देकर कहा है कि शहबाजपुर संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुका है और वहां का उच्च प्राथमिक विद्यालय भी कटान के करीब आ चुका है। यही नहीं, सरौरा में प्राथमिक स्कूल परिसर और शौचालय कटान में मिट चुका है और अब इसी गांव के प्राचीन शिव मंदिर, मौजमपुर पंप कैनाल और नदी के समानान्तर भरगवां मार्ग भी खतरे में है। क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण की दो परियोजनाओं के प्रस्ताव सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को भेजे जा चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी स्वीकृति नहीं मिली है।
जल्द शुरू होंगे आवश्यक कार्य
ददरौल क्षेत्र के गांवों को कटान से बचाने के लिए दो परियोजनाओं के प्रस्ताव कुछ वर्ष पहले सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता आरके वर्मा के स्तर से शासन को भेजे गए थे। मैंने दनियापुर और धन्यौरा गांव में ठोकरें बनवाने की सिफारिश की थी। तब से सरौरा गांव के पास बाढ़ से बचाव को थोड़ा काम हुआ, लेकिन गर्रा के अन्य तटीय गांव अभी बाढ़ से असुरक्षित हैं। जल्द ही आवश्यक कार्य शुरू होंगे। -मानवेंद्र सिंह, विधायक, ददरौल विधानसभा क्षेत्र
टेंडर प्रक्रिया दोषपूर्ण तरीके से अपनाई
बाढ़ प्रभावित गांव मई खुर्द कलां में बाढ़ से बचाव की परियोजना पर काम शुरू हुआ है, लेकिन यह संतोषजनक नहीं है। टेंडर की प्रक्रिया दोषपूर्ण तरीके से अपनाई गई। सिंचाई विभाग ने ठोकरें बनाने को जिस कंपनी का चयन कार्यदायी संस्था के तौर पर किया है, वह सही तरीके से कार्य नहीं कर रही है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन को भी अवगत करा दिया है कि ठोकरें बनने के बाद बाढ़ से होने वाली क्षति के लिए कार्यदायी संस्था जिम्मेदार होगी। -हरिप्रकाश वर्मा, विधायक, जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र
ददरौल क्षेत्र में बाढ़ से बचाव संबंधी दो प्रस्ताव वर्ष 2018 में भेजे गए थे, जो शासन स्तर पर लंबित हैं। विधायक से वार्ता करने के बाद उनके क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया है। उच्चाधिकारियों से भी मार्गदर्शन लिया है। मानसून सीजन खत्म होने और नदियां उतार पर आने के बाद लखनऊ में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में बाढ़ नियंत्रण की लंबित परियोजनाओं पर निर्णय हो सकेगा।
-सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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कांट-भरगवां मार्ग समेत अन्य कई मार्गों और गांवों के आबादी क्षेत्र को कटान से बचाने के लिए क्षेत्रीय विधायक मानवेंद्र सिंह के प्रयास से बाढ़ से बचाव संबंधी दो परियोजनाओं के प्रस्ताव चार वर्ष पूर्व शासन को भेजे गए, लेकिन उन्हें मंजूरी नही मिल सकी।
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ठोकरें जल्द बनवाने की मांग
ददरौल। मानसून नजदीक आ चुका है, लेकिन क्षेत्र के गांव ऊधौपारा से लेकर अन्य तमाम गांवों को गर्रा व खन्नौत नदी के कटान से बचाने के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की गई है। शहबाजपुर गांव के पास दोनों नदी एक में मिल जाने के कारण वहां बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर दोगुना हो जाता है। कटान से क्षेत्र के गांव भरगवां, पतेल गौटिया, शहबाजपुर के सैकड़ों घर नदी में बह चुके हैं। इन गांवों के रामकुमार वर्मा, प्रधान रामसेवक वर्मा, धर्मेंद्र वर्मा, हरीशंकर त्रिपाठी, सचिन श्रीवास्तव, सत्यपाल सागर, परमवीर कनौजिया आदि ने बाढ़ से बचाव को ठोकरें जल्द बनवाने की मांग दोहराई है। संवाद
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जल शक्ति मंत्री से विधायक ने किया पत्राचार
जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को ददरौल विधायक मानवेंद्र सिंह ने पत्र देकर कहा है कि शहबाजपुर संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुका है और वहां का उच्च प्राथमिक विद्यालय भी कटान के करीब आ चुका है। यही नहीं, सरौरा में प्राथमिक स्कूल परिसर और शौचालय कटान में मिट चुका है और अब इसी गांव के प्राचीन शिव मंदिर, मौजमपुर पंप कैनाल और नदी के समानान्तर भरगवां मार्ग भी खतरे में है। क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण की दो परियोजनाओं के प्रस्ताव सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव को भेजे जा चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी स्वीकृति नहीं मिली है।
जल्द शुरू होंगे आवश्यक कार्य
ददरौल क्षेत्र के गांवों को कटान से बचाने के लिए दो परियोजनाओं के प्रस्ताव कुछ वर्ष पहले सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता आरके वर्मा के स्तर से शासन को भेजे गए थे। मैंने दनियापुर और धन्यौरा गांव में ठोकरें बनवाने की सिफारिश की थी। तब से सरौरा गांव के पास बाढ़ से बचाव को थोड़ा काम हुआ, लेकिन गर्रा के अन्य तटीय गांव अभी बाढ़ से असुरक्षित हैं। जल्द ही आवश्यक कार्य शुरू होंगे। -मानवेंद्र सिंह, विधायक, ददरौल विधानसभा क्षेत्र
टेंडर प्रक्रिया दोषपूर्ण तरीके से अपनाई
बाढ़ प्रभावित गांव मई खुर्द कलां में बाढ़ से बचाव की परियोजना पर काम शुरू हुआ है, लेकिन यह संतोषजनक नहीं है। टेंडर की प्रक्रिया दोषपूर्ण तरीके से अपनाई गई। सिंचाई विभाग ने ठोकरें बनाने को जिस कंपनी का चयन कार्यदायी संस्था के तौर पर किया है, वह सही तरीके से कार्य नहीं कर रही है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन को भी अवगत करा दिया है कि ठोकरें बनने के बाद बाढ़ से होने वाली क्षति के लिए कार्यदायी संस्था जिम्मेदार होगी। -हरिप्रकाश वर्मा, विधायक, जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र
ददरौल क्षेत्र में बाढ़ से बचाव संबंधी दो प्रस्ताव वर्ष 2018 में भेजे गए थे, जो शासन स्तर पर लंबित हैं। विधायक से वार्ता करने के बाद उनके क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया है। उच्चाधिकारियों से भी मार्गदर्शन लिया है। मानसून सीजन खत्म होने और नदियां उतार पर आने के बाद लखनऊ में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में बाढ़ नियंत्रण की लंबित परियोजनाओं पर निर्णय हो सकेगा।
-सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग