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संयुक्त परिवार की ताकत से हर मुश्किल आसान
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प्रतिष्टित कारोबारी कुलदीप सिंह दुआ का परिवार । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। शहर के कई संयुक्त परिवार पारिवारिक एकता के साथ कामयाबी की मिसाल बन गए हैं। शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी कुलदीप सिंह दुआ और होजरी उत्पादों के थोक व्यवसायी नीरज गुप्ता के परिवार ऐसे ही हैं। दुआ परिवार में सभी भाइयों के अलग-अलग कारोबार होने के बावजूद सारा हिसाब उनकी बुजुर्ग मां रखती हैं, वहीं नीरज गुप्ता दो भाइयों के अलावा अपनी बहन और बुआ के परिवारों को भी साथ लेकर चल रहे हैं। दोनों परिवारों के सदस्यों का कहना है कि एक साथ रहने से पूरे परिवार का आत्मविश्वास बढ़ा रहता है और कारोबारी दिक्कतें भी आड़े नही आतीं।
दुआ परिवार में पांच भाइयों के बीच सिर्फ एक रसोई
विभाजन के दौरान पाकिस्तान के लायलपुर से आकर शहर में आकर बसे महेंद्र सिंह दुआ चार भाइयों में सबसे छोटे थे, लेकिन विस्थापन से पहले चारों भाई एक साथ रहे। यहां आने पर उन्होंने वही संस्कार अपने पांचों बेटों को दिए। कुछ वर्ष पहले उनका निधन हो चुका है, लेकिन उनके सभी बेटे आर्थिक और सामाजिक रूप से स्वयं सक्षम होने के बावजूद एक साथ रहते हैं और उनके बीच एक ही रसोई है। परिवार की मुखिया अमृत कौर अब 84 वर्ष की हो चुकी हैं, लेकिन उनके पांचों बेटे सारी कमाई अपनी मां के हाथ पर रखते हैं।
वहीं अपने बेटों के परिवारों की जरूरतों का ध्यान रखते हुए उन पर सारा खर्च करती हैं। पांच भाइयों में सबसे बड़े कुलदीप सिंह दुआ के अनुसार छोटे भाई हरभजन सिंह दुआ, दर्शन सिंह दुआ, कंवलजीत सिंह दुआ और चरणजीत सिंह दुआ के अलावा बहन जगजीत कौर दुआ हैं। उनके बीवी-बच्चों को मिलाकर परिवार में 24 सदस्य हैं। कई बच्चे बाहर पढ़ रहे हैं, लेकिन त्योहार अथवा अन्य मौकों पर उनके घर आने पर भी एक ही रसोई में खाना पकता है। उनका कहना है कि परिवार के एक साथ रहने से कोई तनाव होने का सवाल ही नहीं उठता, बल्कि फायदे अनगिनत हैं। किसी को बाहर जाना हो, शादी-ब्याह निपटाना हो तो दूसरे भाई कारोबार संभाले रहते हैं।
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गुप्ता परिवार ने होजरी कारोबार से जोड़े रिश्तेदार
होजरी कारोबारी नीरज गुप्ता अपने बड़े भाई पंकज गुप्ता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयां दे रहे हैं। परिवार में 15 सदस्य हैं और सभी एक साथ रहते और एक डाइनिंग टेबिल पर साथ बैठकर खाना खाते हैं। नीरज के अनुसार उन्हें एक साथ रहने के संस्कार अपने दादा राम नारायण गुप्ता, दादी कलावती और पिता गिरीश चंद्र गुप्ता से मिले। यह बुजुर्ग अब नहीं रहे, लेकिन उनकी दिखाई राह पर चलते हुए पंकज और नीरज ने कई रिश्तेदारों को अपनाकर उन्हें भी अपने परिवार में शामिल कर लिया है।
