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Shahjahanpur News: बुखार जान पर भारी, अस्पताल में बेड की मारामारी
Mon, 09 Sep 2024 02:32 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Mon, 09 Sep 2024 02:32 AM IST
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राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में वॉटर कूलर से नहीं आ रहा पानी। संवाद
शाहजहांपुर। जिले में फैला बुखार मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा है, लेकिन राजकीय मेडिकल कॉलेज में बेड के लिए मारामारी मची हुई है। वार्ड फुल होने के बाद एक पलंग पर अब भी तीन-तीन मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा भी मंडराने लगा है। जिम्मेदार भी ठोस जवाब देने के बजाय असहाय बने हुए हैं।
जिला अस्पताल से राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की आस जगी थी, पर संचारी रोगों का सीजन आने पर स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी से उतर गईं। 330 बेड के अस्पताल में मरीजों की भीड़ के चलते बेड मिलना तक मुश्किल है। चिकित्सकों के मुताबिक, अस्पताल में आने वाले 40 प्रतिशत रोगी बुखार से पीड़ित हैं।
रविवार को करीब दो बजे इमरजेंसी की स्थिति बदहाल थी। बेड फुल होने के चलते स्ट्रेचर पर मरीजाें को लिटाकर उपचार किया गया। स्ट्रेचर भी नहीं मिलने पर एक बेड पर तीन मरीजों को लिटा दिया गया। वर्तमान में 330 बेड के अस्पताल में 456 मरीज भर्ती हैं। इनमें 160 नए भर्ती किए गए। साथ ही 105 को छुट्टी दे दी गई।
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पंखों से नहीं मिल रही राहत
-उमस भरी गर्मी में मरीजों के साथ तीमारदार भी बेहाल हैं। परिसर में लगे पंखों से राहत नहीं मिल रही है। इमरजेंसी में आने वाले मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं। अस्पताल में लगे पंखे नाकाफी साबित हो रहे हैं। कूलर भी शोपीस बन गए हैं। उमस भरी गर्मी में तीमारदार घर से हाथ वाला पंखा लेकर आने के लिए मजबूर हैं। गर्मी के चलते तीमारदार भी बीमार होने लगे हैं।
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द्वितीय तल पर पीने के पानी की व्यवस्था अपर्याप्त
-राजकीय मेडिकल कॉलेज के ग्राउंड फ्लोर पर वाटर कूलर मरीजों के लिए लगा है। द्वितीय तल पर मरीज व तीमारदार पानी के लिए भटक रहे हैं। यहां पर पानी की टंकी तलाशना मुश्किल है। काफी तलाश करने पर वाटर कूलर आईसीयू में एक कोने में लगा मिला। ऐसे में मरीज पानी के लिए तीसरे फ्लोर या ग्राउंड फ्लोर पर आते हैं। प्रशासनिक भवन के गेट पर लगे वाटर कूलर से भी पानी नहीं आ रहा है। अस्पताल के कुछ शौचालय भी मरम्मत कार्य के चलते बंद पड़े हैं।
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-अस्पताल में मरीजों के लिए अतिरिक्त बेड डलवाए गए हैं। कोशिश रहती है कि सभी मरीजों को बेड उपलब्ध हो सके। रविवार शाम तक इमरजेंसी में स्थिति सामान्य हो गई है।
डॉ. एमपी गंगवार, चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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जिला अस्पताल से राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की आस जगी थी, पर संचारी रोगों का सीजन आने पर स्वास्थ्य सुविधाएं पटरी से उतर गईं। 330 बेड के अस्पताल में मरीजों की भीड़ के चलते बेड मिलना तक मुश्किल है। चिकित्सकों के मुताबिक, अस्पताल में आने वाले 40 प्रतिशत रोगी बुखार से पीड़ित हैं।
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रविवार को करीब दो बजे इमरजेंसी की स्थिति बदहाल थी। बेड फुल होने के चलते स्ट्रेचर पर मरीजाें को लिटाकर उपचार किया गया। स्ट्रेचर भी नहीं मिलने पर एक बेड पर तीन मरीजों को लिटा दिया गया। वर्तमान में 330 बेड के अस्पताल में 456 मरीज भर्ती हैं। इनमें 160 नए भर्ती किए गए। साथ ही 105 को छुट्टी दे दी गई।
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पंखों से नहीं मिल रही राहत
-उमस भरी गर्मी में मरीजों के साथ तीमारदार भी बेहाल हैं। परिसर में लगे पंखों से राहत नहीं मिल रही है। इमरजेंसी में आने वाले मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं। अस्पताल में लगे पंखे नाकाफी साबित हो रहे हैं। कूलर भी शोपीस बन गए हैं। उमस भरी गर्मी में तीमारदार घर से हाथ वाला पंखा लेकर आने के लिए मजबूर हैं। गर्मी के चलते तीमारदार भी बीमार होने लगे हैं।
द्वितीय तल पर पीने के पानी की व्यवस्था अपर्याप्त
-राजकीय मेडिकल कॉलेज के ग्राउंड फ्लोर पर वाटर कूलर मरीजों के लिए लगा है। द्वितीय तल पर मरीज व तीमारदार पानी के लिए भटक रहे हैं। यहां पर पानी की टंकी तलाशना मुश्किल है। काफी तलाश करने पर वाटर कूलर आईसीयू में एक कोने में लगा मिला। ऐसे में मरीज पानी के लिए तीसरे फ्लोर या ग्राउंड फ्लोर पर आते हैं। प्रशासनिक भवन के गेट पर लगे वाटर कूलर से भी पानी नहीं आ रहा है। अस्पताल के कुछ शौचालय भी मरम्मत कार्य के चलते बंद पड़े हैं।
-अस्पताल में मरीजों के लिए अतिरिक्त बेड डलवाए गए हैं। कोशिश रहती है कि सभी मरीजों को बेड उपलब्ध हो सके। रविवार शाम तक इमरजेंसी में स्थिति सामान्य हो गई है।
डॉ. एमपी गंगवार, चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय मेडिकल कॉलेज

राजकीय मेडिकल कॉलेज परिसर में वॉटर कूलर से नहीं आ रहा पानी। संवाद