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होली की खरीदारी के लिए शहर के बाजार में उमड़ रही भीड़
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शाहजहांपुर के बहादुरगंज बाजार में खरीदारी करने को लगी लोगों की भीड़ । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। होली पर घर आने वाले मेहमानों के लिए लजीज पकवान बनाए जाएंगे। इसको शहर के किराना प्रतिष्ठानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। इसके अलावा कोई रंग-गुलाल, पिचकारी खरीद रहा है तो कोई नए पकड़े। रेडीमेड कपड़ों की बिक्री में एकाएक उछाल आया है। बाजारों में इतनी भीड़ हो रही है कि अब दुकानदारों ने सारी चीजें एक दाम पर बेचनी शुरू कर दी हैं। यही नहीं, सीमित समय में अधिक सामान खरीदने के चक्कर में लोग दुकानदारों से बहुत ज्यादा मोल-भाव भी नहीं कर रहे हैं।
सिलाई के नए आर्डर लेने से बच रहे दर्जी
त्योहार पर नए कपड़े पहनकर होली मिलन की परंपरा है। इसका निर्वाह करने के लिए जिन लोगों ने एक सप्ताह पहले कपड़े खरीद लिए, वह दर्जियों के यहां सिले जा रहे हैं। अब दर्जियों के पास इतना काम बढ़ गया है कि उन्होंने सिलने के लिए कपड़े लेने बंद कर दिए हैं। शहर के प्रमुख टेलरिंग शोरूम पर कपड़े सिलाने के लिए ले जाने पर दर्जी उन्हें होली के बाद आने को कहकर लौटा रहे हैं। इसलिए पुरुष अब सूटिंग-शर्टिंग के कपड़े नहीं खरीद रहे हैं। वस्त्र प्रतिष्ठानों पर महिलाएं साड़ियां खरीद रही हैं, जबकि बच्चों से लेकर युवा सिले-सिलाए कपड़े खरीदने में जुटे हैं।
साड़ियों की खरीदारी कर रहीं महिलाएं
बहादुरगंज के प्रमुख कपड़ा कारोबारी सुनील तुली के अनुसार जिन लोगों ने टेलर से कपड़े सिलवाने की पहले से बात कर रखी है, केवल वही लोग अब थान के कपड़े मांग रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं में सलवार-सूट और साड़ियों की मांग बढ़ गई है। हर आय वर्ग के परिवारों की क्रय शक्ति को ध्यान में रखकर एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये और इससे अधिक रेंज में अलग-अलग प्रिंट और कपड़े की साड़ियां मंगाई हैं।
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उधर, बहादुरगंज के रेडीमेड वस्त्र विक्रेता परमजीत सिंह के अनुसार अब लोग कपड़े सिलवाने के झंझट से बचने के लिए सिले-सिलाए कपड़े लेना अधिक पसंद कर रहे हैं। बताया कि इस बार लॉकडाउन नहीं होने के कारण दो-तीन साल बाद होली का बाजार पटरी पर लौटा प्रतीत हो रहा है। बिक्री ज्यादा होने का अनुमान लगाकर दिल्ली से इस बार माल भी ज्यादा मंगाया, लेकिन रेडीमेड कपड़ों की मांग इतनी ज्यादा है कि अब सहालगी सीजन के लिए नया माल मंगाना पड़ेगा।
गुझिया बनाने को मावा की खरीदारी में ठहराव
गुझिया बनाने के लिए मावा लेने से अभी लोग बच रहे हैं, क्योंकि गर्मी लगातार बढ़ने से पहले से खरीदकर रखने पर मावा के खराब होने का डर है। हालांकि, केरूगंज खोआ मंडी से लेकर मिठाई की दुकानों तक मावा के दाम लगातार चढ़ रहे हैं। एक सप्ताह पहले तक 200 रुपये किलो के भाव पर स्थिर रहा मावा अब 250 से 300 रुपये किलो तक बिक रहा है। कम रेट वाले मावा में चिकनाई कम होती है। वह क्रीम निकले दूध से तैयार हो रहा है। मिठाई विक्रेताओं के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र से दूध की आवक कम होने से मावा के दाम उछल रहे हैं, लेकिन बुधवार से इसकी बिक्री भी बढ़ने के आसार हैं।
नमकीन, ड्राई फ्रूट्स और शीतल पेय की बढ़ी मांग
मेहमानों की खातिरदारी के लिए तरह-तरह की नमकीन, सूखे मेवों और शीतल पेय की मांग में बीते सप्ताह की तुलना में दोगुना उछाल आ गया है। सदर बाजार के कंफ्रेक्शनरी कारोबारी नरेश कौशल के अनुसार खाद्य तेल के दाम चढ़ने से सभी वैरायटी की नमकीन और दालमोंठ के दाम बीते साल की तुलना में 10 से 20 प्रतिशत बढ़ गए हैं। इसके बावजूूद खरीदारी पिछले साल से ज्यादा हो रही है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार 150 रुपये से लेकर 400 रुपये किलो की रेंज में नमकीन खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न कंपनियों ने ड्राई फ्रूट्स भी आकर्षक पैकिंग में बाजार में उतारे हैं।