बहन-बहनोई के निधन के बाद उनके दो बेटे गोविंद और राघव अब परिवार के सदस्य हो चुके हैं। गोविंद की पत्नी और बेटी भी साथ रहते हैं। नीरज के फूफा राम किशोर मूलत: सीतापुर जिले के रहने वाले हैं, लेकिन वर्ष 2000 में वह यहां आए तो उन्हें भी परिवार के साथ कारोबार का प्रमुख स्तंभ बना लिया। नीरज के अनुसार पापा भी तीन भाई और एक बहन के साथ संयुक्त परिवार में रहे। नीरज की बहन के बेटे और भाभी (पंकज की पत्नी) के भांजे भी कारोबार की देखभाल पूरी तन्मयता से करते हैं।
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दुआ परिवार में पांच भाइयों के बीच सिर्फ एक रसोई
विभाजन के दौरान पाकिस्तान के लायलपुर से आकर शहर में आकर बसे महेंद्र सिंह दुआ चार भाइयों में सबसे छोटे थे, लेकिन विस्थापन से पहले चारों भाई एक साथ रहे। यहां आने पर उन्होंने वही संस्कार अपने पांचों बेटों को दिए। कुछ वर्ष पहले उनका निधन हो चुका है, लेकिन उनके सभी बेटे आर्थिक और सामाजिक रूप से स्वयं सक्षम होने के बावजूद एक साथ रहते हैं और उनके बीच एक ही रसोई है। परिवार की मुखिया अमृत कौर अब 84 वर्ष की हो चुकी हैं, लेकिन उनके पांचों बेटे सारी कमाई अपनी मां के हाथ पर रखते हैं।
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वहीं अपने बेटों के परिवारों की जरूरतों का ध्यान रखते हुए उन पर सारा खर्च करती हैं। पांच भाइयों में सबसे बड़े कुलदीप सिंह दुआ के अनुसार छोटे भाई हरभजन सिंह दुआ, दर्शन सिंह दुआ, कंवलजीत सिंह दुआ और चरणजीत सिंह दुआ के अलावा बहन जगजीत कौर दुआ हैं। उनके बीवी-बच्चों को मिलाकर परिवार में 24 सदस्य हैं। कई बच्चे बाहर पढ़ रहे हैं, लेकिन त्योहार अथवा अन्य मौकों पर उनके घर आने पर भी एक ही रसोई में खाना पकता है। उनका कहना है कि परिवार के एक साथ रहने से कोई तनाव होने का सवाल ही नहीं उठता, बल्कि फायदे अनगिनत हैं। किसी को बाहर जाना हो, शादी-ब्याह निपटाना हो तो दूसरे भाई कारोबार संभाले रहते हैं।
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गुप्ता परिवार ने होजरी कारोबार से जोड़े रिश्तेदार
होजरी कारोबारी नीरज गुप्ता अपने बड़े भाई पंकज गुप्ता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयां दे रहे हैं। परिवार में 15 सदस्य हैं और सभी एक साथ रहते और एक डाइनिंग टेबिल पर साथ बैठकर खाना खाते हैं। नीरज के अनुसार उन्हें एक साथ रहने के संस्कार अपने दादा राम नारायण गुप्ता, दादी कलावती और पिता गिरीश चंद्र गुप्ता से मिले। यह बुजुर्ग अब नहीं रहे, लेकिन उनकी दिखाई राह पर चलते हुए पंकज और नीरज ने कई रिश्तेदारों को अपनाकर उन्हें भी अपने परिवार में शामिल कर लिया है।
बहन-बहनोई के निधन के बाद उनके दो बेटे गोविंद और राघव अब परिवार के सदस्य हो चुके हैं। गोविंद की पत्नी और बेटी भी साथ रहते हैं। नीरज के फूफा राम किशोर मूलत: सीतापुर जिले के रहने वाले हैं, लेकिन वर्ष 2000 में वह यहां आए तो उन्हें भी परिवार के साथ कारोबार का प्रमुख स्तंभ बना लिया। नीरज के अनुसार पापा भी तीन भाई और एक बहन के साथ संयुक्त परिवार में रहे। नीरज की बहन के बेटे और भाभी (पंकज की पत्नी) के भांजे भी कारोबार की देखभाल पूरी तन्मयता से करते हैं।

होजरी उत्पादों के थोक व्यवसायी नीरज गुप्ता का परिवार । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR