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किसानों की जेब खाली, कैसे मने दीवाली
अमर उजाला ब्यूरो पुवायां।
Updated Sat, 29 Oct 2016 11:42 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सरकारी क्रय केंद्र गायब, उधार में धान खरीद रहे आढ़ती
गन्ने का गत वर्ष का रुपया भी बाकी, परेशान हैं अन्नदाता
दिवाली पर किसान परेशान हैं। बच्चे पटाखों की जिद कर रहे हैं तो घर के लिए पूजा का सामान भी खरीदना है, लेकिन जब जेब ही खाली है तो त्योहार कैसे मनेगा।
किसानों का गत वर्ष का गन्ने का बकाया अभी तक नहीं मिल सका है। सरकार ने मिल मालिकों के पक्ष में बकाया राशि का ब्याज भी माफ कर दिया है, लेकिन किसान को उसका भुगतान दिलाने के नाम पर मिलों को नोटिस देने के अलावा कुछ नहीं किया गया। सूखा राहत राशि के नाम पर भी किसानों के साथ मजाक किया गया है। तमाम किसानों को सूखा राहत राशि का पैसा भी नहीं मिल सका है, जिन्हें मिला भी, वह ऊंट के मुंह में जीरा जैसा था।
धान की फसल तैयार होने पर किसानों को उम्मीद थी कि धान सरकारी रेट पर बिक सकेगा और दिवाली मनाने के लिए धन की कमी नहीं होगी, लेकिन यहां भी किसानों की उम्मीद धूल धूसरित हो र्गइं। धान की खरीद में भारी गोलमाल किया जा रहा है। किसानों का धान तमाम कमियां बताकर खरीदा ही नहीं जा रहा है। सेंटर दलालों के कब्जे में हैं और दलाल आढ़तियों से साठगांठ कर धान की सरकारी खरीद दिखाकर सरकार को चूना लगा रहे हैं, वहीं किसान धान बिक्री के लिए दर दर की ठोेकरें खाता घूम रहा है। किसान धान को दलालों के हाथ एक हजार से 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल बेचने को मजबूर है। इसके बाद भी धान बिक्री की राशि नगदी नहीं मिलने से दीपावली का त्योहार फीका पड़ गया है।
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सरकार में घमासान तो कैसे हो समस्या का समाधान
सपा सरकार में शीर्ष स्तर पर भारी उथल पुथल मची हुई है। सपा सुप्रीमो के परिवार के झगड़े के कारण प्रदेश में सारे काम ठप पड़ गए हैं, ऐसे में किसान हित की चिंता है ही किसे। किसान एकजुट हो जाएं तो नेताओं को पता चल जाएगा।
प्रभजोत सिंह, जिला उपाध्यक्ष भाकियू गांव पुनौती, खुटार
किसानों का त्योहार फीका रहेगा
कैसी दीवाली और कैसा त्योहार। जब जेब खाली है तो त्योहार कैसे मने। नेता और अधिकारी किसानों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। किसान खुशहाल होगा तभी देश खुशहाल हो सकेगा।
- श्यामबाबू शुक्ल, गांव सिरखिड़ी, पुवायां
चुनावों में दिखेगा किसानों का गुस्सा
प्रदेश का किसान बेहद परेशान है। गन्ने की बकाया राशि नहीं मिल रही है। धान भी सरकारी रेट पर नहीं बिक रहा है। भाकियू जल्द ही इस संबंध में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
- अनिल सिंह यादव, तहसील अध्यक्ष भाकियू पुवायां
ठप हो गया व्यापार
किसान बेहद परेशान हैं। किसानों के पास रुपये नहीं होने के कारण व्यापार पर भी बेहद खराब असर पड़ा है। किसान हर ट्रेड के व्यापार के मूल में है। यदि किसान परेशान होंगे तो तमाम व्यापार ठप पड़ जाएंगे। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- धीरज शर्मा, कृषि यंत्र निर्माता पुवायां
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गन्ने का गत वर्ष का रुपया भी बाकी, परेशान हैं अन्नदाता
दिवाली पर किसान परेशान हैं। बच्चे पटाखों की जिद कर रहे हैं तो घर के लिए पूजा का सामान भी खरीदना है, लेकिन जब जेब ही खाली है तो त्योहार कैसे मनेगा।
किसानों का गत वर्ष का गन्ने का बकाया अभी तक नहीं मिल सका है। सरकार ने मिल मालिकों के पक्ष में बकाया राशि का ब्याज भी माफ कर दिया है, लेकिन किसान को उसका भुगतान दिलाने के नाम पर मिलों को नोटिस देने के अलावा कुछ नहीं किया गया। सूखा राहत राशि के नाम पर भी किसानों के साथ मजाक किया गया है। तमाम किसानों को सूखा राहत राशि का पैसा भी नहीं मिल सका है, जिन्हें मिला भी, वह ऊंट के मुंह में जीरा जैसा था।
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धान की फसल तैयार होने पर किसानों को उम्मीद थी कि धान सरकारी रेट पर बिक सकेगा और दिवाली मनाने के लिए धन की कमी नहीं होगी, लेकिन यहां भी किसानों की उम्मीद धूल धूसरित हो र्गइं। धान की खरीद में भारी गोलमाल किया जा रहा है। किसानों का धान तमाम कमियां बताकर खरीदा ही नहीं जा रहा है। सेंटर दलालों के कब्जे में हैं और दलाल आढ़तियों से साठगांठ कर धान की सरकारी खरीद दिखाकर सरकार को चूना लगा रहे हैं, वहीं किसान धान बिक्री के लिए दर दर की ठोेकरें खाता घूम रहा है। किसान धान को दलालों के हाथ एक हजार से 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल बेचने को मजबूर है। इसके बाद भी धान बिक्री की राशि नगदी नहीं मिलने से दीपावली का त्योहार फीका पड़ गया है।
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सरकार में घमासान तो कैसे हो समस्या का समाधान
सपा सरकार में शीर्ष स्तर पर भारी उथल पुथल मची हुई है। सपा सुप्रीमो के परिवार के झगड़े के कारण प्रदेश में सारे काम ठप पड़ गए हैं, ऐसे में किसान हित की चिंता है ही किसे। किसान एकजुट हो जाएं तो नेताओं को पता चल जाएगा।
प्रभजोत सिंह, जिला उपाध्यक्ष भाकियू गांव पुनौती, खुटार
किसानों का त्योहार फीका रहेगा
कैसी दीवाली और कैसा त्योहार। जब जेब खाली है तो त्योहार कैसे मने। नेता और अधिकारी किसानों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। किसान खुशहाल होगा तभी देश खुशहाल हो सकेगा।
- श्यामबाबू शुक्ल, गांव सिरखिड़ी, पुवायां
चुनावों में दिखेगा किसानों का गुस्सा
प्रदेश का किसान बेहद परेशान है। गन्ने की बकाया राशि नहीं मिल रही है। धान भी सरकारी रेट पर नहीं बिक रहा है। भाकियू जल्द ही इस संबंध में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
- अनिल सिंह यादव, तहसील अध्यक्ष भाकियू पुवायां
ठप हो गया व्यापार
किसान बेहद परेशान हैं। किसानों के पास रुपये नहीं होने के कारण व्यापार पर भी बेहद खराब असर पड़ा है। किसान हर ट्रेड के व्यापार के मूल में है। यदि किसान परेशान होंगे तो तमाम व्यापार ठप पड़ जाएंगे। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
- धीरज शर्मा, कृषि यंत्र निर्माता पुवायां