{"_id":"59bfc2994f1c1b32688b5350","slug":"farmers-entrapped-in-the-wake-of-debt-waiver","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्जमाफी के सब्जबाग में उलझ गए किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्जमाफी के सब्जबाग में उलझ गए किसान
अमर उजाला ब्यूरो पीलीभीत।
Updated Mon, 18 Sep 2017 07:38 PM IST
विज्ञापन
फसल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
माफी के चक्कर में अब देना होगा कई गुना ब्याज
प्रदेश सरकार ने कर्ज माफी का सपना दिखाकर किसानों को दो राहे पर खड़ा कर दिया है। कुछ किसानों का नाम मात्र का कर्ज माफ हुआ है। कुछ ऐसे भी किसान हैं जो चवन्नी, अठन्नी माफ होने पर उसे बताने लायक तक नहीं हैं। दूसरी ओर कर्ज माफी की आस में समय से ऋण अदा न करने पर अब किसानों को तीन के बजाए आठ प्रतिशत ब्याज सहित ऋण जमा करना पड़ेगा।
भाजपा ने चुनाव से पूर्व किसानों का कर्ज माफ करने वादा किया था। सरकार बनने के बाद किसानों को कर्ज माफ होने की उम्मीद भी जगी। जिसके चलते अधिकांश किसानों ने ऋण जमा नहीं किया, लेकिन जब कर्ज माफी के प्रथम चरण की सूची जारी हुई और किसानों को इसके प्रमाणपत्र मिले तो वह ठगे से रह गए। एक लाख रुपये का ऋण होने का सपना देख रहे किसानों का चंद रुपये का ऋण ही माफ हुआ है। इसमें कुछ किसान तो ऐसे हैं जिन्होंने निर्धारित तिथि 31 मार्च 2016 के बाद अपना ऋण जमा कर दिया। ऐसा करने से जो धनराशि उनके खाते में छूट गई वह माफ हो गई। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे भी किसान हैं, जिनके ऊपर ऋण था और इसे जमा भी नहीं किया था। इसके बाद भी उनके ऋण का कुछ अंश ही जमा हुआ है। ऐसे कैसे हुआ यह बताने की स्थिति में न कृषि विभाग के अधिकारी हैं और न बैंक के अफसर। दरअसल पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और कई स्तरों से गुजरी है। ऐसे में सही स्थिति सामने नहीं आ पा रही है। वहीं आशंका व्यक्त की जा रही है कि इसमें कुछ न कुछ गड़बड़ भी अवश्य हुई है।
कर्जा एक लाख, माफ हुआ 102 रुपये
न्यूरिया के मोहल्ला खब्बापुर निवासी असगर अली ने कस्बे की बैंक ऑफ बड़ौदा से एक लाख रुपये क्राप लोन लिया था। पिछले दो साल से उन्होंने ऋण भी जमा नहीं किया। इसके बाद भी ऋण माफी में उन्हें मात्र 102 रुपये माफ होने का प्रमाणपत्र मिला है।
विज्ञापन
15 हजार कर्ज पर 31 हजार ब्याज, माफी 10 हजार
परेवावैश्य निवासी तोताराम ने बैंक ऑफ बड़ौदा की डांग शाखा से करीब 5-6 साल पूर्व 15 हजार रुपये ऋण लिया था। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते वह ऋण जमा नहीं कर सके जिससे ब्याज सहित उनकी रकम 46 हजार हो गई यानि 15 हजार मूलधन पर 31 हजार ब्याज लग गया। इसके बाद हुई कर्ज माफी में उनका मात्र 10838 रुपया माफ हुआ।
सूची में नाम, लेकिन नहीं मिला लाभ
पंजाब एंड सिंध बैंक के खातेदार वीर सिंह ने डीएम के पोर्टल पर दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा कि ऋण मोचन योजना की प्रथम सूची में उसका नाम था लेकिन बैंक प्रबंधक धनराशि को खाते जमा करने में आना कानी कर रहे हैं।
पीलीभीत में 13575 की हुई कर्जमाफी
ऋण मोचन योजना के प्रथम चरण में 13575 किसानों का कर्ज माफ हुआ है। इसमें 1402 किसान ऐसे हैं जो जिन्हें कर्जमाफी के नाम पर 25 हजार रुपये भी हासिल नहीं हुए। वहीं 3134 किसानों को 25 से 50 हजार तक और 2747 किसानों को 50 से 75 हजार और 1917 किसानों को 75 हजार से 99999 रुपये माफ हुए हैं। मात्र 4375 किसान ही ऐसे हैं जिनका एक लाख रुपया माफ हुआ है।
किसानों को देना होना कई गुना ब्याज
फसल ऋण लेने पर यदि किसान उसे समय से (फसल कटने के बाद छमाही) जमा कर देते हैं तो उन्हें मात्र तीन प्रतिशत ब्याज ही देना पड़ता है। इससे अधिक समय होने पर ब्याज बढ़ता चला जाता है जो एक साल होने पर लगभग आठ प्रतिशत और इससे अधिक होने पर उसी क्रम में बढ़ता चला जाता है। ऐसे में ऋण माफी के इंतजार में धनराशि जमा न करने वह किसान अब पछता रहे हैं जिनका ऋण भी माफ भी नहीं हुआ और ब्याज भी बढ़ गया।
