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Shahjahanpur News: रामगंगा और बहगुल में पानी घटने के बावजूद बाढ़ से नहीं मिली राहत
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जलालाबाद के ग्राम कसारी में पानी भरे रास्ते से निकलते ग्रामीण। संवाद
जलालाबाद। रामगंगा और बहगुल में पानी घटने के बावजूद अल्हागंज से लेकर मदनापुर क्षेत्र तक नदियों के तटीय गांवों के लोगों को बाढ़ से कोई राहत नहीं मिल सकी। गत पांच दिन से बाढ़ से घिरे 60 गांवों में सैकड़ों बीघा फसलें डूबी हैं और तमाम गांवों के संपर्क मार्ग जलमग्न होने से ग्रामीणों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। जिन गांवों के पास से पानी उतर रहा है, वहां बीमारियां फैलने लगी हैं, लेकिन ग्रामीणों को दवाएं भी नहीं मिल रहीं हैं।
रविवार शाम से सोमवार सुबह तक करीब एक फुट पानी उतर चुका है, लेकिन कई गांवों के रास्ते अब भी पानी से घिरे होने से आवागमन में बाधा बने हुए हैं। खेतों में भरे पानी को सूखने में भी अभी वक्त लगेगा। प्रभावित क्षेत्रों में पीने के साफ पानी और बिजली की किल्लत भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
प्रशासन से उपलब्ध कराई गई नावें नाकाफी होने से कई गांवों के लोग गृहस्थी आदि का सामान लेकर रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने को जलमग्न रास्तों से पैदल, बाइक या फिर साइकिलों से निकल रहे हैं। सफर खतरनाक होने के बावजूद लोग तेजी से बह रहे पानी में घुसकर आवाजाही कर रहे हैं।
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लंबे समय से खेताें में पानी भरा होने से धान को छोड़कर तिल, बाजरा, मूंगफली आदि अन्य कई फसलें लगभग बरबाद हो चुकी हैं। प्रभारी तहसीलदार अनुराग दुबे ने बताया कि सुरक्षित आवागमन के विभिन्न गांवों में आठ नावें और एक मोटरबोट उपलब्ध कराई गई है।
उनका कहना है कि कुछ लोग नाव का इंतजार करने के बजाय जल्दबाजी मे पानी भरे रास्तों से निकलने का प्रयास करते हैं। इसकी जानकारी होने पर सोमवार को उन्होंने प्रभारी निरीक्षक राजीव तोमर के साथ तिकोला सहित अन्य जगहों पर पहुंचकर ऐसे लोगों को संभावित खतरे के प्रति आगाह करते हुए नाव से आवागमन करने के लिए कहा है।
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पानी कम होने के साथ फैल रहीं बीमारियां
जलालाबाद। बाढ़ प्रभावित गांवों में खांसी, जुकाम, बुखार और डायरिया जैसी बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। बलदेवपुर के रतीराम और अजय ने बताया कि उनके गांव में कई लोग बुखार, खांसी, जुकाम और खुजली आदि बीमारियों से पीड़ित है। अब तक स्वास्थ्य विभाग से कोई टीम गांव नहीं पहुंची है। बाढ़ से घिरे कई अन्य गांवों में भी संक्रामक रोगों से परेशान ग्रामीण नगर आकर दवाएं खरीद रहे हैं। हालांकि, सीएचसी के अधीक्षक डॉ. सोमेश्वर अग्निहोत्री का दावा है कि विभागीय टीमें प्रतिदिन बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंच रही हैं। उन्हाेंने बताया कि सोमवार को कसारी गांव में कैंप लगाकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की गई। साथ ही अस्वस्थ पाए गए ग्रामीणों को दवाएं भी दी गईं हैं। संवाद
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सहायता के लिए आगे आए कई संगठनों के कार्यकर्ता
जलालाबाद। परशुराम सर्व कल्याण समिति की ओर से सोमवार को खंडहर क्षेत्र के बाढ़ ग्रस्त कई गांवों में प्रभावित परिवारों को खाने के पैकेट, बिस्कुट तथा पानी की बोतलें बांटी गईं। इस दौरान समिति के प्रदीप मिश्रा, अमित सिंह, राजीव द्विवेदी, राजू मिश्रा, हर्षित द्विवेदी, सर्वेश दीक्षित आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में भारतीय बजरंग दल की टीम ने मिर्जापुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों को खाद्य सामग्री वितरित की। इस कार्य में मुनिराज सिंह, विवेक मिश्रा, विपिन सिंह, निर्भय सिंह, सुरजीत आदि का सहयोग रहा। संवाद
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राहत शिविर से लौटे ग्रामीणों को सताने लगीं बीमारियां
