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शाहजहांपुर में बाढ़: गंगा-रामगंगा में उफान, जलालाबाद-शमसाबाद हाईवे डूबा, घरों में घुसा पानी, कटान से दहशत

Tue, 25 Aug 2026 04:46 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: Mukesh Kumar Updated Tue, 25 Aug 2026 04:46 PM IST
सार

शाहजहांपुर जिले में गंगा और रामगंगा नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ के हालात बन गए हैं। जिले के करीब चार दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बीते 24 घंटे में गंगा का जलस्तर 10 सेमी और रामगंगा का 21 सेमी बढ़ा है। गंगा खतरे के निशान से सिर्फ 15 सेमी दूर है। जलालाबाद-शमसाबाद हाईवे दो जगह डूब गया है।

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Flood in Shahjahanpur due to rise water lever of Ganga and Ramganga rivers
जलालाबाद-शमसाबाद हाईवे पर बह रहा पानी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

शाहजहांपुर जिले में गंगा और रामगंगा नदी में उफान मंगलवार को भी जारी रहने से कलान और जलालाबाद तहसील के करीब चार दर्जन तटीय गांवों में बाढ़ की आपदा विकराल रूप लेने लगी है। बीते 24 घंटे के दौरान गंगा के जलस्तर में दस सेमी और रामगंगा में 21 सेमी वृद्धि हो गई। अब गंगा खतरे के निशान से सिर्फ 15 सेमी दूर रह गई है। गंगा की बाढ़ से जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे दो जगह डूब गया और उस पर करीब दो फुट पानी बह रहा है। गंगा के किनारे बसे पैलानी उत्तरी गांव के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया।

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गंगा का पानी मिर्जापुर क्षेत्र के तटीय गांवों में तेजी से फैलाव ले रहा है। शमसाबाद हाईवे पर चौरा गांव के पास करीब दो सौ मीटर सड़क पानी में डूब गई और वहां लगभग दो फुट पानी बह रहा है। इसी हाईवे पर गुटेटी उत्तर गांव के पास नाला पर बनी रपटा पुलिया भी डूब गई और पानी उसके ऊपर से निकल रहा है। पैलानी उत्तरी समेत इस्लामनगर, आजादनगर, मस्जिदनगला आदि गांवों के संपर्क मार्ग पहले से डूबे थे। 
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फसलें जलमग्न, किसान चिंतित 
बाढ़ विकराल होने से संपर्क मार्गों पर अब इतना पानी बढ़ गया है कि उससे होकर निकलना खुद को जोखिम में डालने जैसा है। इसके बावजूद लोग पशुओं का चारा, बीमारों की दवाएं, खाद्य वस्तुएं आदि लाने के लिए संपर्क मार्गों पर तेजी से बह रहे पानी से होकर निकल रहे हैं। पैलानी उत्तर में तमाम घरों के बाहर बने शौचालय भी डूब गए हैं। गांव वाले शुद्ध पेयजल को तरस रहे हैं, क्योंकि बाढ़ में डूबे इंडिया मार्क हैंडपंपों से गंदा पानी निकल रहा है। इन गांवों के खेत डूबे होने से ज्वार, बाजरा, उर्द, तिल्ली, गन्ना, धान आदि की फसलें जलमग्न हैं। इस कारण किसान अपनी मेहनत पर पानी फिरते देख बेहद परेशान हैं।

बाढ़ से घिरे ये गांव 
गंगा की बाढ़ से तटीय गांव लुहारन नगला, बांसखेड़ा, भरतपुर, निबिया नगला, बटन नगला, मोती नगला,अभिचारपुर, कटेला नगला, पिड़रिया भी बाढ़ से घिर चुके हैं, लेकिन इन गांवों के लिए अभी नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। पैलानी उत्तरी के फूल सिंह कुशवाहा ने बताया कि घर में पानी भर जाने से भोजन व्यवस्था में मुश्किलें आ रही हैं। इस्लामनगर के सालिम, मोहमद शहजाद, लालू, नन्हे आदि ने बताया कि गांव की गलियों में पानी भर जाने से लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतें आ रही। जरूरतमंद लोग निजी मोटर बोट का सहारा लेकर जरूरत का सामान लेने बाजार जा रहे हैं। अधिकारियों ने बाढ़ से घिरे किसी भी गांव में अभी तक मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था नहीं की है। इस कारण पशुपालक भी परेशान हैं।

रामगंगा के कटान से भरतौली में दहशत, ग्रामीणों ने मकान तोड़ने शुरू किए
उफनाई रामगंगा का कटान अब गांवों के लिए खतरा बन गया है। जलालाबाद क्षेत्र के भरतौली गांव में नदी की धारा तेजी से कटान करती हुई मकानों के करीब पहुंच गई है। भयभीत ग्रामीणों ने कटान की जद में आए अपने मकानों को खुद तोड़ना शुरू कर दिया।

ग्रामीणों की सूचना पर एसडीएम मधुसूदन गुप्ता ने गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और सिंचाई विभाग के अभियंताओं को तत्काल फौरी उपाय करने के निर्देश दिए। विधायक हरिप्रकाश वर्मा ने भी गांव पहुंचकर ग्रामीणों को सुरक्षा का भरोसा दिया।

ग्रामीणों के अनुसार रामगंगा की धारा भरतौली गांव से कुछ मीटर दूर रह गई है। वीरपाल, वीरेश सिंह, रामप्रकाश और कमलेश शर्मा ने बताया कि नदी कई मीटर भूमि काटते हुए गांव की ओर बढ़ रही है। भरतौली के पास रामपुर, रत्नापुर और वजीरपुर गांवों पर भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

किशनपाल, कौशल सिंह और इंद्रपाल ने कटान की जद में आने पर मकान तोड़ना शुरू कर दिए हैं। विधायक ने बताया कि नदी को पुराने स्थान पर लाने के लिए ड्रोन मैपिंग टीम गठित कराई गई है। रिपोर्ट के आधार पर नदी की धारा मोड़ने की परियोजना तैयार की जाएगी।
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