ऋण मोचन योजना में कई स्तर पर कार्य हुए हैं और बैंक, कृषि विभाग व राजस्व विभाग द्वारा अलग अलग जांच के बाद ही कंप्यूटर से स्वत: छटनी हुई है। नियमानुसार हो लोग इसकी श्रेणी में आए उन सभी को योजना का लाभ मिला है।
मनोहर सिंह जनपांगी, अग्रणी प्रबंधक
विज्ञापन
प्रदेश सरकार ने कर्ज माफी का सपना दिखाकर किसानों को दो राहे पर खड़ा कर दिया है। कुछ किसानों का नाम मात्र का कर्ज माफ हुआ है। कुछ ऐसे भी किसान हैं जो चवन्नी, अठन्नी माफ होने पर उसे बताने लायक तक नहीं हैं। दूसरी ओर कर्ज माफी की आस में समय से ऋण अदा न करने पर अब किसानों को तीन के बजाए आठ प्रतिशत ब्याज सहित ऋण जमा करना पड़ेगा।
भाजपा ने चुनाव से पूर्व किसानों का कर्ज माफ करने वादा किया था। सरकार बनने के बाद किसानों को कर्ज माफ होने की उम्मीद भी जगी। जिसके चलते अधिकांश किसानों ने ऋण जमा नहीं किया, लेकिन जब कर्ज माफी के प्रथम चरण की सूची जारी हुई और किसानों को इसके प्रमाणपत्र मिले तो वह ठगे से रह गए। एक लाख रुपये का ऋण होने का सपना देख रहे किसानों का चंद रुपये का ऋण ही माफ हुआ है। इसमें कुछ किसान तो ऐसे हैं जिन्होंने निर्धारित तिथि 31 मार्च 2016 के बाद अपना ऋण जमा कर दिया। ऐसा करने से जो धनराशि उनके खाते में छूट गई वह माफ हो गई। वहीं दूसरी ओर कई ऐसे भी किसान हैं, जिनके ऊपर ऋण था और इसे जमा भी नहीं किया था। इसके बाद भी उनके ऋण का कुछ अंश ही जमा हुआ है। ऐसे कैसे हुआ यह बताने की स्थिति में न कृषि विभाग के अधिकारी हैं और न बैंक के अफसर। दरअसल पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और कई स्तरों से गुजरी है। ऐसे में सही स्थिति सामने नहीं आ पा रही है। वहीं आशंका व्यक्त की जा रही है कि इसमें कुछ न कुछ गड़बड़ भी अवश्य हुई है।
विज्ञापन
कर्जा एक लाख, माफ हुआ 102 रुपये
न्यूरिया के मोहल्ला खब्बापुर निवासी असगर अली ने कस्बे की बैंक ऑफ बड़ौदा से एक लाख रुपये क्राप लोन लिया था। पिछले दो साल से उन्होंने ऋण भी जमा नहीं किया। इसके बाद भी ऋण माफी में उन्हें मात्र 102 रुपये माफ होने का प्रमाणपत्र मिला है।
विज्ञापन
15 हजार कर्ज पर 31 हजार ब्याज, माफी 10 हजार
परेवावैश्य निवासी तोताराम ने बैंक ऑफ बड़ौदा की डांग शाखा से करीब 5-6 साल पूर्व 15 हजार रुपये ऋण लिया था। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते वह ऋण जमा नहीं कर सके जिससे ब्याज सहित उनकी रकम 46 हजार हो गई यानि 15 हजार मूलधन पर 31 हजार ब्याज लग गया। इसके बाद हुई कर्ज माफी में उनका मात्र 10838 रुपया माफ हुआ।
सूची में नाम, लेकिन नहीं मिला लाभ
पंजाब एंड सिंध बैंक के खातेदार वीर सिंह ने डीएम के पोर्टल पर दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा कि ऋण मोचन योजना की प्रथम सूची में उसका नाम था लेकिन बैंक प्रबंधक धनराशि को खाते जमा करने में आना कानी कर रहे हैं।
पीलीभीत में 13575 की हुई कर्जमाफी
ऋण मोचन योजना के प्रथम चरण में 13575 किसानों का कर्ज माफ हुआ है। इसमें 1402 किसान ऐसे हैं जो जिन्हें कर्जमाफी के नाम पर 25 हजार रुपये भी हासिल नहीं हुए। वहीं 3134 किसानों को 25 से 50 हजार तक और 2747 किसानों को 50 से 75 हजार और 1917 किसानों को 75 हजार से 99999 रुपये माफ हुए हैं। मात्र 4375 किसान ही ऐसे हैं जिनका एक लाख रुपया माफ हुआ है।
किसानों को देना होना कई गुना ब्याज
फसल ऋण लेने पर यदि किसान उसे समय से (फसल कटने के बाद छमाही) जमा कर देते हैं तो उन्हें मात्र तीन प्रतिशत ब्याज ही देना पड़ता है। इससे अधिक समय होने पर ब्याज बढ़ता चला जाता है जो एक साल होने पर लगभग आठ प्रतिशत और इससे अधिक होने पर उसी क्रम में बढ़ता चला जाता है। ऐसे में ऋण माफी के इंतजार में धनराशि जमा न करने वह किसान अब पछता रहे हैं जिनका ऋण भी माफ भी नहीं हुआ और ब्याज भी बढ़ गया।
ऋण मोचन योजना में कई स्तर पर कार्य हुए हैं और बैंक, कृषि विभाग व राजस्व विभाग द्वारा अलग अलग जांच के बाद ही कंप्यूटर से स्वत: छटनी हुई है। नियमानुसार हो लोग इसकी श्रेणी में आए उन सभी को योजना का लाभ मिला है।
मनोहर सिंह जनपांगी, अग्रणी प्रबंधक