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सिलाई के नए आर्डर लेने से बच रहे दर्जी
त्योहार पर नए कपड़े पहनकर होली मिलन की परंपरा है। इसका निर्वाह करने के लिए जिन लोगों ने एक सप्ताह पहले कपड़े खरीद लिए, वह दर्जियों के यहां सिले जा रहे हैं। अब दर्जियों के पास इतना काम बढ़ गया है कि उन्होंने सिलने के लिए कपड़े लेने बंद कर दिए हैं। शहर के प्रमुख टेलरिंग शोरूम पर कपड़े सिलाने के लिए ले जाने पर दर्जी उन्हें होली के बाद आने को कहकर लौटा रहे हैं। इसलिए पुरुष अब सूटिंग-शर्टिंग के कपड़े नहीं खरीद रहे हैं। वस्त्र प्रतिष्ठानों पर महिलाएं साड़ियां खरीद रही हैं, जबकि बच्चों से लेकर युवा सिले-सिलाए कपड़े खरीदने में जुटे हैं।
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साड़ियों की खरीदारी कर रहीं महिलाएं
बहादुरगंज के प्रमुख कपड़ा कारोबारी सुनील तुली के अनुसार जिन लोगों ने टेलर से कपड़े सिलवाने की पहले से बात कर रखी है, केवल वही लोग अब थान के कपड़े मांग रहे हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं में सलवार-सूट और साड़ियों की मांग बढ़ गई है। हर आय वर्ग के परिवारों की क्रय शक्ति को ध्यान में रखकर एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये और इससे अधिक रेंज में अलग-अलग प्रिंट और कपड़े की साड़ियां मंगाई हैं।
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उधर, बहादुरगंज के रेडीमेड वस्त्र विक्रेता परमजीत सिंह के अनुसार अब लोग कपड़े सिलवाने के झंझट से बचने के लिए सिले-सिलाए कपड़े लेना अधिक पसंद कर रहे हैं। बताया कि इस बार लॉकडाउन नहीं होने के कारण दो-तीन साल बाद होली का बाजार पटरी पर लौटा प्रतीत हो रहा है। बिक्री ज्यादा होने का अनुमान लगाकर दिल्ली से इस बार माल भी ज्यादा मंगाया, लेकिन रेडीमेड कपड़ों की मांग इतनी ज्यादा है कि अब सहालगी सीजन के लिए नया माल मंगाना पड़ेगा।
गुझिया बनाने को मावा की खरीदारी में ठहराव
गुझिया बनाने के लिए मावा लेने से अभी लोग बच रहे हैं, क्योंकि गर्मी लगातार बढ़ने से पहले से खरीदकर रखने पर मावा के खराब होने का डर है। हालांकि, केरूगंज खोआ मंडी से लेकर मिठाई की दुकानों तक मावा के दाम लगातार चढ़ रहे हैं। एक सप्ताह पहले तक 200 रुपये किलो के भाव पर स्थिर रहा मावा अब 250 से 300 रुपये किलो तक बिक रहा है। कम रेट वाले मावा में चिकनाई कम होती है। वह क्रीम निकले दूध से तैयार हो रहा है। मिठाई विक्रेताओं के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र से दूध की आवक कम होने से मावा के दाम उछल रहे हैं, लेकिन बुधवार से इसकी बिक्री भी बढ़ने के आसार हैं।
नमकीन, ड्राई फ्रूट्स और शीतल पेय की बढ़ी मांग
मेहमानों की खातिरदारी के लिए तरह-तरह की नमकीन, सूखे मेवों और शीतल पेय की मांग में बीते सप्ताह की तुलना में दोगुना उछाल आ गया है। सदर बाजार के कंफ्रेक्शनरी कारोबारी नरेश कौशल के अनुसार खाद्य तेल के दाम चढ़ने से सभी वैरायटी की नमकीन और दालमोंठ के दाम बीते साल की तुलना में 10 से 20 प्रतिशत बढ़ गए हैं। इसके बावजूूद खरीदारी पिछले साल से ज्यादा हो रही है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार 150 रुपये से लेकर 400 रुपये किलो की रेंज में नमकीन खरीद रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न कंपनियों ने ड्राई फ्रूट्स भी आकर्षक पैकिंग में बाजार में उतारे हैं।

शाहजहांपुर के गोविंदगंज बाजार में रेडीमेट कपड़े खरीदते लोग । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR