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साढ़े तीन करोड़ की आतिशबाजी...फूटा प्रदूषण बम
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शाहजहांपुर। दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के साथ शुरू हुआ आतिशबाजी का दौर आधी रात के बाद तक जारी रहा। ऐसे में वातावरण में कई खतरनाक रसायन घुल गए। पटाखों से निकले धुएं से वातावरण इतना प्रदूषित हुआ कि हवा में एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) सामान्य से दस गुना बढ़कर 430 तक पहुंच गया। इससे सांस व हृदय रोगियों को दिक्कत हुई।
पिछले वर्ष कोरोना काल को देखते सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी द्वारा तमाम प्रतिबंध लगाने के बावजूद लोगों ने करीब दो करोड़ रुपये की आतिशबाजी फूूंक डाली थी। इस बार कोरोना से उबरने पर त्योहार का उल्लास बढ़ा तो दिवाली की रात जमकर पटाखे दागे गए। जिले भर में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये आतिशबाजी पर खर्च का अनुमान है। शहर में ही दो करोड़ से ज्यादा की आतिशबाजी छोड़ने का अनुमान है। यही वजह रही कि एक्यूआई खतरनाक तरीके से बढ़ गया। इसका आदर्श मानक 0-50 तक माना जाता है। शहर में वाहनों के धुएं और सीवर लाइन के लिए सड़कों की खोदाई से धूल उड़ने के बावजूद सोमवार शाम तक एक्यूआई 41 से 67 के बीच बना था जो आतिशबाजी के बाद बढ़कर 430 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार वायुमंडल में कार्बन, सल्फर आदि मिलने से पीएम-2.5 और पीएम-10 (सूक्ष्म कण) इतने ज्यादा बढ़ गए कि शहर में कई स्थानों पर हवा सांस लेने लायक नहीं रही।
पर्यावरण को समर्पित संस्था पृथ्वी से जुड़े एसएस कॉलेज के रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार सिंह ने वायु प्रदूषण मापी से सोमवार शाम आतिशबाजी से शुरू होने से पहले और आतिशबाजी के बाद देर रात जांच की तो स्पष्ट हो गया कि पटाखों के धुएं से उत्सर्जित कार्बन मोनो आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, नाइट्रिट आक्साइड आदि जहरीली गैसें हवा में तेजी से बढ़ गईं और कई ठोस तत्वों के हानिकारक कण वायुमंडल में तैर रहे हैं। प्रदूषण की माप से यह भी जाहिर हुआ कि शहर में प्रदूषित सूक्ष्म कणों में दिवाली के बाद दस गुना बढ़ोतरी हो चुकी है।
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सोमवार को आतिशबाजी से पहले और बाद में एक्यूआई
स्थान शाम छह बजे रात 11 बजे
चौक 44 368
घंटाघर 58 384
सदर बाजार 67 430
अंटा चौराहा 41 332
एक्यूआई का स्तर के अनुसार वर्गीकरण
स्तर संकेत स्थिति
0-50 हरा अच्छा
51-100 पीला संतोषजनक
101-150 नारंगी संवे
151-200 लाल बीमारों के लिए अति संवेदनशील
201-300 बैंगनी सामान्य जन को अति संवेदनशील
301-400 लाल गंभीर स्थिति
401-500 महरून आपातकालीन स्थिति (घरों से निकलने पर पाबंदी)
- आतिशबाजी से हवा में कार्बन और अन्य कई धातुओं के सूक्ष्म कण बढ़ गए हैं। यह कण प्रति क्यूबिक मीटर 60 से 100 माइक्रो ग्राम से अधिक नहीं होने चाहिए, लेकिन जांच से पता चला कि दिवाली की रात उनकी मात्रा बढ़कर दस गुना हो गई। हवा में घुलीं अदृश्य जहरीली गैसें और बारूद जलने से सल्फर, पोटाश, मैग्नीशियम आदि के कण वातावरण में बढ़ गए हैं। गनीमत है कि पिछले साल दिवाली की तुलना में इस बार सर्दी कम होने और पराली जलाने पर रोक आदि कारणों से प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम रहा। प्रदूषित वायुमंडल सामान्य होने में तीन-चार दिन लगने का अनुमान है। -डॉ. आलोक कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष, रसायन विज्ञान विभाग, एसएस कॉलेज
