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ऐसे तो नहीं रुकेगी ठेके पर होने वाली नकल
शाहजहांपुर
Updated Fri, 20 Feb 2015 12:30 AM IST
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बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन और शुचितापूर्ण कराने के लिए शासन-प्रशासन और विभाग चाहें जितने प्रयास कर ले, लेकिन तहसील जलालाबाद क्षेत्र के तमाम ऐसे केंद्र हैं, जो नकल के लिए दशकों से बदनाम हैं। इन केंद्रों पर आज भी ठेके पर नकल कराने की व्यवस्था है। यह अलग बात है कि नकल कराने का तरीका बदल दिया गया है।
नकल के लिए बदनाम केंद्रों पर ऐसे लोग कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी कर रहे हैं, जिनका स्कूल-कॉलेजों सेे दूर तक कोई वास्ता ही नहीं है। क्षेत्र के स्कूल-कॉलेजों में शिक्षकों का अभाव कोई नई बात नहीं है, इसलिए परीक्षा में ऐसे युवकों को कक्ष निरीक्षक बना दिया गया है, जिनका पूरे वर्ष स्कूल-कॉलेज से कोई वास्ता नहीं रहता। इनमें कई तो ऐसे हैं, जो स्वयं विद्यार्थी भी हैं। ऐसे तथाकथित शिक्षकों को सिर्फ इसलिए कक्ष निरीक्षक बनाया जाता है ताकि वह विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई नकल सामग्री को परीक्षा कक्ष में बोल कर परीक्षार्थियों को लाभांवित करा सकें।
सचल दलों की हो रही है निगरानी
जलालाबाद क्षेत्र में कई युवकों ने बताया कि परीक्षा केंद्र पर जाने वाले मार्ग के हर मोड़ पर शिक्षा माफिया का आदमी तैनात रहता है, जो सचल दल का वाहन देखते ही मोबाइल से केंद्र पर सूचना दे देता है। जिससे सचल दल जब अमुक केंद्र पर पहुंचता है तब उसे सबकुछ ओके मिलता है।
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प्रबंधकों ने तय कर दिया सुविधा शुल्क
परीक्षा केंद्र बने स्कूल-कॉलेजों के प्रबंधकों ने दुपहिया वाहन से आने वाले अधिकारियों की पांच सौ और चार पहिया वाहन से आने वाले अधिकारियों के कैडर के अनुसार 1000 से 2000 हजार रुपये सुविधा शुल्क तय कर दिया है। सुविधा शुल्क से भी नहीं मानने वाले अधिकारी पर राजनीतिक दबाव डलवाकर खामोश कर दिया जाता है। इसलिए ये अधिकारी केंद्र पर होने वाले तमाशे को चुपचाप देखते रहते हैं।
डीएम के बीमार होने से भी माफिया खुश
नकल माफिया को परीक्षा के दौरान डीएम का भय सताता रहता है, लेकिन इस बार डीएम के अचानक बीमार होने से माफिया खुश हैं, क्योंकि परीक्षा के पहले दिन सब कुछ मनमाफिक हुआ।
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नकल के लिए बदनाम केंद्रों पर ऐसे लोग कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी कर रहे हैं, जिनका स्कूल-कॉलेजों सेे दूर तक कोई वास्ता ही नहीं है। क्षेत्र के स्कूल-कॉलेजों में शिक्षकों का अभाव कोई नई बात नहीं है, इसलिए परीक्षा में ऐसे युवकों को कक्ष निरीक्षक बना दिया गया है, जिनका पूरे वर्ष स्कूल-कॉलेज से कोई वास्ता नहीं रहता। इनमें कई तो ऐसे हैं, जो स्वयं विद्यार्थी भी हैं। ऐसे तथाकथित शिक्षकों को सिर्फ इसलिए कक्ष निरीक्षक बनाया जाता है ताकि वह विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई नकल सामग्री को परीक्षा कक्ष में बोल कर परीक्षार्थियों को लाभांवित करा सकें।
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सचल दलों की हो रही है निगरानी
जलालाबाद क्षेत्र में कई युवकों ने बताया कि परीक्षा केंद्र पर जाने वाले मार्ग के हर मोड़ पर शिक्षा माफिया का आदमी तैनात रहता है, जो सचल दल का वाहन देखते ही मोबाइल से केंद्र पर सूचना दे देता है। जिससे सचल दल जब अमुक केंद्र पर पहुंचता है तब उसे सबकुछ ओके मिलता है।
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प्रबंधकों ने तय कर दिया सुविधा शुल्क
परीक्षा केंद्र बने स्कूल-कॉलेजों के प्रबंधकों ने दुपहिया वाहन से आने वाले अधिकारियों की पांच सौ और चार पहिया वाहन से आने वाले अधिकारियों के कैडर के अनुसार 1000 से 2000 हजार रुपये सुविधा शुल्क तय कर दिया है। सुविधा शुल्क से भी नहीं मानने वाले अधिकारी पर राजनीतिक दबाव डलवाकर खामोश कर दिया जाता है। इसलिए ये अधिकारी केंद्र पर होने वाले तमाशे को चुपचाप देखते रहते हैं।
डीएम के बीमार होने से भी माफिया खुश
नकल माफिया को परीक्षा के दौरान डीएम का भय सताता रहता है, लेकिन इस बार डीएम के अचानक बीमार होने से माफिया खुश हैं, क्योंकि परीक्षा के पहले दिन सब कुछ मनमाफिक हुआ।