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एसआईटी की जांच में आठ और फर्जी शिक्षक सामने आए

Fri, 03 Jul 2020 11:16 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2020 11:16 PM IST
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Eight more fake teachers revealed in SIT investigation
शाहजहांपुर। शिक्षा विभाग में अनामिका शुक्ला प्रकरण सामने आने के बाद प्रदेश सरकार फर्जी शिक्षकों को लेकर बेहद गंभीर है। एसआईटी की जांच के बाद बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षकों के नाम सामने आए हैं। गुप-चुप तरीके से चल रही जांच में हजारों ऐसे शिक्षक सामने आए , जिन्होंने अपने पैन नंबर बदलवा लिए हैं। एसआईटी ने पैन नंबर बदलने वाले 3342 बेसिक शिक्षकों की सूची जारी की है, जिनमें आठ शिक्षक शाहजहांपुर के हैं।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से वर्ष 2004-05 में बीएड के फर्जी अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रदेश में हजारों लोगों ने बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद हथिया लिया था। यह मामला हाईकोर्ट में पहुंचा और एसआईटी जांच के बाद इसकी एक-एक कर परतें उखड़ती चली गईं। अब एसआईटी की जांच में ऐसा भी मामला पकड़ में आया है, जिसमें 3342 शिक्षकों के पैन नंबर बदले गए हैं। पैन नंबर बदले जाने की बात सामने आने पर शिक्षा निदेशक ने इसकी जांच भी शुरू करा दी है। साथ ही बीएसए को पैन नंबर बदलने वाले शिक्षकों की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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अपने जनपद में ऐसे शिक्षक भावलखेड़ा, ददरौल, जैतीपुर, जलालाबाद, खुटार और मिर्जापुर ब्लॉक के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात हैं। बीएसए को इन शिक्षकों की जांच कर उसकी रिपोर्ट सचिव/ वित्त नियंत्रक, बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज और शिक्षा निदेशक बेसिक को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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एसआईटी जांच में शिक्षकों की मैचिंग कराई गई, जिसमें कुछ तमाम शिक्षकों के नाम और पिता का नाम मैच कर रहा है। अब इनकी जन्मतिथि आदि की जांच कराई जा रही है, जो आठ शिक्षक जनपद के सामने आए हैं, उनमें पहले के चिन्हित 18 शिक्षकों में से तीन नाम शामिल हैं। इनके अलावा दो शिक्षकों का मैनपुरी और कन्नौज में अंतरजनपदीय स्थानांतरण हो चुका है, आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएड की डिग्री के बजाय बीटीसी कर नौकरी पाए हैं। इस सभी की जांच की जा रही है।
राकेश कुमार, बीएसए
बीएसए ने निदेशक को भेजी शिक्षकों की जांच आख्या
पहले बर्खास्त हो चुके 30 शिक्षकों से की जाएगी 7,16,86,608 रुपये की रिकवरी
शाहजहांपुर। एसआईटी द्वारा मानव संपदा के डाटा मिलान पर फर्जी पाए शिक्षकों के संबंध में बीएसए ने अपनी आख्या शिक्षा निदेशक बेसिक को भेज दी है। साथ ही इससे पूर्व बर्खास्त हो चुके 30 शिक्षकों से वेतन की रिकवरी के लिए आरसी जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
बीएसए राकेश कुमार ने सूची में शामिल सभी आठ शिक्षकों के बारे में जांच कर आख्या में बताया है कि विकास खंड भावलखेड़ा के प्राथमिक विद्यालयतोनी के शिक्षक संजीव कुमार के अभिलेखों की जांच की गई। शिक्षक द्वारा आगरा विश्वविद्यालय से बीएड की डिग्री प्राप्त नहीं की गई है, बल्कि दूरस्थ बीटीसी के आधार पर चयनित है। इसी तरह प्राथमिक विद्यालय नागरपाल के शिक्षक अजय कुमार ने भी आगरा विवि से नहीं, बल्कि कानपुर विवि से बीएड किया है। दोनों शिक्षकों विस्तृत जांच के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से आख्या मांगी गई है।
ददरौल ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय लालपुर के अनिल कुमार अध्यापक के बजाय शिक्षामित्र पद पर कार्यरत हैं। शिक्षामित्र ने बताया कि उसने आगरा विवि से कोई शिक्षा ग्रहण नहीं की है। जैतीपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय रुद्रपुर के विपिन कुमार का अंतरजनदीय स्थानांतरण मैनपुरी हो चुका है, इसलिए मैनपुरी के बीएसए को विधिक कार्रवाई के लिए लिखा गया है। जलालाबाद के प्राथमिक विद्यालय के अशोक कुमार शर्मा को वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है और उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आगरा विवि को जांच के लिए लिखा गया है।

खुटार के उच्च प्राथमिक विद्यालय के राजेश कुमार, मिर्जापुर के कबरा बड़ा के जगत सिंह और दरियागंज स्कूल के देवकी नंदन एसआईटी जांच में फर्जी पाए जाने के कारण 22 जून 2019 को बर्खास्त किए जा चुके हैं। इसी तरह मिर्जापुर के प्राथमिक विद्यालय विरहिमपुर के विजय सिंह का अंतरजनपदीय स्थानांतरण कन्नौज हो चुका था, वहां के बीएसए ने बताया कि एसआईटी जांच में बीएड डिग्री फर्जी पाए जाने के कारण इन्हें बर्खास्त किया जा चुका है। बीएसए ने बताया कि इसी कड़ी में पहले जिन 30 शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है, उनसे सात करोड़, 16 लाख, छियासी हजार, छह सौ आठ रुपये की रिकवरी की जाएगी, जिसके लिए आरसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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