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Shahjahanpur News: छह महीने से 11 सीएचसी में धूल फांक रहीं डिजिटल एक्स-रे मशीनें
Thu, 02 May 2024 03:38 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 02 May 2024 03:38 AM IST
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कांट सीएचसी में एक्स-रे कक्ष में लगा ताला। संवाद
शाहजहांपुर। जिले की 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में छह महीने से डिजिटल एक्स-रे मशीनें धूल फांक रहीं हैं। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी तकनीशियनों की तैनाती नहीं होने से मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे में मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है।
पुवायां, तिलहर और जलालाबाद सीएचसी में मरीजों को एक्स-रे की सुविधा मिल रही है। शेष 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों को लाभ देने के लिए शासन ने डिजिटल एक्स-रे मशीनों को भेजा था। एक मशीन की कीमत करीब 17.86 लाख रुपये है।
नवंबर में एक्स-रे मशीनें मिलने के बाद मुख्यालय से स्वास्थ्य इकाइयों पर भेज दिया गया था, लेकिन इन्हें चलाने के तकनीशियन की नियुक्ति नहीं हो सकी है। कांट, मिर्जापुर, खुटार, कलान, जैतीपुर आदि सीएचसी पर आने वाले मरीजों को एक्स-रे के लिए लिखकर पर्ची थमा दी जाती है। सरकारी सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को रुपये खर्च कर निजी केंद्रों पर एक्स-रे कराना पड़ रहा है नहीं तो जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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ऐसे में राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक्स-रे का बोझ बढ़ रहा है। एक दिन में यहां 150 मरीजों के एक्स-रे किए जा रहे हैं। सीएचसी में सुविधा शुरू होने के बाद यहां आधे से ज्यादा मरीजों के कम होने की संभावना है। इससे व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सकेगा।
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जिले में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति भी नहीं
-अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे का अध्ययन करने वाले रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती भी वर्षों से जिले में नहीं हुई है। ऐसे में तहसील स्तर पर सादा एक्स-रे देखने के बाद संबंधित डॉक्टर स्वयं ही रिपोर्ट बना कर दे देते थे। गंभीर स्थिति में टेली रेडियोलॉजी की व्यवस्था का सहारा लिया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, 24 घंटे के अंदर मरीजों की रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है।
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एक्स-रे मशीनों के लिए तकनीशियन की नियुक्ति के लिए शासन से पत्राचार कर चुके हैं। समस्या का समाधान शासन स्तर से होगा।
डॉ. आरके गौतम, सीएमओ
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पुवायां, तिलहर और जलालाबाद सीएचसी में मरीजों को एक्स-रे की सुविधा मिल रही है। शेष 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले मरीजों को लाभ देने के लिए शासन ने डिजिटल एक्स-रे मशीनों को भेजा था। एक मशीन की कीमत करीब 17.86 लाख रुपये है।
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नवंबर में एक्स-रे मशीनें मिलने के बाद मुख्यालय से स्वास्थ्य इकाइयों पर भेज दिया गया था, लेकिन इन्हें चलाने के तकनीशियन की नियुक्ति नहीं हो सकी है। कांट, मिर्जापुर, खुटार, कलान, जैतीपुर आदि सीएचसी पर आने वाले मरीजों को एक्स-रे के लिए लिखकर पर्ची थमा दी जाती है। सरकारी सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को रुपये खर्च कर निजी केंद्रों पर एक्स-रे कराना पड़ रहा है नहीं तो जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।
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ऐसे में राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक्स-रे का बोझ बढ़ रहा है। एक दिन में यहां 150 मरीजों के एक्स-रे किए जा रहे हैं। सीएचसी में सुविधा शुरू होने के बाद यहां आधे से ज्यादा मरीजों के कम होने की संभावना है। इससे व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सकेगा।
जिले में रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति भी नहीं
-अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे का अध्ययन करने वाले रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती भी वर्षों से जिले में नहीं हुई है। ऐसे में तहसील स्तर पर सादा एक्स-रे देखने के बाद संबंधित डॉक्टर स्वयं ही रिपोर्ट बना कर दे देते थे। गंभीर स्थिति में टेली रेडियोलॉजी की व्यवस्था का सहारा लिया जाता है। अधिकारियों के अनुसार, 24 घंटे के अंदर मरीजों की रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है।
एक्स-रे मशीनों के लिए तकनीशियन की नियुक्ति के लिए शासन से पत्राचार कर चुके हैं। समस्या का समाधान शासन स्तर से होगा।
डॉ. आरके गौतम, सीएमओ