तिलहर। गर्रा नदी में पानी घटने के बावजूद तटवर्ती गांव घनश्यामपुर,आजमाबाद, बिहारीपुर, रटा, रटी, जिकरीपुर, धन्यौरा आदि गांवों में अब तक पानी भरा है। इन गांवों के घरों में घुसा पानी निकल जाने से ग्रामीण नगर में बनाए गए आपदा राहत शिविर से अपने घरों को लौट गए, लेकिन वहां उन्हें जुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त और चर्म रोग आदि बीमारियां परेशान कर रही हैं। आजमाबाद के विजय और रटा निवासी बृजेश ने बताया कि पानी कम होने के बाद गांव में बीमारियां बढ़ गई हैं। चारा नहीं मिलने से पशु भी कमजोर और बीमार हो रहे हैं। एसडीएम रवींद्र कुमार ने बताया बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण स्वेच्छा से राहत कैंप छोड़कर अपने घरों को गए हैं। उनका कहना है कि जरूरत होने पर दोबारा राहत शिविर लगाए जाएंगे। एसडीएम के अनुसार प्रभावित गांवों में दूषित पानी और मच्छरों से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए कीटनाशकों का छिड़काव जल्द कराया जाएगा। संवाद
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खुदागंज क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से मिले ग्राम प्रधान
खुदागंज। अखिल भारतीय प्रधान संगठन के जिला उपाध्यक्ष रंजीत सिंह ने कई ग्राम प्रधानों के साथ सोमवार को बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा करके ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान रामेश्वरगंज गौंटिया, कुआंडांडा खंजन, होशीपुर, नवादा, नौगवां, उत्तमपुर आदि गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि अब तक न तो बाढ़ में नष्ट हुई फसलों का सर्वे किया गया और न ही दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पर उन्हाेंने अधिकारियों से बात कर मदद करने का आश्वासन दिया। संवाद
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मिर्जापुर : गंगा में उफान बढ़ने से तटवर्ती गांवों में फिर घुसने लगा पानी
मिर्जापुर। गंगा में उफान बढ़ने से तटवर्ती गांवों में फिर से पानी घुसने लगा है। जो ग्रामीण एक दिन पहले सुरक्षित स्थानों से घरों को लौटे, वे फिर से गृहस्थी के सामान समेत पलायन करने के लिए मजबूर हैं। गंगा के किनारे बसे भरतपुर, पैलानी उत्तरी, कटैलानगला, मोतीनगला, लोहारनगला, इस्लामनगर, आजादनगर, पकड़ियानगला, बख्तावरगंज, मस्जिदनगला आदि गांव बाढ़ से पहले से घिरे हुए हैं। शमशाबाद स्टेट हाईवे पर तेजी से पानी बहने के कारण गुटेटी उत्तर गांव के पास रपटा पुलिया पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहां मोटर बोट के सहारे लोग निकल रहे हैं। हाईवे पर ही चौरा गांव के पास बह रहे पानी के बीच लोग जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं। एसडीएम अभिषेक प्रताप सिंह के अनुसार जरूरत होने पर सर्वे कराकर राहत सामग्री बांटी जाएगी। संवाद
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रविवार शाम से सोमवार सुबह तक करीब एक फुट पानी उतर चुका है, लेकिन कई गांवों के रास्ते अब भी पानी से घिरे होने से आवागमन में बाधा बने हुए हैं। खेतों में भरे पानी को सूखने में भी अभी वक्त लगेगा। प्रभावित क्षेत्रों में पीने के साफ पानी और बिजली की किल्लत भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
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प्रशासन से उपलब्ध कराई गई नावें नाकाफी होने से कई गांवों के लोग गृहस्थी आदि का सामान लेकर रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने को जलमग्न रास्तों से पैदल, बाइक या फिर साइकिलों से निकल रहे हैं। सफर खतरनाक होने के बावजूद लोग तेजी से बह रहे पानी में घुसकर आवाजाही कर रहे हैं।
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लंबे समय से खेताें में पानी भरा होने से धान को छोड़कर तिल, बाजरा, मूंगफली आदि अन्य कई फसलें लगभग बरबाद हो चुकी हैं। प्रभारी तहसीलदार अनुराग दुबे ने बताया कि सुरक्षित आवागमन के विभिन्न गांवों में आठ नावें और एक मोटरबोट उपलब्ध कराई गई है।
उनका कहना है कि कुछ लोग नाव का इंतजार करने के बजाय जल्दबाजी मे पानी भरे रास्तों से निकलने का प्रयास करते हैं। इसकी जानकारी होने पर सोमवार को उन्होंने प्रभारी निरीक्षक राजीव तोमर के साथ तिकोला सहित अन्य जगहों पर पहुंचकर ऐसे लोगों को संभावित खतरे के प्रति आगाह करते हुए नाव से आवागमन करने के लिए कहा है।
पानी कम होने के साथ फैल रहीं बीमारियां
जलालाबाद। बाढ़ प्रभावित गांवों में खांसी, जुकाम, बुखार और डायरिया जैसी बीमारियों ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। बलदेवपुर के रतीराम और अजय ने बताया कि उनके गांव में कई लोग बुखार, खांसी, जुकाम और खुजली आदि बीमारियों से पीड़ित है। अब तक स्वास्थ्य विभाग से कोई टीम गांव नहीं पहुंची है। बाढ़ से घिरे कई अन्य गांवों में भी संक्रामक रोगों से परेशान ग्रामीण नगर आकर दवाएं खरीद रहे हैं। हालांकि, सीएचसी के अधीक्षक डॉ. सोमेश्वर अग्निहोत्री का दावा है कि विभागीय टीमें प्रतिदिन बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंच रही हैं। उन्हाेंने बताया कि सोमवार को कसारी गांव में कैंप लगाकर ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की गई। साथ ही अस्वस्थ पाए गए ग्रामीणों को दवाएं भी दी गईं हैं। संवाद
सहायता के लिए आगे आए कई संगठनों के कार्यकर्ता
जलालाबाद। परशुराम सर्व कल्याण समिति की ओर से सोमवार को खंडहर क्षेत्र के बाढ़ ग्रस्त कई गांवों में प्रभावित परिवारों को खाने के पैकेट, बिस्कुट तथा पानी की बोतलें बांटी गईं। इस दौरान समिति के प्रदीप मिश्रा, अमित सिंह, राजीव द्विवेदी, राजू मिश्रा, हर्षित द्विवेदी, सर्वेश दीक्षित आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में भारतीय बजरंग दल की टीम ने मिर्जापुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों को खाद्य सामग्री वितरित की। इस कार्य में मुनिराज सिंह, विवेक मिश्रा, विपिन सिंह, निर्भय सिंह, सुरजीत आदि का सहयोग रहा। संवाद
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राहत शिविर से लौटे ग्रामीणों को सताने लगीं बीमारियां
तिलहर। गर्रा नदी में पानी घटने के बावजूद तटवर्ती गांव घनश्यामपुर,आजमाबाद, बिहारीपुर, रटा, रटी, जिकरीपुर, धन्यौरा आदि गांवों में अब तक पानी भरा है। इन गांवों के घरों में घुसा पानी निकल जाने से ग्रामीण नगर में बनाए गए आपदा राहत शिविर से अपने घरों को लौट गए, लेकिन वहां उन्हें जुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त और चर्म रोग आदि बीमारियां परेशान कर रही हैं। आजमाबाद के विजय और रटा निवासी बृजेश ने बताया कि पानी कम होने के बाद गांव में बीमारियां बढ़ गई हैं। चारा नहीं मिलने से पशु भी कमजोर और बीमार हो रहे हैं। एसडीएम रवींद्र कुमार ने बताया बाढ़ से प्रभावित ग्रामीण स्वेच्छा से राहत कैंप छोड़कर अपने घरों को गए हैं। उनका कहना है कि जरूरत होने पर दोबारा राहत शिविर लगाए जाएंगे। एसडीएम के अनुसार प्रभावित गांवों में दूषित पानी और मच्छरों से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए कीटनाशकों का छिड़काव जल्द कराया जाएगा। संवाद
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खुदागंज क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों से मिले ग्राम प्रधान
खुदागंज। अखिल भारतीय प्रधान संगठन के जिला उपाध्यक्ष रंजीत सिंह ने कई ग्राम प्रधानों के साथ सोमवार को बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा करके ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान रामेश्वरगंज गौंटिया, कुआंडांडा खंजन, होशीपुर, नवादा, नौगवां, उत्तमपुर आदि गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि अब तक न तो बाढ़ में नष्ट हुई फसलों का सर्वे किया गया और न ही दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पर उन्हाेंने अधिकारियों से बात कर मदद करने का आश्वासन दिया। संवाद
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मिर्जापुर : गंगा में उफान बढ़ने से तटवर्ती गांवों में फिर घुसने लगा पानी
मिर्जापुर। गंगा में उफान बढ़ने से तटवर्ती गांवों में फिर से पानी घुसने लगा है। जो ग्रामीण एक दिन पहले सुरक्षित स्थानों से घरों को लौटे, वे फिर से गृहस्थी के सामान समेत पलायन करने के लिए मजबूर हैं। गंगा के किनारे बसे भरतपुर, पैलानी उत्तरी, कटैलानगला, मोतीनगला, लोहारनगला, इस्लामनगर, आजादनगर, पकड़ियानगला, बख्तावरगंज, मस्जिदनगला आदि गांव बाढ़ से पहले से घिरे हुए हैं। शमशाबाद स्टेट हाईवे पर तेजी से पानी बहने के कारण गुटेटी उत्तर गांव के पास रपटा पुलिया पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहां मोटर बोट के सहारे लोग निकल रहे हैं। हाईवे पर ही चौरा गांव के पास बह रहे पानी के बीच लोग जान जोखिम में डालकर निकल रहे हैं। एसडीएम अभिषेक प्रताप सिंह के अनुसार जरूरत होने पर सर्वे कराकर राहत सामग्री बांटी जाएगी। संवाद

जलालाबाद के ग्राम कसारी में पानी भरे रास्ते से निकलते ग्रामीण। संवाद

जलालाबाद के ग्राम कसारी में पानी भरे रास्ते से निकलते ग्रामीण। संवाद