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नदियां खुद का किससे बचाएं.. माफिया या बदहाल सिस्टम से
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पुवायां। नदियों को अविरल बनाने की बातें भी बहुत हुईं मगर हकीकत इससे इतर है। पुवायां तहसील क्षेत्र में भैंसी नदी की जमीन पर कब्जे करके लोगों ने खेती शुरू कर दी गई है। बहुत बड़े भाग पर खनन किया जा रहा है। जहां पानी है, वहां फैक्टरियों के अपशिष्ट बहाये जा रहे हैं। इससे नदी का स्वरूप बदल गया है।
गोमती की प्रमुख सहायक भैंसी नदी पीलीभीत की पूरनपुर तहसील के डंडरौल और शाहजहांपुर की सीमा से लगी करीब 50 वर्ग किलोमीटर में फैली भैंसासुर झील से निकली है। लगभग 42 किलोमीटर का सफर करने के बाद भैंसी नदी लखीमपुर के इमलिया घाट के पास गोमती में मिल जाती है। रेत खनन, अवैध कब्जों और प्रदूषण के चलते यह नदी अब दम तोड़ चुकी है। भैंसी लगभग दस वर्ष से सूखी पड़ी है।
भैंसी नदी के किनारे पुवायां के गांव इनायतपुर और करनापुर में दो फैक्टरियां हैं। एक फैक्टरी तो नदी के किनारे तक बनी हुई है। हालांकि दोनों ही कारखानों के अधिकारी यह दावा करते हैं कि उनकी फैक्टरी का अपशिष्ट नदी में नहीं जाता है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। इस वजह से कभी गोमती को जीवन देने वाली यह नदी आज स्वयं मृत हो चुकी है।
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जबकि पूर्व में इस नदी के पानी से गोमती की धार को गति मिलने के साथ ही लगभग तीन दर्जन गांवों में फसलों की सिंचाई होती थी। मगर अब इस नदी के किनारे तक कब्जा करके खेती की जा रही है।
धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन
भैंसी नदी सूखी तो खनन माफिया और भूमाफिया भी सक्रिय हो गए। बंडा से लेकर पुवायां तक नदी की भूमि कब्जा कर खेती शुरू कर दी गई है। वहीं, गांव बिलंदापुर, गदाईसांडा समेत कई स्थानों पर अवैध रूप से रेत खनन किया जा रहा है। मगर राजस्वकर्मियों, खनन विभाग और पुलिस यहां कार्रवाई की जरूरत ही नहीं समझती।
नदी भूमि पर अवैध कब्जे हैं तो उनको हटवाया जाएगा। सभी लोगों को प्रयास करना चाहिए कि नदियों की धार अरिल बहती रहे। - दशरथ कुमार, एसडीएम पुवायां
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गोमती की प्रमुख सहायक भैंसी नदी पीलीभीत की पूरनपुर तहसील के डंडरौल और शाहजहांपुर की सीमा से लगी करीब 50 वर्ग किलोमीटर में फैली भैंसासुर झील से निकली है। लगभग 42 किलोमीटर का सफर करने के बाद भैंसी नदी लखीमपुर के इमलिया घाट के पास गोमती में मिल जाती है। रेत खनन, अवैध कब्जों और प्रदूषण के चलते यह नदी अब दम तोड़ चुकी है। भैंसी लगभग दस वर्ष से सूखी पड़ी है।
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भैंसी नदी के किनारे पुवायां के गांव इनायतपुर और करनापुर में दो फैक्टरियां हैं। एक फैक्टरी तो नदी के किनारे तक बनी हुई है। हालांकि दोनों ही कारखानों के अधिकारी यह दावा करते हैं कि उनकी फैक्टरी का अपशिष्ट नदी में नहीं जाता है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। इस वजह से कभी गोमती को जीवन देने वाली यह नदी आज स्वयं मृत हो चुकी है।
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जबकि पूर्व में इस नदी के पानी से गोमती की धार को गति मिलने के साथ ही लगभग तीन दर्जन गांवों में फसलों की सिंचाई होती थी। मगर अब इस नदी के किनारे तक कब्जा करके खेती की जा रही है।
धड़ल्ले से हो रहा अवैध खनन
भैंसी नदी सूखी तो खनन माफिया और भूमाफिया भी सक्रिय हो गए। बंडा से लेकर पुवायां तक नदी की भूमि कब्जा कर खेती शुरू कर दी गई है। वहीं, गांव बिलंदापुर, गदाईसांडा समेत कई स्थानों पर अवैध रूप से रेत खनन किया जा रहा है। मगर राजस्वकर्मियों, खनन विभाग और पुलिस यहां कार्रवाई की जरूरत ही नहीं समझती।
नदी भूमि पर अवैध कब्जे हैं तो उनको हटवाया जाएगा। सभी लोगों को प्रयास करना चाहिए कि नदियों की धार अरिल बहती रहे। - दशरथ कुमार, एसडीएम पुवायां