- दिवाली पर बढ़ा प्रदूषण जन सामान्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचाएगा। शारीरिक रूप से कमजोर लोगों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कम होती है। इसलिए ऐसे माहौल में अस्वस्थ लोग अनावश्यक रूप से ज्यादा देर बाहर नहीं रहें। अस्थमा, एलर्जी और हृदय रोग के मरीज मास्क लगाए बगैर घरों से बाहर नहीं निकलें। - डॉ. रविमोहन, चिकित्सक
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पिछले वर्ष कोरोना काल को देखते सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी द्वारा तमाम प्रतिबंध लगाने के बावजूद लोगों ने करीब दो करोड़ रुपये की आतिशबाजी फूूंक डाली थी। इस बार कोरोना से उबरने पर त्योहार का उल्लास बढ़ा तो दिवाली की रात जमकर पटाखे दागे गए। जिले भर में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये आतिशबाजी पर खर्च का अनुमान है। शहर में ही दो करोड़ से ज्यादा की आतिशबाजी छोड़ने का अनुमान है। यही वजह रही कि एक्यूआई खतरनाक तरीके से बढ़ गया। इसका आदर्श मानक 0-50 तक माना जाता है। शहर में वाहनों के धुएं और सीवर लाइन के लिए सड़कों की खोदाई से धूल उड़ने के बावजूद सोमवार शाम तक एक्यूआई 41 से 67 के बीच बना था जो आतिशबाजी के बाद बढ़कर 430 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार वायुमंडल में कार्बन, सल्फर आदि मिलने से पीएम-2.5 और पीएम-10 (सूक्ष्म कण) इतने ज्यादा बढ़ गए कि शहर में कई स्थानों पर हवा सांस लेने लायक नहीं रही।
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पर्यावरण को समर्पित संस्था पृथ्वी से जुड़े एसएस कॉलेज के रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार सिंह ने वायु प्रदूषण मापी से सोमवार शाम आतिशबाजी से शुरू होने से पहले और आतिशबाजी के बाद देर रात जांच की तो स्पष्ट हो गया कि पटाखों के धुएं से उत्सर्जित कार्बन मोनो आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, नाइट्रिट आक्साइड आदि जहरीली गैसें हवा में तेजी से बढ़ गईं और कई ठोस तत्वों के हानिकारक कण वायुमंडल में तैर रहे हैं। प्रदूषण की माप से यह भी जाहिर हुआ कि शहर में प्रदूषित सूक्ष्म कणों में दिवाली के बाद दस गुना बढ़ोतरी हो चुकी है।
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सोमवार को आतिशबाजी से पहले और बाद में एक्यूआई
स्थान शाम छह बजे रात 11 बजे
चौक 44 368
घंटाघर 58 384
सदर बाजार 67 430
अंटा चौराहा 41 332
एक्यूआई का स्तर के अनुसार वर्गीकरण
स्तर संकेत स्थिति
0-50 हरा अच्छा
51-100 पीला संतोषजनक
101-150 नारंगी संवे
151-200 लाल बीमारों के लिए अति संवेदनशील
201-300 बैंगनी सामान्य जन को अति संवेदनशील
301-400 लाल गंभीर स्थिति
401-500 महरून आपातकालीन स्थिति (घरों से निकलने पर पाबंदी)
- आतिशबाजी से हवा में कार्बन और अन्य कई धातुओं के सूक्ष्म कण बढ़ गए हैं। यह कण प्रति क्यूबिक मीटर 60 से 100 माइक्रो ग्राम से अधिक नहीं होने चाहिए, लेकिन जांच से पता चला कि दिवाली की रात उनकी मात्रा बढ़कर दस गुना हो गई। हवा में घुलीं अदृश्य जहरीली गैसें और बारूद जलने से सल्फर, पोटाश, मैग्नीशियम आदि के कण वातावरण में बढ़ गए हैं। गनीमत है कि पिछले साल दिवाली की तुलना में इस बार सर्दी कम होने और पराली जलाने पर रोक आदि कारणों से प्रदूषण का स्तर थोड़ा कम रहा। प्रदूषित वायुमंडल सामान्य होने में तीन-चार दिन लगने का अनुमान है। -डॉ. आलोक कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष, रसायन विज्ञान विभाग, एसएस कॉलेज
- दिवाली पर बढ़ा प्रदूषण जन सामान्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचाएगा। शारीरिक रूप से कमजोर लोगों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कम होती है। इसलिए ऐसे माहौल में अस्वस्थ लोग अनावश्यक रूप से ज्यादा देर बाहर नहीं रहें। अस्थमा, एलर्जी और हृदय रोग के मरीज मास्क लगाए बगैर घरों से बाहर नहीं निकलें। - डॉ. रविमोहन, चिकित्सक